जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे झारखंड के 20 बच्चे सोमवार को मुफ्त इलाज और ऑपरेशन के लिए कोच्चि स्थित अमृता अस्पताल रवाना हुए। बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर सरकार जांच, ऑपरेशन, दवा, अस्पताल में रहने-खाने और आने-जाने का खर्च उठाएगी। रवाना होने के दौरान कई अभिभावक भावुक हो गए। कहा कि निजी अस्पतालों में ऑपरेशन पर लाखों रुपए खर्च होते हैं, जिसे जुटाना उनके लिए संभव नहीं था। स्वास्थ्य मंत्री खुद हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचे और बच्चों से मुलाकात कर उन्हें उपहार देकर रवाना किया। बताया कि अब तक 75 बच्चों का मुफ्त हृदय ऑपरेशन हो चुका है। अमृता अस्पताल के सहयोग से करीब 100 बच्चों के इलाज का लक्ष्य है। इस पहल के तहत बच्चों की हृदय संबंधी जांच और आवश्यक परीक्षण, ऑपरेशन, दवा, अस्पताल में रहने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। ऑपरेशन के बाद फॉलोअप और घर वापसी तक स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहेगी। जनप्रतिनिधियों से ऐसे बच्चों की जानकारी देने की अपील केस-1: पता नहीं कभी निखिल का इलाज करा भी पाते या नहीं रांची के निखिल लोहरा के परिजनों को काफी समय से उसके जन्मजात हृदय रोग की चिंता थी। डॉक्टरों ने इलाज और ऑपरेशन की जरूरत बताई थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि लाखों रुपए जुटाकर इलाज करा सके। परिजनों ने कहा, इलाज पर 5 से 10 लाख रुपए तक खर्च आता। इतनी राशि हम कहां से जुटाते, पता नहीं कभी इलाज करा भी पाते या नहीं। केस-2: ऑपरेशन जरूरी था, खर्च बहुत बड़ा था, मदद के लिए आभार बोकारो के उज्जवल महतो के परिवार के सामने भी बेटे के इलाज का खर्च सबसे बड़ी चुनौती था। जन्मजात दिल में छेद के कारण ऑपरेशन जरूरी था, लेकिन परिवार के लिए लाखों रुपये जुटाना संभव नहीं था। परिजनों ने कहा, बच्चे की बीमारी को लेकर हमेशा डर बना रहता था। इतनी बड़ी राशि हमारे लिए बहुत ज्यादा है। सरकार ने मुफ्त इलाज की व्यवस्था कर दी है। उम्मीद है कि ऑपरेशन सफल होगा। केस-3: जन्म से दिल में छेद था, अब बेटी बिल्कुल ठीक हो जाएगी देवघर की मीठी कुमारी भी जन्म से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रही है। परिवार के लिए उसका इलाज कराना आर्थिक रूप से मुश्किल था। अब सरकार की पहल से मीठी को कोच्चि भेजा गया है। मीठी की मां ने कहा, हम अपनी बेटी का इलाज कराना चाहते थे, लेकिन 8 लाख रुपये का इंतजाम करना हमारे लिए संभव नहीं था। अब सरकार ने जिम्मेदारी उठाई है। भरोसा है कि बेटी स्वस्थ होकर घर लौटेगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सांसदों, विधायकों, जिला परिषद सदस्यों, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों से अपील की कि उनके क्षेत्र में यदि कोई ऐसा बच्चा है, जिसके दिल में जन्मजात छेद है और आर्थिक परेशानी के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे पात्र बच्चों का इलाज सरकार की ओर से मुफ्त कराने का प्रयास किया जाएगा। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे झारखंड के 20 बच्चे सोमवार को मुफ्त इलाज और ऑपरेशन के लिए कोच्चि स्थित अमृता अस्पताल रवाना हुए। बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर सरकार जांच, ऑपरेशन, दवा, अस्पताल में रहने-खाने और आने-जाने का खर्च उठाएगी। रवाना होने के दौरान कई अभिभावक भावुक हो गए। कहा कि निजी अस्पतालों में ऑपरेशन पर लाखों रुपए खर्च होते हैं, जिसे जुटाना उनके लिए संभव नहीं था। स्वास्थ्य मंत्री खुद हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचे और बच्चों से मुलाकात कर उन्हें उपहार देकर रवाना किया। बताया कि अब तक 75 बच्चों का मुफ्त हृदय ऑपरेशन हो चुका है। अमृता अस्पताल के सहयोग से करीब 100 बच्चों के इलाज का लक्ष्य है। इस पहल के तहत बच्चों की हृदय संबंधी जांच और आवश्यक परीक्षण, ऑपरेशन, दवा, अस्पताल में रहने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। ऑपरेशन के बाद फॉलोअप और घर वापसी तक स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहेगी। जनप्रतिनिधियों से ऐसे बच्चों की जानकारी देने की अपील केस-1: पता नहीं कभी निखिल का इलाज करा भी पाते या नहीं रांची के निखिल लोहरा के परिजनों को काफी समय से उसके जन्मजात हृदय रोग की चिंता थी। डॉक्टरों ने इलाज और ऑपरेशन की जरूरत बताई थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि लाखों रुपए जुटाकर इलाज करा सके। परिजनों ने कहा, इलाज पर 5 से 10 लाख रुपए तक खर्च आता। इतनी राशि हम कहां से जुटाते, पता नहीं कभी इलाज करा भी पाते या नहीं। केस-2: ऑपरेशन जरूरी था, खर्च बहुत बड़ा था, मदद के लिए आभार बोकारो के उज्जवल महतो के परिवार के सामने भी बेटे के इलाज का खर्च सबसे बड़ी चुनौती था। जन्मजात दिल में छेद के कारण ऑपरेशन जरूरी था, लेकिन परिवार के लिए लाखों रुपये जुटाना संभव नहीं था। परिजनों ने कहा, बच्चे की बीमारी को लेकर हमेशा डर बना रहता था। इतनी बड़ी राशि हमारे लिए बहुत ज्यादा है। सरकार ने मुफ्त इलाज की व्यवस्था कर दी है। उम्मीद है कि ऑपरेशन सफल होगा। केस-3: जन्म से दिल में छेद था, अब बेटी बिल्कुल ठीक हो जाएगी देवघर की मीठी कुमारी भी जन्म से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रही है। परिवार के लिए उसका इलाज कराना आर्थिक रूप से मुश्किल था। अब सरकार की पहल से मीठी को कोच्चि भेजा गया है। मीठी की मां ने कहा, हम अपनी बेटी का इलाज कराना चाहते थे, लेकिन 8 लाख रुपये का इंतजाम करना हमारे लिए संभव नहीं था। अब सरकार ने जिम्मेदारी उठाई है। भरोसा है कि बेटी स्वस्थ होकर घर लौटेगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सांसदों, विधायकों, जिला परिषद सदस्यों, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों से अपील की कि उनके क्षेत्र में यदि कोई ऐसा बच्चा है, जिसके दिल में जन्मजात छेद है और आर्थिक परेशानी के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे पात्र बच्चों का इलाज सरकार की ओर से मुफ्त कराने का प्रयास किया जाएगा।

