बेगूसराय में गंगा नदी के रौद्र रूप ने तटवर्ती इलाकों में तबाही मचा रखी है। हालांकि बीते 24 घंटों में गंगा के जलस्तर में वृद्धि की गति में थोड़ी कमी आई है और जलस्तर मात्र 9 सेंटीमीटर बढ़ा है। लेकिन इससे स्थानीय निवासियों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। वर्तमान में बेगूसराय में गंगा नदी खतरे के निशान से 83 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार भले ही थोड़ी धीमी पड़ी है, लेकिन जिले की 50 हजार से अधिक की आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है और विकराल परिस्थितियों का सामना कर रही है। गांव में पानी घुसने की 3 तस्वीरें देखिए ’16-17 तारीख से ही हमारे गांव में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हुआ’ मटिहानी प्रखंड स्थित खोरमपुर पंचायत के खोरमपुर निचले हिस्से और छितरौर गांव में स्थिति भयावह है। यहां 5 हजार से अधिक लोग पूरी तरह से बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके हैं। छितरौर गांव में बाढ़ का पानी घरों के भीतर तक प्रवेश कर गया है। गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर 3 से 4 फीट तक पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। इसके कारण छितरौर समेत आसपास के गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। लोग जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से आने-जाने को मजबूर हैं। बाढ़ प्रभावित छितरौर गांव के निवासी कारू दास ने बताया कि 16-17 तारीख से ही हमारे गांव में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया था। आज 25 तारीख हो गई है, एक हफ्ता से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि हमें देखने तक नहीं आया है। हम गरीब लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं। घर के अंदर कमर तक पानी भरा हुआ है। चौकी को ऊंचा करके उसी पर पूरा परिवार शरण लिए हुए है। मेरी मां, भाई, भौजाई और बच्चे सब एक ही चौकी पर बैठकर दिन-रात गुजार रहे हैं। चूल्हा-चक्की सब पानी में डूब चुका है, जिससे खाना पकाने का घोर संकट पैदा हो गया है। मैं दिहाड़ी मजदूरी करता हूं, लेकिन अब काम बंद है। मवेशियों के लिए चारा जुटाने के लिए 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और दूसरों के खेतों से मांगकर घास लानी पड़ती है। सबसे बड़ा डर बीमारी का है; यदि इस पानी में कोई बीमार पड़ गया तो डॉक्टर के पास जाने का भी कोई साधन नहीं है। पिछले एक सप्ताह से घरों में पानी भरा हुआ है खोरमपुर पंचायत के निचले हिस्से के निवासी मो. मुस्तकीम ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से घरों में पानी भरा हुआ है। बच्चों और परिवार को लेकर घर में रहना अब नामुमकिन हो गया है। हम लोग सड़क के किनारे तिरपाल और झोपड़ी गाड़कर रहने को मजबूर हैं। न पीने का साफ पानी उपलब्ध है और न ही खाने-पीने की कोई उचित व्यवस्था है। मवेशियों के लिए भी चारे की भारी किल्लत हो गई है। गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि घर में रखा अनाज और कपड़े सब पानी में भीगकर बर्बाद हो चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चों को लेकर ऊंचे स्थानों पर रात गुजारना जोखिम भरा साबित हो रहा है। बाढ़ की इस विभीषिका के बीच राहत कार्यों की सुस्त चाल को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। अब तक न तो सरकारी नावें चलाई गई है और न ही राहत सामग्री या सूखा राशन बांटा गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और मवेशियों के इलाज के लिए भी कोई मेडिकल टीम इलाके में नहीं पहुंची है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होना एक राहत का संकेत जरूर है, लेकिन जब तक जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आता और पानी की निकासी शुरू नहीं होती, तब तक जिंदगी यूं ही पटरी से उतरी रहेगी। बेगूसराय में गंगा नदी के रौद्र रूप ने तटवर्ती इलाकों में तबाही मचा रखी है। हालांकि बीते 24 घंटों में गंगा के जलस्तर में वृद्धि की गति में थोड़ी कमी आई है और जलस्तर मात्र 9 सेंटीमीटर बढ़ा है। लेकिन इससे स्थानीय निवासियों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। वर्तमान में बेगूसराय में गंगा नदी खतरे के निशान से 83 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार भले ही थोड़ी धीमी पड़ी है, लेकिन जिले की 50 हजार से अधिक की आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है और विकराल परिस्थितियों का सामना कर रही है। गांव में पानी घुसने की 3 तस्वीरें देखिए ’16-17 तारीख से ही हमारे गांव में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हुआ’ मटिहानी प्रखंड स्थित खोरमपुर पंचायत के खोरमपुर निचले हिस्से और छितरौर गांव में स्थिति भयावह है। यहां 5 हजार से अधिक लोग पूरी तरह से बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके हैं। छितरौर गांव में बाढ़ का पानी घरों के भीतर तक प्रवेश कर गया है। गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर 3 से 4 फीट तक पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। इसके कारण छितरौर समेत आसपास के गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। लोग जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से आने-जाने को मजबूर हैं। बाढ़ प्रभावित छितरौर गांव के निवासी कारू दास ने बताया कि 16-17 तारीख से ही हमारे गांव में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया था। आज 25 तारीख हो गई है, एक हफ्ता से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि हमें देखने तक नहीं आया है। हम गरीब लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं। घर के अंदर कमर तक पानी भरा हुआ है। चौकी को ऊंचा करके उसी पर पूरा परिवार शरण लिए हुए है। मेरी मां, भाई, भौजाई और बच्चे सब एक ही चौकी पर बैठकर दिन-रात गुजार रहे हैं। चूल्हा-चक्की सब पानी में डूब चुका है, जिससे खाना पकाने का घोर संकट पैदा हो गया है। मैं दिहाड़ी मजदूरी करता हूं, लेकिन अब काम बंद है। मवेशियों के लिए चारा जुटाने के लिए 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और दूसरों के खेतों से मांगकर घास लानी पड़ती है। सबसे बड़ा डर बीमारी का है; यदि इस पानी में कोई बीमार पड़ गया तो डॉक्टर के पास जाने का भी कोई साधन नहीं है। पिछले एक सप्ताह से घरों में पानी भरा हुआ है खोरमपुर पंचायत के निचले हिस्से के निवासी मो. मुस्तकीम ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से घरों में पानी भरा हुआ है। बच्चों और परिवार को लेकर घर में रहना अब नामुमकिन हो गया है। हम लोग सड़क के किनारे तिरपाल और झोपड़ी गाड़कर रहने को मजबूर हैं। न पीने का साफ पानी उपलब्ध है और न ही खाने-पीने की कोई उचित व्यवस्था है। मवेशियों के लिए भी चारे की भारी किल्लत हो गई है। गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि घर में रखा अनाज और कपड़े सब पानी में भीगकर बर्बाद हो चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चों को लेकर ऊंचे स्थानों पर रात गुजारना जोखिम भरा साबित हो रहा है। बाढ़ की इस विभीषिका के बीच राहत कार्यों की सुस्त चाल को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। अब तक न तो सरकारी नावें चलाई गई है और न ही राहत सामग्री या सूखा राशन बांटा गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और मवेशियों के इलाज के लिए भी कोई मेडिकल टीम इलाके में नहीं पहुंची है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होना एक राहत का संकेत जरूर है, लेकिन जब तक जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आता और पानी की निकासी शुरू नहीं होती, तब तक जिंदगी यूं ही पटरी से उतरी रहेगी।

