‘एक्टर कमजोर होते हैं, लेकिन बहुत बहादुर भी’, अनुपम खेर ने बताया एक्टिंग का असली राज, बोले- ‘दिल भी खास होना चाहिए’

‘एक्टर कमजोर होते हैं, लेकिन बहुत बहादुर भी’, अनुपम खेर ने बताया एक्टिंग का असली राज, बोले- ‘दिल भी खास होना चाहिए’

Anupam Kher Emotional Post: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अनुपम खेर ने एक्टिंग और अपने अब तक के सफर को लेकर एक भावुक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने बताया कि एक कलाकार के लिए सिर्फ एक्टिंग की कला, शोहरत या पैसा काफी नहीं होता, बल्कि उसके अंदर एक खास तरह का दिल भी होना चाहिए। अनुपम ने खुद के करियर में आए बदलावों पर भी खुलकर बात की और बताया कि अब वह किरदारों की खामोशी, उलझन और कमजोरियों को पहले से ज्यादा महसूस कर पाते हैं।

अनुपम खेर ने अपनी पोस्ट की शुरुआत ‘एक एक्टर का दिल और कला’ से की। उन्होंने लिखा कि एक्टर कमजोर लोग होते हैं, क्योंकि वे उन भावनाओं को अपनी मर्जी से बाहर निकालते हैं जिन्हें ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी छिपाने की कोशिश करते रहते हैं। दुख, डर, जलन, प्यार, खुशी और इनसिक्योरिटी जैसी भावनाओं को एक्टर को अपने अंदर तलाशना पड़ता है। अनुपम के मुताबिक, यही वजह है कि उन्हें लगता है कि एक्टर कमजोर होने के साथ-साथ बहुत बहादुर भी होते हैं।

‘कैमरा पास आता है तो पैसा-शोहरत काम नहीं आती’

अनुपम खेर ने कहा कि एक्टिंग से फेम, पैसा और लग्जरी जरूर मिल सकती है, लेकिन जब कैमरा सामने आता है और किसी कलाकार को पर्दे पर कुछ सच्चा दिखाना होता है, तब इनमें से कोई चीज उसकी मदद नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा कि इसके लिए एक्टिंग का क्राफ्ट जरूरी है, लेकिन कलाकार के अंदर एक खास तरह का दिल भी होना चाहिए। कभी-कभी यह दिल टूटा हुआ भी हो सकता है।

‘करियर की शुरुआत में खुद को साबित करने की जल्दी थी’

अनुपम ने अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय उन्हें खुद को साबित करने की काफी जल्दी थी। उन्होंने कहा कि वह फिल्मों में बिना किसी गॉडफादर के आए थे, लेकिन उनके पास नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ट्रेनिंग और आत्मविश्वास था। उनके मुताबिक, उस दौर में उनके मन में लगातार यह साबित करने की कोशिश रहती थी कि वह क्या कर सकते हैं और कितने अलग हैं। शायद उस समय उनके लिए ऐसा करना जरूरी भी था।

अनुपम ने बताया कि पिछले करीब 10 सालों में उनके नजरिए में काफी बदलाव आया है। अब वो ज्यादा रिलैक्स महसूस करते हैं और उन्हें हर बार खुद को साबित करने या किसी को इम्प्रेस करने की जरूरत नहीं लगती। इसके बजाय वो किसी किरदार की अनिश्चितता, उसकी खामोशी, उलझन, कमजोरी और यहां तक कि उसकी बेवकूफी को भी समझने और महसूस करने का आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि अब वो खुद को पहले से ज्यादा चुनौती देते हैं, लेकिन इसके साथ चिंता भी कम महसूस होती है।

‘आप दिखाना बंद कर देते हैं कि कितना जानते हैं’

अनुपम खेर के मुताबिक, एक कलाकार के तौर पर उम्र बढ़ने की सबसे अच्छी बातों में से एक यह है कि आप यह दिखाने की कोशिश करना बंद कर देते हैं कि आप कितना जानते हैं। इसके बजाय आपके अंदर यह जानने की जिज्ञासा पैदा होती है कि अभी भी ऐसी कितनी चीजें हैं, जिन्हें आप नहीं जानते।

अपनी पोस्ट के आखिर में अनुपम ने अपने एक्टिंग सफर से जुड़े कुछ चेहरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी लोगों ने उन्हें एक्टिंग के साथ-साथ अपने बारे में भी कुछ नया सिखाया है।

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