पोकरण (जैसलमेर): जैसलमेर जिले में पोकरण एरिया के तहत आने वाले गांव बोनाड़ा की पगडंडियों पर हर सुबह एक 19 साल का लड़का देश सेवा का सपना आंखों में संजोए दौड़ता था, नाम था गोपाल सिंह। पसीने से तरबतर चेहरा, सीने में जुनून और हाथों में भारत माता की सेवा का जज्बा। उसकी मेहनत रंग लाई और महज दो महीने पहले परिवार ने नम आंखों, लेकिन गर्व से चौड़े सीने के साथ उसे राजपूताना राइफल्स की वर्दी में दिल्ली प्रशिक्षण के लिए विदा किया था। लेकिन किसे मालूम था कि जिस दौड़ ने उसे सैनिक बनने का रास्ता दिखाया, वही दौड़ उसकी जिंदगी की आखिरी दौड़ बन जाएगी।
दिल्ली में चल रहे प्रशिक्षण के दौरान मंगलवार की सुबह हमेशा की तरह गोपाल सिंह साथी जवानों के साथ दौड़ लगा रहा था। तभी अचानक उसके सीने में उठी तेज दर्द ने उसकी रफ्तार को रोक दिया। वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। साथ मौजूद जवानों और सेना के अधिकारियों ने पलक झपकते ही उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों के लाख प्रयासों के बावजूद 19 वर्षीय गोपाल सिंह की सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने हृदयघात (हार्ट अटैक) को मौत की वजह बताया।
एक किसान पिता चतुर सिंह और गृहिणी मां फत्तुकंवर का वह लाडला बेटा, जो अपने बड़े भाई वीरेंद्र सिंह और बहनों पूनम कंवर व रेखा कंवर का अभिमान था, अब तिरंगे में लिपटा हुआ था। दिल्ली में पोस्टमॉर्टम के बाद जब परिजन पार्थिव शरीर लेकर वापस अपने गांव के लिए रवाना हुए, तो पूरे इलाके में मातम छा गया।

3 किलोमीटर लंबी तिरंगा रैली और भारत माता के जयकारे
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे जैसे ही अग्निवीर गोपाल सिंह का पार्थिव शरीर बोनाड़ा गांव पहुंचा, हर आंख नम हो गई और माहौल देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। अपने लाडले लाल को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा गांव सड़कों पर उतर आया। पार्थिव देह के सम्मान में लगभग तीन किलोमीटर लंबी विशाल तिरंगा रैली निकाली गई। गांव का हर युवा अपने शहीद भाई के सम्मान में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहा था।
जब पार्थिव देह उसके पैतृक घर पहुंची, तो मां-बाप और भाई-बहनों का करुण क्रंदन सुन हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। जिस बेटे को कुछ दिन पहले खुशी-खुशी सेना की वर्दी में भेजा था, उसे तिरंगे में लिपटा देख परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
सेना के जवानों ने अपने साथी के पार्थिव शरीर पर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ तिरंगा ओढ़ाया और ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ की सलामी दी। विधायक महंत प्रतापपुरी, पूर्व विधायक सांग सिंह भाटी, देवी सिंह भैंसड़ा, रघुवीर सिंह ओला, लख सिंह चांधन, हाथी सिंह मूलाना और विजय सिंह भैंसड़ा सहित कई जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सैनिक को श्रद्धांजलि दी।
गांव के श्मशान घाट पर जब गोपाल सिंह की देह को मुखाग्नि दी गई, तो वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें अश्रुपूरित हो गईं। 19 साल की नन्ही सी उम्र में देश सेवा का सपना पूरा करने निकला गोपाल सिंह अमर हो गया, लेकिन उसकी कमी बोनाड़ा गांव और उसके परिवार को ताउम्र रहेगी।

