मुंगेर के किला परिसर स्थित प्रेक्षागृह में रविवार को दी मुंगेर-जमुई सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के मुख्यालय सभागार में बैंक की आमसभा आयोजित की गई। इसमें बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य, अध्यक्ष प्रतिनिधि विनोद सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आमसभा में बैंक की वार्षिक कार्य योजना 2025-26, पिछले वित्तीय वर्ष के कार्यों की समीक्षा और आगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बिहार राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे ने धान खरीद प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला। ब्याज की पूरी भरपाई करने की आवश्यकता पर जोर उन्होंने बताया कि धान खरीद के बाद पैक्स उसे राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के माध्यम से मिलर को भेजता है। मिलर चावल तैयार कर एसएफसी को उपलब्ध कराता है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग सात से आठ माह का समय लग जाता है। चौबे ने कहा कि एसएफसी से भुगतान में देरी के कारण पैक्स को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एसएफसी द्वारा केवल लगभग दो माह के ब्याज का ही भुगतान किया जाता है, जबकि पैक्स को पांच से छह माह तक ब्याज का भार वहन करना पड़ता है। इससे पैक्स और सहकारी संस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर होती हैं। उन्होंने व्यवस्था में सुधार कर पैक्स को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और ब्याज की पूरी भरपाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया। महंगाई किसानों के लिए बड़ी चुनौती चौबे ने कहा कि किसानों के लिए महंगाई भी बड़ी समस्या है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। कृषि और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में वृद्धि हुई है, लेकिन सहकारिता से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पहले फसल सहायता के तहत किसानों को अधिकतम 20 हजार रुपए तक सहायता मिलती थी, लेकिन अब फसल बीमा योजना के तहत किसानों को पूरी बीमित राशि का भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि बैंक की आमसभा में किसानों और ग्राहकों के हित से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं, जिन्हें सदस्यों की स्वीकृति प्रदान की जाती है। बैंक का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक बैंकिंग सुविधा और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। वर्तमान में हर पंचायत में कंप्यूटरीकरण का काम चल रहा है। इससे बैंकिंग सेवाओं को लोगों के घर-द्वार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। 62 करोड़ के घाटे से उबर रहा बैंक बैंक के पूर्व अध्यक्ष सह वर्तमान अध्यक्ष प्रतिनिधि विनोद सिंह ने कहा कि मुंगेर-जमुई सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की आमसभा में पहली बार राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि नाबार्ड के सीजीएम का भी मुंगेर से संबंध है। उनके सहयोग से बैंक के उत्थान को गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से पहले बैंक करीब 62 करोड़ रुपए के घाटे में था। अब धीरे-धीरे बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि अभी पूरी तरह स्थिति सामान्य नहीं हुई है। पहले बैंक के कई ग्राहक इससे दूर हो गए थे, लेकिन अब वे दोबारा बैंक से जुड़ रहे हैं। 151 करोड़ का कारोबार, अगले वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ का लक्ष्य विनोद सिंह ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में बैंक का कारोबार करीब 151 करोड़ रुपए है। अगले वित्तीय वर्ष तक इसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में बैंक का कारोबार 200 करोड़ रुपए तक पहुंचने पर ही अगली आमसभा आयोजित की जाएगी। उन्होंने व्यापार मंडल अध्यक्षों और सहकारी बैंक के सदस्यों से अपने बैंक खाते ऑपरेटिव बैंक में खुलवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग बैंक से जुड़ेंगे और अपने खातों का नियमित संचालन करेंगे तो बैंक के कारोबार को मजबूती मिलेगी। आमसभा में बैंक की कार्ययोजना और भविष्य के विस्तार को लेकर भी कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। मुंगेर के किला परिसर स्थित प्रेक्षागृह में रविवार को दी मुंगेर-जमुई सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के मुख्यालय सभागार में बैंक की आमसभा आयोजित की गई। इसमें बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य, अध्यक्ष प्रतिनिधि विनोद सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आमसभा में बैंक की वार्षिक कार्य योजना 2025-26, पिछले वित्तीय वर्ष के कार्यों की समीक्षा और आगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बिहार राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे ने धान खरीद प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला। ब्याज की पूरी भरपाई करने की आवश्यकता पर जोर उन्होंने बताया कि धान खरीद के बाद पैक्स उसे राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के माध्यम से मिलर को भेजता है। मिलर चावल तैयार कर एसएफसी को उपलब्ध कराता है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग सात से आठ माह का समय लग जाता है। चौबे ने कहा कि एसएफसी से भुगतान में देरी के कारण पैक्स को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एसएफसी द्वारा केवल लगभग दो माह के ब्याज का ही भुगतान किया जाता है, जबकि पैक्स को पांच से छह माह तक ब्याज का भार वहन करना पड़ता है। इससे पैक्स और सहकारी संस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर होती हैं। उन्होंने व्यवस्था में सुधार कर पैक्स को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और ब्याज की पूरी भरपाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया। महंगाई किसानों के लिए बड़ी चुनौती चौबे ने कहा कि किसानों के लिए महंगाई भी बड़ी समस्या है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। कृषि और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में वृद्धि हुई है, लेकिन सहकारिता से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पहले फसल सहायता के तहत किसानों को अधिकतम 20 हजार रुपए तक सहायता मिलती थी, लेकिन अब फसल बीमा योजना के तहत किसानों को पूरी बीमित राशि का भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि बैंक की आमसभा में किसानों और ग्राहकों के हित से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं, जिन्हें सदस्यों की स्वीकृति प्रदान की जाती है। बैंक का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक बैंकिंग सुविधा और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। वर्तमान में हर पंचायत में कंप्यूटरीकरण का काम चल रहा है। इससे बैंकिंग सेवाओं को लोगों के घर-द्वार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। 62 करोड़ के घाटे से उबर रहा बैंक बैंक के पूर्व अध्यक्ष सह वर्तमान अध्यक्ष प्रतिनिधि विनोद सिंह ने कहा कि मुंगेर-जमुई सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की आमसभा में पहली बार राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि नाबार्ड के सीजीएम का भी मुंगेर से संबंध है। उनके सहयोग से बैंक के उत्थान को गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से पहले बैंक करीब 62 करोड़ रुपए के घाटे में था। अब धीरे-धीरे बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि अभी पूरी तरह स्थिति सामान्य नहीं हुई है। पहले बैंक के कई ग्राहक इससे दूर हो गए थे, लेकिन अब वे दोबारा बैंक से जुड़ रहे हैं। 151 करोड़ का कारोबार, अगले वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ का लक्ष्य विनोद सिंह ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में बैंक का कारोबार करीब 151 करोड़ रुपए है। अगले वित्तीय वर्ष तक इसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में बैंक का कारोबार 200 करोड़ रुपए तक पहुंचने पर ही अगली आमसभा आयोजित की जाएगी। उन्होंने व्यापार मंडल अध्यक्षों और सहकारी बैंक के सदस्यों से अपने बैंक खाते ऑपरेटिव बैंक में खुलवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग बैंक से जुड़ेंगे और अपने खातों का नियमित संचालन करेंगे तो बैंक के कारोबार को मजबूती मिलेगी। आमसभा में बैंक की कार्ययोजना और भविष्य के विस्तार को लेकर भी कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।

