एस्बेस्टस के नीचे गर्मी, बारिश में 176 स्टूडेंट्स की पढ़ाई:सुपौल में भवनहीन स्कूल तक पहुंच पथ नहीं; पगडंडी-कीचड़ से आना-जाना

एस्बेस्टस के नीचे गर्मी, बारिश में 176 स्टूडेंट्स की पढ़ाई:सुपौल में भवनहीन स्कूल तक पहुंच पथ नहीं; पगडंडी-कीचड़ से आना-जाना

सुपौल के निर्मली प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मझारी में 176 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन इन बच्चों के लिए अब तक विद्यालय भवन का निर्माण नहीं हो सका है। करीब 3 कट्ठा जमीन विद्यालय के नाम उपलब्ध होने के बावजूद बच्चे झोपड़ीनुमा ढांचे में पढ़ने को मजबूर हैं। मंगलवार सुबह करीब 11.30 बजे दैनिक भास्कर की टीम स्कूल पहुंची तो अलग-अलग केबिन में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे पढ़ाई करते मिले। इस दौरान 102 विद्यार्थी उपस्थित थे। विद्यालय में प्रधान शिक्षक समेत कुल 9 शिक्षक पदस्थापित हैं। निरीक्षण के दौरान प्रधान शिक्षक संतोष कुमार रजक के अलावा सहायक शिक्षक शिवनाथ कुमार राय, प्रेम कुमार राम, अरविंद कुमार यादव, सज्जन कुमार, शारिक अहमद, अनिल कुमार, सुभाष कुमार और पंकज कुमार मौजूद थे। चदरा और एस्बेस्टस के नीचे होती है पढ़ाई विद्यालय में पक्के भवन के अभाव में चदरा और एस्बेस्टस से बने झोपड़ीनुमा ढांचे के अंदर अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं। इन्हीं केबिन में बच्चों की पढ़ाई होती है। शिक्षकों के अनुसार धूप तेज होने पर चदरा और एस्बेस्टस के नीचे गर्मी और उमस काफी बढ़ जाती है। इससे बच्चों को परेशानी होती है। बारिश के दौरान भी इन अस्थायी कमरों में पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वर्ष 1987 में स्थापित इस विद्यालय में रसोईघर के अलावा शौचालय और पानी के लिए चापाकल व नल की व्यवस्था उपलब्ध है। बच्चों के खेलने के लिए परिसर में जगह भी है, लेकिन स्कूल के आसपास बने गड्ढे में जलकुंभी जमा है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। सड़क नहीं, पगडंडी के सहारे पहुंचते हैं बच्चे विद्यालय तक पहुंचने के लिए अब तक पहुंच पथ का निर्माण भी नहीं हो सका है। मुख्य सड़क से स्कूल तक जाने के लिए बच्चों और शिक्षकों को पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाने से स्कूल आने-जाने में परेशानी बढ़ जाती है। एचएम बोले- भवन और चहारदीवारी की जरूरत प्रधान शिक्षक संतोष कुमार रजक ने बताया कि जब वे विद्यालय में आए थे, तब यहां पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। विकास मद से उपलब्ध राशि से कमरे, बेंच-डेस्क, टेबल और कुर्सी सहित अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं में सबसे जरूरी भवन और चहारदीवारी अब भी उपलब्ध नहीं है। एचएम ने बताया कि पूर्व में बीईओ को विद्यालय भवन की जरूरत को लेकर लिखित रूप से जानकारी दी गई थी। स्कूल में इस्तेमाल बैंच-डेस्क की कमी बीईओ की ओर से कहा गया था कि भवन निर्माण के लिए आवंटन मिलने पर विद्यालय को भवन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल बच्चों की पढ़ाई उपलब्ध संसाधनों में ही जारी है, लेकिन स्थायी भवन की कमी से काफी दिक्कत हो रही है। यहां तक कि विद्यालय में उपयुक्त बैंच-डेस्क की कमी है, इस वजह से वर्ग एक के स्टूडेंट्स जमीन पर बैठकर पढ़ने को विवश दिखे। इस मामले में निर्मली के प्रभारी बीईओ रामलाल पासवान का कहना है कि भवन व चहारदीवारी निर्माण के लिए जल्द ही विभाग को लिखा जाएगा। सुपौल के निर्मली प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मझारी में 176 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन इन बच्चों के लिए अब तक विद्यालय भवन का निर्माण नहीं हो सका है। करीब 3 कट्ठा जमीन विद्यालय के नाम उपलब्ध होने के बावजूद बच्चे झोपड़ीनुमा ढांचे में पढ़ने को मजबूर हैं। मंगलवार सुबह करीब 11.30 बजे दैनिक भास्कर की टीम स्कूल पहुंची तो अलग-अलग केबिन में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे पढ़ाई करते मिले। इस दौरान 102 विद्यार्थी उपस्थित थे। विद्यालय में प्रधान शिक्षक समेत कुल 9 शिक्षक पदस्थापित हैं। निरीक्षण के दौरान प्रधान शिक्षक संतोष कुमार रजक के अलावा सहायक शिक्षक शिवनाथ कुमार राय, प्रेम कुमार राम, अरविंद कुमार यादव, सज्जन कुमार, शारिक अहमद, अनिल कुमार, सुभाष कुमार और पंकज कुमार मौजूद थे। चदरा और एस्बेस्टस के नीचे होती है पढ़ाई विद्यालय में पक्के भवन के अभाव में चदरा और एस्बेस्टस से बने झोपड़ीनुमा ढांचे के अंदर अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं। इन्हीं केबिन में बच्चों की पढ़ाई होती है। शिक्षकों के अनुसार धूप तेज होने पर चदरा और एस्बेस्टस के नीचे गर्मी और उमस काफी बढ़ जाती है। इससे बच्चों को परेशानी होती है। बारिश के दौरान भी इन अस्थायी कमरों में पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वर्ष 1987 में स्थापित इस विद्यालय में रसोईघर के अलावा शौचालय और पानी के लिए चापाकल व नल की व्यवस्था उपलब्ध है। बच्चों के खेलने के लिए परिसर में जगह भी है, लेकिन स्कूल के आसपास बने गड्ढे में जलकुंभी जमा है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। सड़क नहीं, पगडंडी के सहारे पहुंचते हैं बच्चे विद्यालय तक पहुंचने के लिए अब तक पहुंच पथ का निर्माण भी नहीं हो सका है। मुख्य सड़क से स्कूल तक जाने के लिए बच्चों और शिक्षकों को पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाने से स्कूल आने-जाने में परेशानी बढ़ जाती है। एचएम बोले- भवन और चहारदीवारी की जरूरत प्रधान शिक्षक संतोष कुमार रजक ने बताया कि जब वे विद्यालय में आए थे, तब यहां पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। विकास मद से उपलब्ध राशि से कमरे, बेंच-डेस्क, टेबल और कुर्सी सहित अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं में सबसे जरूरी भवन और चहारदीवारी अब भी उपलब्ध नहीं है। एचएम ने बताया कि पूर्व में बीईओ को विद्यालय भवन की जरूरत को लेकर लिखित रूप से जानकारी दी गई थी। स्कूल में इस्तेमाल बैंच-डेस्क की कमी बीईओ की ओर से कहा गया था कि भवन निर्माण के लिए आवंटन मिलने पर विद्यालय को भवन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल बच्चों की पढ़ाई उपलब्ध संसाधनों में ही जारी है, लेकिन स्थायी भवन की कमी से काफी दिक्कत हो रही है। यहां तक कि विद्यालय में उपयुक्त बैंच-डेस्क की कमी है, इस वजह से वर्ग एक के स्टूडेंट्स जमीन पर बैठकर पढ़ने को विवश दिखे। इस मामले में निर्मली के प्रभारी बीईओ रामलाल पासवान का कहना है कि भवन व चहारदीवारी निर्माण के लिए जल्द ही विभाग को लिखा जाएगा।  

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