कानपुर देहात में मंगलवार को सपेरा समाज के करीब 30 से 35 लोग हाथों में बीन लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। अलग-अलग गांवों से आए लोगों ने बैगा जाति के अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र जारी किए जाने की मांग को लेकर डीएम को प्रार्थना पत्र सौंपा। बुजुर्गों ने बीन बजाकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी। उनका कहना है कि जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से नई पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में परेशानी हो रही है। समाज के लोगों का दावा है कि उनके परिवारों के बैगा जाति के प्रमाण पत्र पहले जारी होते रहे हैं। उनके पास वर्ष 2016-17 तक के प्रमाण पत्र और पुराने अभिलेख भी मौजूद हैं। उनका कहना है कि मैथा और अकबरपुर तहसील में अब बैगा जाति के प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। हालांकि, मामले की कानूनी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जनजाति सूची में बैगा को सोनभद्र जिले के लिए अधिसूचित किया गया है। 2016 में लोकसभा में दिए गए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के जवाब में भी बैगा को उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले तक सीमित अनुसूचित जनजाति के रूप में दर्ज किया गया था।
जनगणना के सरकारी रिकॉर्ड में भी उत्तर प्रदेश की बैगा ST आबादी सोनभद्र जिले से दर्ज है। 2011 की जनगणना में उत्तर प्रदेश के 30,006 बैगा लोगों को अनुसूचित जनजाति के रूप में दर्ज किया गया था। ऐसे में कानपुर देहात के सपेरा समाज की मांग का एक अहम पहलू यह है कि यदि पुराने प्रमाण पत्र वास्तव में बैगा ST के नाम से जारी हुए थे तो उनके आधार, उस समय हुई जांच प्रक्रिया और बाद में प्रमाण पत्र जारी करने की स्थिति में क्या बदलाव आया, इसकी प्रशासनिक जांच जरूरी है।
समाज के प्रतिनिधि जहांगीर नाथ जोगी ने बताया कि उनके समाज के लोग पीढ़ियों से बीन बजाकर और परंपरागत साधनों के जरिए जीवनयापन करते रहे हैं। अब नई पीढ़ी पढ़-लिखकर पुलिस, होमगार्ड, लेखपाल और अन्य सरकारी नौकरियों में जाना चाहती है, लेकिन जाति प्रमाण पत्र की समस्या उनके लिए बड़ी बाधा बन रही है।
छात्र पुष्पेंद्र नाथ ने अपना पुराना प्रमाण पत्र दिखाते हुए प्रशासन से पुराने अभिलेखों की जांच कराने की मांग की। सरकार की ओर से जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के माध्यम से संचालित होती है, जबकि अनुसूचित जनजाति की सूची और उसका क्षेत्र केंद्र की संवैधानिक अधिसूचना से निर्धारित होता है। अब मुख्य सवाल यह है कि पुराने प्रमाण पत्र नियमानुसार जारी हुए थे या नहीं, उनकी वर्तमान वैधता क्या है और कानपुर देहात के इन परिवारों के दावे पर मौजूदा नियम क्या कहते हैं। सपेरा समाज ने प्रशासन से पुराने रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि युवाओं के भविष्य को लेकर बना असमंजस दूर हो सके।

