गुवाहाटी से लौटे तो गांव में खोली पान की दुकान:20 से 2500 रुपये तक के पान, रोजाना 10 हजार कमाई, गोपालगंज की VIP पान दुकान में शामिल

गुवाहाटी से लौटे तो गांव में खोली पान की दुकान:20 से 2500 रुपये तक के पान, रोजाना 10 हजार कमाई, गोपालगंज की VIP पान दुकान में शामिल

गोपालगंज का बरहीमा मोड़ इन दिनों अपने खास स्वाद वाले पान के लिए जाना जाता है। यहां स्थित वीआईपी पान दुकान पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से लोगों के बीच लोकप्रिय है। दुकान की पहचान सिर्फ पान के स्वाद से नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी संघर्ष और मेहनत की कहानी से भी जुड़ी है। वीआईपी पान दुकान के संचालक नागेंद्र साह, सिधवलिया के सरेया पहाड़ गांव निवासी स्वर्गीय हीरा लाल साह के बेटे हैं। करीब तीन दशक पहले परिवार के भरण-पोषण के लिए वे गुवाहाटी गए थे। वहां उन्होंने एक छोटी सी गुमटी में पान की दुकान शुरू की। व्यवसाय ठीक चल रहा था, लेकिन वर्ष 2003 में असम में बिहारियों के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों और हिंसा के बीच उन्हें अपनी दुकान छोड़कर वापस लौटना पड़ा। बरहीमा लौटने के बाद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं मानी और अपने हुनर के दम पर दोबारा पान का कारोबार शुरू किया। 20 से 2500 रुपये तक के पान आज दुकान पर हर पसंद और बजट के लोगों के लिए पान उपलब्ध है। यहां 20 रुपये के साधारण मीठे पान से लेकर 2500 रुपये तक के शाही और विशेष पान मिलते हैं। गोल्डन पान, फायर पान, जर्दा पान, मीठा पान, सिल्वर पान और केसर पान यहां की खास किस्मों में शामिल हैं। साधारण पान में ताजा पत्ता, पारंपरिक कत्था-चूना और मसालों का इस्तेमाल होता है। वहीं 50 से 150 रुपये तक के मीठे पान में गुलकंद, सौंफ, चेरी और सुगंधित मसाले डाले जाते हैं। 40 तरह के मसालों से तैयार होता है खास पान दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां इस्तेमाल होने वाली सामग्री है। विशेष पान तैयार करने में करीब 40 तरह के मसालों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें केसर, कस्तूरी, गोल्डन वर्क, सोने-चांदी का भस्म, काजू, किशमिश, गुलकंद, मुलेठी और इलायची सहित कई सामग्री शामिल हैं। खास तौर पर गोल्डन पान को केसर, कस्तूरी और गोल्ड वर्क के साथ तैयार किया जाता है। इसकी खासियत और कीमत के कारण दूर-दराज से लोग इसे खाने पहुंचते हैं। पड़ोसी जिलों और यूपी से भी आते हैं ग्राहक वीआईपी पान दुकान पर सिर्फ गोपालगंज के लोग ही नहीं, बल्कि सीवान, छपरा, बेतिया और मोतिहारी से भी ग्राहक पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया से आने वाले पान प्रेमी भी यहां रुकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए भी यह दुकान एक खास पड़ाव बन चुकी है। रोजाना करीब 10 हजार रुपये की कमाई संघर्ष के दौर से गुजरने के बाद नागेंद्र साह ने अपनी दुकान को धीरे-धीरे एक पहचान दिलाई। आज दुकान से रोजाना करीब 10 हजार रुपये की कमाई होने की बात बताई जाती है। गुणवत्ता और शुद्धता पर ध्यान देने की वजह से दुकान ने इलाके में अपनी अलग पहचान बनाई है। गुवाहाटी से शुरू हुआ यह सफर अब बरहीमा की पहचान बन चुका है। एक छोटी सी गुमटी से शुरू हुई मेहनत आज वीआईपी पान दुकान के रूप में पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। गोपालगंज का बरहीमा मोड़ इन दिनों अपने खास स्वाद वाले पान के लिए जाना जाता है। यहां स्थित वीआईपी पान दुकान पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से लोगों के बीच लोकप्रिय है। दुकान की पहचान सिर्फ पान के स्वाद से नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी संघर्ष और मेहनत की कहानी से भी जुड़ी है। वीआईपी पान दुकान के संचालक नागेंद्र साह, सिधवलिया के सरेया पहाड़ गांव निवासी स्वर्गीय हीरा लाल साह के बेटे हैं। करीब तीन दशक पहले परिवार के भरण-पोषण के लिए वे गुवाहाटी गए थे। वहां उन्होंने एक छोटी सी गुमटी में पान की दुकान शुरू की। व्यवसाय ठीक चल रहा था, लेकिन वर्ष 2003 में असम में बिहारियों के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों और हिंसा के बीच उन्हें अपनी दुकान छोड़कर वापस लौटना पड़ा। बरहीमा लौटने के बाद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं मानी और अपने हुनर के दम पर दोबारा पान का कारोबार शुरू किया। 20 से 2500 रुपये तक के पान आज दुकान पर हर पसंद और बजट के लोगों के लिए पान उपलब्ध है। यहां 20 रुपये के साधारण मीठे पान से लेकर 2500 रुपये तक के शाही और विशेष पान मिलते हैं। गोल्डन पान, फायर पान, जर्दा पान, मीठा पान, सिल्वर पान और केसर पान यहां की खास किस्मों में शामिल हैं। साधारण पान में ताजा पत्ता, पारंपरिक कत्था-चूना और मसालों का इस्तेमाल होता है। वहीं 50 से 150 रुपये तक के मीठे पान में गुलकंद, सौंफ, चेरी और सुगंधित मसाले डाले जाते हैं। 40 तरह के मसालों से तैयार होता है खास पान दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां इस्तेमाल होने वाली सामग्री है। विशेष पान तैयार करने में करीब 40 तरह के मसालों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें केसर, कस्तूरी, गोल्डन वर्क, सोने-चांदी का भस्म, काजू, किशमिश, गुलकंद, मुलेठी और इलायची सहित कई सामग्री शामिल हैं। खास तौर पर गोल्डन पान को केसर, कस्तूरी और गोल्ड वर्क के साथ तैयार किया जाता है। इसकी खासियत और कीमत के कारण दूर-दराज से लोग इसे खाने पहुंचते हैं। पड़ोसी जिलों और यूपी से भी आते हैं ग्राहक वीआईपी पान दुकान पर सिर्फ गोपालगंज के लोग ही नहीं, बल्कि सीवान, छपरा, बेतिया और मोतिहारी से भी ग्राहक पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया से आने वाले पान प्रेमी भी यहां रुकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए भी यह दुकान एक खास पड़ाव बन चुकी है। रोजाना करीब 10 हजार रुपये की कमाई संघर्ष के दौर से गुजरने के बाद नागेंद्र साह ने अपनी दुकान को धीरे-धीरे एक पहचान दिलाई। आज दुकान से रोजाना करीब 10 हजार रुपये की कमाई होने की बात बताई जाती है। गुणवत्ता और शुद्धता पर ध्यान देने की वजह से दुकान ने इलाके में अपनी अलग पहचान बनाई है। गुवाहाटी से शुरू हुआ यह सफर अब बरहीमा की पहचान बन चुका है। एक छोटी सी गुमटी से शुरू हुई मेहनत आज वीआईपी पान दुकान के रूप में पूरे इलाके में चर्चा का विषय है।  

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