ग्वालियर की बदहाल और गड्ढों में तब्दील सड़कों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सड़कों की खराब स्थिति से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए डबल बेंच ने सरकारी सिस्टम, अधिकारियों और ठेकेदारों को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़कों की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी मिली तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सिविल के साथ क्रिमिनल केस भी दर्ज किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “100 रुपए आए और 10 खर्च हुए तो कार्रवाई पक्की समझो।” कोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, फिर भी शहर की सड़कों की हालत ऐसी क्यों है। 30 मिनट पहले पता चलेगा किस सड़क का सैंपल लेना है हाईकोर्ट ने सड़कों की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सैंपलिंग का तरीका भी तय किया है। इसके तहत अधिकारियों और ठेकेदारों को पहले से यह जानकारी नहीं होगी कि किस सड़क का सैंपल लिया जाना है। 30 अगस्त, 3 सितंबर और 6 सितंबर को अलग-अलग सड़कों से सैंपल लिए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य सैंपलिंग से पहले सड़क की स्थिति में किसी तरह की लीपापोती या सुधार की संभावना को खत्म करना है। झांसी रोड के गड्ढे का भी उठा मुद्दा सुनवाई के दौरान शहर की सड़कों की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। बीते दिनों झांसी रोड पर सड़क में सुरंग जैसे गहरे गड्ढे की स्थिति सामने आई थी। लगातार खराब हो रही सड़कों और जगह-जगह गड्ढों को लेकर कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सीनियर एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर की याचिका शहर की खराब सड़कों को लेकर यह जनहित याचिका सीनियर एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर ने दायर की है। याचिका में सड़कों की बदहाली और उनकी गुणवत्ता का मुद्दा उठाया गया है। हाईकोर्ट के मंगलवार के रुख से साफ है कि अब सड़कों की गुणवत्ता की जांच केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी। जांच में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर जवाबदेही तय करने के साथ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।

