परिवहन विभाग में प्रवर्तन कार्य में लापरवाही बरतने वाले 10 यात्री/मालकर अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। अप्रैल से जून 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इन अधिकारियों ने प्रशमन शुल्क के तय लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम कार्रवाई की थी। समीक्षा के दौरान यह स्थिति सामने आने के बाद परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कार्रवाई के निर्देश दिए। लक्ष्य के मुताबिक नहीं हुई कार्रवाई परिवहन आयुक्त ने मंगलवार को पहली तिमाही की प्रवर्तन कार्रवाई की समीक्षा की। इसमें पाया गया कि कुछ यात्री/मालकर अधिकारियों ने अप्रैल, मई और जून में निर्धारित प्रशमन शुल्क लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम कार्रवाई की। विभाग का मानना है कि अधिकारियों ने अपने पद की जिम्मेदारियों का तय निर्देशों के मुताबिक पालन नहीं किया। राजस्व पर भी पड़ रहा असर परिवहन आयुक्त ने माना कि प्रवर्तन कार्य में इस तरह की लापरवाही और उदासीनता से न सिर्फ विभागीय काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व की वसूली पर भी असर पड़ रहा है। विभागीय निर्देशों के बावजूद लक्ष्य के अनुरूप कार्रवाई नहीं करने को गंभीरता से लिया गया है। इन 10 अधिकारियों पर कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत जिन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है, उनमें महाराजगंज के यात्री/मालकर अधिकारी राजेश सिंह कुशवाहा, बलरामपुर के मदन चन्द्र, प्रयागराज की केकी मिश्रा, बस्ती के प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, चन्दौली की अनीता वर्मा, महोबा के नरेन्द्र विक्रम सिंह, रायबरेली के विक्रांत सिंह, अयोध्या की रानी सेंगर, जौनपुर के प्रमोद कुमार और आगरा के विजय किशोर आनन्द शामिल हैं। विभागीय कार्रवाई के जरिए इन अधिकारियों से प्रवर्तन कार्य में निर्धारित लक्ष्य से बेहद कम कार्रवाई किए जाने को लेकर जवाब मांगा जाएगा और नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

