गांधीनगर। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में एच1एन1 (सीजनल फ्लू) के मामले सामने आने और इन शहरों से गुजरात में लगातार हो रहे आवागमन के बीच राज्य सरकार मौसमी बीमारियों और फ्लू की स्थिति को लेकर अलर्ट है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया की अध्यक्षता में सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक की गई। इसमें राज्य के सिविल अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेजों के डीन तथा जिला एवं महानगरपालिका के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में अधिकारियों को उनके क्षेत्र के अस्पतालों में दवा, उपचार सुविधाएं और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार रखने के निर्देश दिए गए।
एच1एन1 का कोई गंभीर प्रकोप नहीं
स्वास्थ्य राज्य मंत्री पानशेरिया ने संवाददाताओं से कहा कि गुजरात में फिलहाल एच1एन1 की स्थिति सामान्य है। किसी गंभीर प्रकोप जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने नागरिकों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की। दिल्ली और मुंबई से लोगों के लगातार गुजरात आने के कारण स्वास्थ्य विभाग को निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सैंपलिंग-टेस्टिंग और उपचार में लापरवाही नहीं
मंत्री ने वर्ष 2019 की एच1एन1 गाइडलाइन के अनुसार अस्पतालों में मरीजों की सैंपलिंग, टेस्टिंग और उपचार प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने को कहा है। मेडिकल कॉलेजों के डीन और सिविल अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को दवाइयों के साथ ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
स्टाफ की कमी तत्काल दूर करने के निर्देश
बैठक में अस्पतालों में तकनीकी या स्टाफ संबंधी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर तत्काल समाधान करने को कहा गया है, ताकि मरीजों को उपचार में किसी तरह की परेशानी न हो। अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर देने को कहा है। मंत्री ने मानसून के दौरान जलजनित और मच्छर जन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की सराहना की।
हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
वहीं सूरत शहर में फूड पॉइजनिंग की घटना के बाद सूरत महानगरपालिका का स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। स्वास्थ्य मंत्री, मनपा आयुक्त और महापौर के निर्देश पर पिछले छह दिनों से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 20 फूड सेफ्टी ऑफिसर और करीब 300 सेनिटरी इंस्पेक्टर समेत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 1,535 प्रतिष्ठानों की आकस्मिक जांच की। जांच के दौरान करीब 5.5 टन बासी पदार्थ जब्त कर मौके पर ही नष्ट कराया गया। गंभीर लापरवाही पाए जाने पर 82 प्रतिष्ठानों को तत्काल बंद कराया गया, जबकि 817 इकाइयों को नोटिस जारी किए गए। कार्रवाई के तहत करीब 28.75 लाख रुपए का प्रशासनिक जुर्माना भी वसूला गया।

