दरभंगा में 2 प्लस-टू सरकारी स्कूल जहां मात्र 2 कमरों में पढ़ाई होती है। दोनों स्कूल में 650 से 700 स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं। भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश होती है तो पानी टपकता है। प्राथमिक और मध्य विद्यालय की कक्षाएं सुबह करीब 8 से 12 बजे तक और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक की कक्षाएं दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक चलती हैं। राजयकीय नव उत्क्रमित मध्यमिक विद्यालय मझिगामा के लिए नया भवन बनकर 13 से तैयार है। जहां 6 कमरे हैं। पुराने भवन से 300 मीटर की दूरी पर ये भवन है, पर उस भवन में अभी तक स्कूल शिफ्ट नहीं हुआ है। नया भवन 13 साल में अब जर्जर भी होने लगा है। वहीं, दूसरा स्कूल उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंहवाड़ा उत्तरी है। इसके लिए नया भवन नहीं है। ये पुराने भवन में ही चल रहा है।
दोनों स्कूल में क्या परेशानियां हो रही है, स्टूडेंट्स ने क्या कहा, ग्रामीणों क्या कहते हैं, किस हालात में पढ़ाई होते हैं, पढ़ें रिपोर्ट… स्कूल के भवन की कुछ तस्वीरे… नए भवन के निर्माण में 20 लाख रुपए खर्च हुए थे राजयकीय नव उत्क्रमित मध्यमिक विद्यालय मझिगामा केवटी प्रखंड में है। इसके नए भवन का निर्माण 20 लाख रुपए में 2013 में हुआ था। भवन का इस्तेमाल आज तक पढ़ाई के लिए नहीं हुआ। स्कूल अभी पुराने भवन में चल रहा है। जहां प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। मामले को लेकर मझिगामा स्थित महावीर मंदिर परिसर में 2 दिन पहले ग्रामीणों की बैठक हुई थी। बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि छह कमरों वाले नवनिर्मित भवन में विद्यालय का संचालन शुरू कराने के लिए प्रधानाध्यापक से बात की जाएगी। इसके बावजूद भवन में पठन-पाठन शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने 5 बीघा जमीन सरकार को दी थी
ग्रामीण सुजीत झा के अनुसार मझिगामा वार्ड-15 में विद्यालय भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने करीब 5 बीघा जमीन बिहार सरकार के नाम रजिस्ट्री की थी। इसके बाद 19 लाख 97 हजार 400 रुपए की लागत से छह कमरों का विद्यालय भवन बनाया गया। भवन में पेयजल के लिए चापाकल और शौचालय समेत अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। भवन के परिसर में खेलकूद की व्यवस्था भी की गई है। इसके बावजूद निर्माण के 13 साल बाद भी इसमें नियमित पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका। दो कमरों में 700 से अधिक बच्चों की पढ़ाई
ग्रामीण सुजीत झा ने बताया कि वर्तमान में स्कूल में करीब 1 से 12वीं तक लगभग 700 विद्यार्थी नामांकित हैं। पुराने भवन में उपलब्ध कमरों में से महज 2 कमरों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। दो कमरों में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई होने से परेशानी होती है। विद्यालय में करीब 35 शिक्षक हैं, लेकिन पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण शिक्षक और विद्यार्थी दोनों परेशान हैं। कमरों के अभाव में प्रयोगशाला, कंप्यूटर कक्षा और अन्य शिक्षण गतिविधियों के संचालन में भी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि छह कमरों का भवन खाली पड़ा रहने के कारण धीरे-धीरे जर्जर होने की स्थिति में पहुंच रहा है।
बाउंड्री नहीं होने से सुरक्षा की चिंता
ग्रामीण राम ठाकुर ने बताया कि वर्तमान विद्यालय भवन के सामने बड़ा तालाब है। विद्यालय की चहारदीवारी नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती है। वहीं विद्यालय के पास पर्याप्त खेल मैदान भी नहीं है। दूसरी ओर, छह कमरों वाले नवनिर्मित भवन के परिसर में पर्याप्त जमीन के साथ खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि कम से कम माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं को नवनिर्मित भवन में स्थानांतरित किया जाए।
डीईओ के आदेश के बाद भी नहीं हुआ स्थानांतरण
ग्रामीणों का दावा है कि विद्यालय को नवनिर्मित भवन में स्थानांतरित करने के लिए जिलास्तर से कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं। जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्तर से भी आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक विद्यालय का संचालन नए भवन में शुरू नहीं हुआ है। स्थानीय स्तर पर विरोध और आपसी विवाद के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया अटकी हुई है। नए भवन में पढ़ाई शुरू नहीं हुई तो आंदोलन होगा
सरपंच प्रतिनिधि अशोक ठाकुर ने कहा कि एक से 12वीं तक की पढ़ाई महज दो कमरों में होना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। छह कमरों का भवन 13 वर्षों से तैयार है, फिर भी उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द ही नवनिर्मित भवन में पठन-पाठन शुरू नहीं कराया गया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
प्रधानाध्यापक पर लगाया आरोप ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह ने प्रधानाध्यापक फिरोज आलम की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक की ओर से गांव में आपसी विवाद और राजनीति के कारण नवनिर्मित भवन में विद्यालय शिफ्ट करने में बाधा डाला जा रहा। उन्होंने प्रधानाध्यापक पर नियमित रूप से विद्यालय नहीं आने और शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
रवींद्र सिंह ने कहा कि विद्यालय में शिक्षकों के बीच आपसी विवाद के कारण भी पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन में चहारदीवारी नहीं है और सामने तालाब होने के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
अब पढ़ें उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंहवाड़ा उत्तरी में क्या है स्थिति, बच्चों ने क्या कहा, कैसी है परेशानी…. उच्च माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिलने के बाद भी भवन नहीं उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंहवाड़ा उत्तरी में पहली से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय की शुरुआत पहले कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल के रूप में हुई थी। बाद में इसे कक्षा 8 तक किया गया। 2020 में इसे उच्च माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिला। इसके बावजूद विद्यालय के लिए पर्याप्त भवन का निर्माण नहीं हो सका। वर्तमान में 9वीं से 12वीं तक करीब 280 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय में कुल 15 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें एक प्रधानाचार्य और एक प्रधान लिपिक भी शामिल हैं।
स्कूल में 9वीं में 29, 10वीं में 43, 11वीं में 86 और 12वीं में 89 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। परीक्षा के दौरान सभी विद्यार्थियों के एक साथ पहुंचने पर बैठने की जगह तक नहीं होती। खासकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है।
समस्या की जानकारी अधिकारियों को दी गई है प्रधानाचार्य पूनम कुमारी ने बताया कि स्कूल में केवल 2 कमरे हैं। 2 शिफ्ट में कक्षाएं संचालित की जाती हैं। पहली शिफ्ट में कक्षा 1 से 8 तक और दूसरी शिफ्ट में 9 से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए अलग-अलग क्लास रूम नहीं है। जगह का अभाव है। कई बार एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि विद्यालय की समस्या की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी गई है।
स्कूल के बच्चों ने बताई अपनी-अपनी परेशानियां… ठीक से पढ़ाई नहीं होती
छात्रा खुशी कुमारी ने बताया कि जगह की कमी के कारण ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती है। टीचर पढ़ाने का पूरा प्रयास करते हैं, लेकिन एक कमरे में तीन-तीन कक्षाओं के बच्चों के बैठने से पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में लैब है, लेकिन जगह के अभाव में उसका भी सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। गर्मी में कमरे तप जाते हैं।
गर्मी में ज्यादा परेशानी होती 10वीं के छात्र मोहन कुमार ने कहा कि स्कूल में केवल 2 कमरे हैं और विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। गर्मी में काफी परेशानी होती है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
छत को पक्का बनाने की मांग 9वीं के छात्र आदित्य कुमार ने शिक्षा मंत्री से विद्यालय की छत को पक्का कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि टीन की छत के नीचे गर्मी में बैठना बेहद मुश्किल होता है और बारिश के दौरान पानी टपकने लगता है। बिजली कटने पर परेशानी और बढ़ जाती है।
क्लास में पानी जम जाता है 9वीं के छात्र चंदन कुमार ने कहा कि विद्यालय में पढ़ाई का उचित माहौल नहीं मिल पाता। 2 कमरों में पहली से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। बारिश के दिनों में कमरे में पानी भर जाता है और कई बार दोपहर से शाम तक पानी के बीच बैठकर पढ़ना पड़ता है।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
विद्यालय का मामला बिहार विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। स्थानीय विधायक और पूर्व मंत्री जीवेश कुमार मिश्रा ने 6 जुलाई 2026 को विधानसभा में इस विद्यालय के भवन निर्माण का मुद्दा उठाते हुए जल्द से जल्द भवन निर्माण कराने की मांग की थी। विधानसभा में मामला उठने के बावजूद अब तक विद्यालय को पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर से कई बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। दरभंगा में 2 प्लस-टू सरकारी स्कूल जहां मात्र 2 कमरों में पढ़ाई होती है। दोनों स्कूल में 650 से 700 स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं। भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश होती है तो पानी टपकता है। प्राथमिक और मध्य विद्यालय की कक्षाएं सुबह करीब 8 से 12 बजे तक और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक की कक्षाएं दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक चलती हैं। राजयकीय नव उत्क्रमित मध्यमिक विद्यालय मझिगामा के लिए नया भवन बनकर 13 से तैयार है। जहां 6 कमरे हैं। पुराने भवन से 300 मीटर की दूरी पर ये भवन है, पर उस भवन में अभी तक स्कूल शिफ्ट नहीं हुआ है। नया भवन 13 साल में अब जर्जर भी होने लगा है। वहीं, दूसरा स्कूल उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंहवाड़ा उत्तरी है। इसके लिए नया भवन नहीं है। ये पुराने भवन में ही चल रहा है।
दोनों स्कूल में क्या परेशानियां हो रही है, स्टूडेंट्स ने क्या कहा, ग्रामीणों क्या कहते हैं, किस हालात में पढ़ाई होते हैं, पढ़ें रिपोर्ट… स्कूल के भवन की कुछ तस्वीरे… नए भवन के निर्माण में 20 लाख रुपए खर्च हुए थे राजयकीय नव उत्क्रमित मध्यमिक विद्यालय मझिगामा केवटी प्रखंड में है। इसके नए भवन का निर्माण 20 लाख रुपए में 2013 में हुआ था। भवन का इस्तेमाल आज तक पढ़ाई के लिए नहीं हुआ। स्कूल अभी पुराने भवन में चल रहा है। जहां प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। मामले को लेकर मझिगामा स्थित महावीर मंदिर परिसर में 2 दिन पहले ग्रामीणों की बैठक हुई थी। बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि छह कमरों वाले नवनिर्मित भवन में विद्यालय का संचालन शुरू कराने के लिए प्रधानाध्यापक से बात की जाएगी। इसके बावजूद भवन में पठन-पाठन शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने 5 बीघा जमीन सरकार को दी थी
ग्रामीण सुजीत झा के अनुसार मझिगामा वार्ड-15 में विद्यालय भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने करीब 5 बीघा जमीन बिहार सरकार के नाम रजिस्ट्री की थी। इसके बाद 19 लाख 97 हजार 400 रुपए की लागत से छह कमरों का विद्यालय भवन बनाया गया। भवन में पेयजल के लिए चापाकल और शौचालय समेत अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। भवन के परिसर में खेलकूद की व्यवस्था भी की गई है। इसके बावजूद निर्माण के 13 साल बाद भी इसमें नियमित पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका। दो कमरों में 700 से अधिक बच्चों की पढ़ाई
ग्रामीण सुजीत झा ने बताया कि वर्तमान में स्कूल में करीब 1 से 12वीं तक लगभग 700 विद्यार्थी नामांकित हैं। पुराने भवन में उपलब्ध कमरों में से महज 2 कमरों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। दो कमरों में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई होने से परेशानी होती है। विद्यालय में करीब 35 शिक्षक हैं, लेकिन पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण शिक्षक और विद्यार्थी दोनों परेशान हैं। कमरों के अभाव में प्रयोगशाला, कंप्यूटर कक्षा और अन्य शिक्षण गतिविधियों के संचालन में भी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि छह कमरों का भवन खाली पड़ा रहने के कारण धीरे-धीरे जर्जर होने की स्थिति में पहुंच रहा है।
बाउंड्री नहीं होने से सुरक्षा की चिंता
ग्रामीण राम ठाकुर ने बताया कि वर्तमान विद्यालय भवन के सामने बड़ा तालाब है। विद्यालय की चहारदीवारी नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती है। वहीं विद्यालय के पास पर्याप्त खेल मैदान भी नहीं है। दूसरी ओर, छह कमरों वाले नवनिर्मित भवन के परिसर में पर्याप्त जमीन के साथ खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि कम से कम माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं को नवनिर्मित भवन में स्थानांतरित किया जाए।
डीईओ के आदेश के बाद भी नहीं हुआ स्थानांतरण
ग्रामीणों का दावा है कि विद्यालय को नवनिर्मित भवन में स्थानांतरित करने के लिए जिलास्तर से कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं। जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्तर से भी आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक विद्यालय का संचालन नए भवन में शुरू नहीं हुआ है। स्थानीय स्तर पर विरोध और आपसी विवाद के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया अटकी हुई है। नए भवन में पढ़ाई शुरू नहीं हुई तो आंदोलन होगा
सरपंच प्रतिनिधि अशोक ठाकुर ने कहा कि एक से 12वीं तक की पढ़ाई महज दो कमरों में होना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। छह कमरों का भवन 13 वर्षों से तैयार है, फिर भी उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द ही नवनिर्मित भवन में पठन-पाठन शुरू नहीं कराया गया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
प्रधानाध्यापक पर लगाया आरोप ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह ने प्रधानाध्यापक फिरोज आलम की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक की ओर से गांव में आपसी विवाद और राजनीति के कारण नवनिर्मित भवन में विद्यालय शिफ्ट करने में बाधा डाला जा रहा। उन्होंने प्रधानाध्यापक पर नियमित रूप से विद्यालय नहीं आने और शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
रवींद्र सिंह ने कहा कि विद्यालय में शिक्षकों के बीच आपसी विवाद के कारण भी पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन में चहारदीवारी नहीं है और सामने तालाब होने के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
अब पढ़ें उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंहवाड़ा उत्तरी में क्या है स्थिति, बच्चों ने क्या कहा, कैसी है परेशानी…. उच्च माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिलने के बाद भी भवन नहीं उच्च माध्यमिक विद्यालय सिंहवाड़ा उत्तरी में पहली से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय की शुरुआत पहले कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल के रूप में हुई थी। बाद में इसे कक्षा 8 तक किया गया। 2020 में इसे उच्च माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिला। इसके बावजूद विद्यालय के लिए पर्याप्त भवन का निर्माण नहीं हो सका। वर्तमान में 9वीं से 12वीं तक करीब 280 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय में कुल 15 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें एक प्रधानाचार्य और एक प्रधान लिपिक भी शामिल हैं।
स्कूल में 9वीं में 29, 10वीं में 43, 11वीं में 86 और 12वीं में 89 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। परीक्षा के दौरान सभी विद्यार्थियों के एक साथ पहुंचने पर बैठने की जगह तक नहीं होती। खासकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है।
समस्या की जानकारी अधिकारियों को दी गई है प्रधानाचार्य पूनम कुमारी ने बताया कि स्कूल में केवल 2 कमरे हैं। 2 शिफ्ट में कक्षाएं संचालित की जाती हैं। पहली शिफ्ट में कक्षा 1 से 8 तक और दूसरी शिफ्ट में 9 से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए अलग-अलग क्लास रूम नहीं है। जगह का अभाव है। कई बार एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि विद्यालय की समस्या की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी गई है।
स्कूल के बच्चों ने बताई अपनी-अपनी परेशानियां… ठीक से पढ़ाई नहीं होती
छात्रा खुशी कुमारी ने बताया कि जगह की कमी के कारण ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती है। टीचर पढ़ाने का पूरा प्रयास करते हैं, लेकिन एक कमरे में तीन-तीन कक्षाओं के बच्चों के बैठने से पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में लैब है, लेकिन जगह के अभाव में उसका भी सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। गर्मी में कमरे तप जाते हैं।
गर्मी में ज्यादा परेशानी होती 10वीं के छात्र मोहन कुमार ने कहा कि स्कूल में केवल 2 कमरे हैं और विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। गर्मी में काफी परेशानी होती है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
छत को पक्का बनाने की मांग 9वीं के छात्र आदित्य कुमार ने शिक्षा मंत्री से विद्यालय की छत को पक्का कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि टीन की छत के नीचे गर्मी में बैठना बेहद मुश्किल होता है और बारिश के दौरान पानी टपकने लगता है। बिजली कटने पर परेशानी और बढ़ जाती है।
क्लास में पानी जम जाता है 9वीं के छात्र चंदन कुमार ने कहा कि विद्यालय में पढ़ाई का उचित माहौल नहीं मिल पाता। 2 कमरों में पहली से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। बारिश के दिनों में कमरे में पानी भर जाता है और कई बार दोपहर से शाम तक पानी के बीच बैठकर पढ़ना पड़ता है।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
विद्यालय का मामला बिहार विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। स्थानीय विधायक और पूर्व मंत्री जीवेश कुमार मिश्रा ने 6 जुलाई 2026 को विधानसभा में इस विद्यालय के भवन निर्माण का मुद्दा उठाते हुए जल्द से जल्द भवन निर्माण कराने की मांग की थी। विधानसभा में मामला उठने के बावजूद अब तक विद्यालय को पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर से कई बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

