गयाजी में महिलाओं ने रक्षाबंधन पर्व को पर्यावरण संरक्षण और देश की रक्षा से जोड़कर एक अनोखी पहल की है। सैकड़ों छात्रा और महिलाएं गाजे-बाजे के साथ ब्रह्मयोनि पहाड़ पहुंचीं। वहां पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने सैनिकों को भी राखी बांधी और मिठाई खिलाई। साथ ही प्रकृति और देश की सुरक्षा का संकल्प लिया। सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं राखी की थाल सजाकर अपने घरों से निकली। थाल में राखी, मिठाई, कुमकुम और पूजा सामग्री शामिल थी। ब्रह्मयोनि पहाड़ के पास पहुंचकर ने विधि-विधान से पूजा की और नारियल फोड़कर पर्व की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग पेड़ों को राखी बांधी और उनकी आरती उतारी। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय पर्यावरण’ के नारों से गूंज उठा। रक्षा का संकल्प लिया छात्राओं का कहना था कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन के सच्चे रक्षक हैं। पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, वातावरण को स्वच्छ रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों के जीवन को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि जिस तरह भाई की रक्षा का संकल्प रक्षाबंधन पर लिया जाता है, उसी तरह पेड़ों की रक्षा का संकल्प लेना भी आवश्यक है। स्थानीय महिला राखी गुप्ता ने बताया कि वे पेड़ों को भाई मानकर राखी बांध रही हैं। ब्रह्मयोनि पहाड़ और उसकी तलहटी में स्थानीय लोगों द्वारा सैकड़ों पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की देखभाल का भी संकल्प लिया गया है, ताकि वे सूखें नहीं और आने वाली पीढ़ियों को हरियाली से भरपूर वातावरण मिल सके। यदि पेड़ सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। सैनिकों को भी बांधी राखी, खिलाई मिठाई पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के बाद महिलाओं ने गयाजी ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर (ओटीए) में कार्यरत सेना के जवानों को भी राखी बांधी। महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें मिठाई खिलाई। जवानों के चेहरे पर भी इस मौके पर खुशी दिखाई दी। सेना के जवान सागर सिंह ने कहा कि स्थानीय महिलाओं द्वारा राखी बांधे जाने से उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बताया कि वे पंजाब के रहने वाले हैं और रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर अपने परिवार से दूर हैं। लेकिन महिलाओं ने जब उन्हें राखी बांधी तो उन्हें परिवार से दूर होने का एहसास नहीं हुआ। उन्होंने रक्षा का वचन भी दिया। ‘पेड़ हमारी रक्षा करते हैं, अब हमारी बारी’ कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि पेड़ हमेशा से मनुष्य की रक्षा करते आए हैं। वे गर्मी में छाया देते हैं, हवा को शुद्ध करते हैं और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन के अवसर पर पेड़ों को राखी बांधकर उन्होंने यह संदेश दिया कि अब पेड़ों की रक्षा करना भी समाज की जिम्मेदारी है। गयाजी में महिलाओं ने रक्षाबंधन पर्व को पर्यावरण संरक्षण और देश की रक्षा से जोड़कर एक अनोखी पहल की है। सैकड़ों छात्रा और महिलाएं गाजे-बाजे के साथ ब्रह्मयोनि पहाड़ पहुंचीं। वहां पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने सैनिकों को भी राखी बांधी और मिठाई खिलाई। साथ ही प्रकृति और देश की सुरक्षा का संकल्प लिया। सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं राखी की थाल सजाकर अपने घरों से निकली। थाल में राखी, मिठाई, कुमकुम और पूजा सामग्री शामिल थी। ब्रह्मयोनि पहाड़ के पास पहुंचकर ने विधि-विधान से पूजा की और नारियल फोड़कर पर्व की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग पेड़ों को राखी बांधी और उनकी आरती उतारी। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय पर्यावरण’ के नारों से गूंज उठा। रक्षा का संकल्प लिया छात्राओं का कहना था कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन के सच्चे रक्षक हैं। पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, वातावरण को स्वच्छ रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों के जीवन को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि जिस तरह भाई की रक्षा का संकल्प रक्षाबंधन पर लिया जाता है, उसी तरह पेड़ों की रक्षा का संकल्प लेना भी आवश्यक है। स्थानीय महिला राखी गुप्ता ने बताया कि वे पेड़ों को भाई मानकर राखी बांध रही हैं। ब्रह्मयोनि पहाड़ और उसकी तलहटी में स्थानीय लोगों द्वारा सैकड़ों पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की देखभाल का भी संकल्प लिया गया है, ताकि वे सूखें नहीं और आने वाली पीढ़ियों को हरियाली से भरपूर वातावरण मिल सके। यदि पेड़ सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। सैनिकों को भी बांधी राखी, खिलाई मिठाई पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के बाद महिलाओं ने गयाजी ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर (ओटीए) में कार्यरत सेना के जवानों को भी राखी बांधी। महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें मिठाई खिलाई। जवानों के चेहरे पर भी इस मौके पर खुशी दिखाई दी। सेना के जवान सागर सिंह ने कहा कि स्थानीय महिलाओं द्वारा राखी बांधे जाने से उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बताया कि वे पंजाब के रहने वाले हैं और रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर अपने परिवार से दूर हैं। लेकिन महिलाओं ने जब उन्हें राखी बांधी तो उन्हें परिवार से दूर होने का एहसास नहीं हुआ। उन्होंने रक्षा का वचन भी दिया। ‘पेड़ हमारी रक्षा करते हैं, अब हमारी बारी’ कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि पेड़ हमेशा से मनुष्य की रक्षा करते आए हैं। वे गर्मी में छाया देते हैं, हवा को शुद्ध करते हैं और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन के अवसर पर पेड़ों को राखी बांधकर उन्होंने यह संदेश दिया कि अब पेड़ों की रक्षा करना भी समाज की जिम्मेदारी है।

