लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में सोमवार को दो में से एक डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब हो गई, साथ ही दूसरी मशीन की फिल्म भी खत्म हो गई। इससे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। बड़ी संख्या में मरीजों को अगले दिन आने की सलाह देकर लौटाया गया। बलरामपुर अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक मरीजों को एक्सरे जांच कराने की सलाह दी जा रही है। सबसे ज्यादा टीबी एंड चेस्ट व हड्डी की बीमारी से पीड़ितों को एक्सरे जांच कराने की सलाह दी जा रही है। दो डिजिटल एक्सरे मशीन हैं। इसमें सोमवार को एक मशीन खराब हो गई है। इसकी वजह से दूसरी मशीन पर मरीजों का दबाव आ गया है। इस मशीन पर एक्सरे फिल्म खत्म हो गई थी। मरीजों को मोबाइल फोन पर फिल्म की फोटो खींचने की सलाह दी जा रही थी। मरीजों ने बताया कि डॉक्टर ने एक्सरे जांच के लिए पर्चे पर लिखा था। सोमवार को जांच के लिए पहुंच थे लेकिन वापस लौटा दिया गया। निदेशक बोले- जल्द ठीक की जाएगी मशीन अस्पताल के निदेशक डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि मशीन में कुछ तकनीकी समस्या आ गई थी, जिसे ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से मेडिकोलीगल जांच अटकी दूसरी तरफ, बलरामपुर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी से मरीजों की सामान्य जांच के साथ मेडिकोलीगल मामलों के निपटारे में भी परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में तैनात स्थाई रेडियोलॉजिस्ट की बीमारी से मौत के बाद अपर निदेशक लखनऊ मंडल के स्तर से इसी महीने एक रेडियोलॉजिस्ट को अस्पताल से संबद्ध किया गया था, लेकिन 23 दिन बीतने के बाद भी उन्होंने यहां सेवा शुरू नहीं की है। अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट अपर निदेशक लखनऊ मंडल को भेज दी है। जांच के काम के लिए अस्पताल में दो रेडियोलॉजिस्ट सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति पर तैनात हैं। इन्हीं के जरिए सामान्य जांच का काम चलाया जा रहा है। रोज पांच से ज्यादा मेडिकोलीगल केस रेडियोलॉजिस्ट की कमी का सबसे ज्यादा असर मेडिकोलीगल जांच पर पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना पांच से अधिक मेडिकोलीगल मामले पहुंचते हैं। इनमें मारपीट, चोट, सड़क दुर्घटना और अन्य आपराधिक मामलों से जुड़े मरीज शामिल होते हैं। इन मामलों में होने वाली जांच और रिपोर्ट कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है। रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में कई मामलों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने में अड़चन आ रही है। इसका असर पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की कार्रवाई पर भी पड़ रहा है। 23 दिन बाद भी संबद्ध डॉक्टर नहीं पहुंचे समस्या को देखते हुए अपर निदेशक लखनऊ मंडल डॉ.जीपी गुप्ता ने इसी महीने रेडियोलॉजिस्ट डॉ.शशिकांत को बलरामपुर अस्पताल से संबद्ध किया था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक संबद्धता के 23 दिन बाद भी डॉक्टर ने यहां सेवा शुरू नहीं की है। इससे अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी दूर नहीं हो सकी है। अस्पताल निदेशक डॉ.बीकेएस चौहान ने बताया कि संबंधित रेडियोलॉजिस्ट को फोन कर अस्पताल आने के लिए कहा गया है। पूरे मामले की जानकारी अपर निदेशक लखनऊ मंडल को भी दे दी गई है। अस्पताल प्रशासन के सामने अब मेडिकोलीगल जांच को नियमित करने के साथ सामान्य मरीजों की जांच व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।

