मिर्जापुर में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और अन्य संगठनों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने देश में जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग की। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। वक्ताओं ने संसद में विधेयक पारित कर जातिगत आरक्षण को तत्काल समाप्त करने की मांग की। संगठन का आरोप है कि जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विभाजन और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्तमान आरक्षण प्रणाली के कारण कई योग्य विद्यार्थी और युवा अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद अवसरों से वंचित रह जाते हैं। इसके विपरीत, कम अंक वाले अभ्यर्थियों को भी आरक्षण के चलते प्रवेश और नियुक्तियों में अवसर मिल जाते हैं। इससे युवाओं में असंतोष और कुंठा बढ़ रही है। ज्ञापन में स्कूल-कॉलेजों, उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में जातिगत आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को समाप्त करने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति होनी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्येक वर्ग को समान रूप से लाभ मिल सके। उन्होंने ‘सभी की पहचान सिर्फ भारतवासी हो’ का नारा भी दिया। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जातिगत आरक्षण के कारण उत्पन्न सामाजिक तनाव और भेदभाव को समाप्त करने के लिए सरकार को इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जाति आधारित आरक्षण समाप्त कर आर्थिक आधार पर व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो भविष्य में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन में कहा गया कि ऐसी स्थिति में सरकार और राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस प्रदर्शन में अरविंद तिवारी, मधुकर मिश्र, अखिलेश मिश्रा, मनोज कुमार पांडेय, दिलीप सिंह गहरवार, शिवम, राजमणि दुबे, अभिषेक सिंह, मौजी गुरु, देवेश प्रताप सिंह, नरेश सिंह, मंगल सिंह, राजेश कुमार, अनिल कुमार, सत्यम सिंह, मुकेश त्रिपाठी, गुड्डू सिंह, मंगल प्रसाद, पारस, धर्मजीत सिंह और साधु तिवारी सहित कई अन्य लोग शामिल थे।

