534.67 करोड़ की सड़क उद्घाटन से पहले डूबी:खगड़िया में तेज बारिश से रोड पर 3 फीट पानी

534.67 करोड़ की सड़क उद्घाटन से पहले डूबी:खगड़िया में तेज बारिश से रोड पर 3 फीट पानी

खगड़िया में 534.67 करोड़ रुपये की सोनमनकी-डेंगराही सड़क परियोजना उद्घाटन से पहले ही जलमग्न हो गई है। फरकिया क्षेत्र की यह महत्वपूर्ण सड़क खगड़िया सीमा में पहली ही बरसात में कई स्थानों पर पानी में डूब गई। इससे ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव और चचरी पुल का सहारा लेना पड़ रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य खगड़िया और सहरसा के बीच सुगम आवागमन सुनिश्चित करना तथा फरकिया क्षेत्र को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करना था। परियोजना पूरी होने पर इलाके के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माणाधीन सड़क की मौजूदा स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता और योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं सोनमनकी घाट से सर्वजीता तक सड़क की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। कई जगहों पर सड़क पर बड़े गड्ढे और रंकट भरे हैं। बारिश के बाद सड़क और आसपास का पूरा इलाका पानी में डूब जाता है। झीमा के समीप करीब एक महीने से सड़क पर पानी जमा रहने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, कई हिस्सों में वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिसके कारण उन्हें नाव से यात्रा करनी पड़ रही है। यह स्थिति तब है जब सड़क का अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। विभाग को पहले से है बाढ़ की जानकारी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह क्षेत्र बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित होने के बावजूद सड़क का पर्याप्त ऊंचीकरण नहीं किया गया। सड़क को लगभग जमीन के स्तर पर ही बनाया गया, जिसके कारण बारिश और बाढ़ के समय पानी सड़क पर जमा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके की भौगोलिक स्थिति और हर वर्ष आने वाली बाढ़ की जानकारी विभाग को पहले से है। इसके बावजूद सड़क को ऊंचे लेवल पर नहीं बनाए जाने से करोड़ों रुपये की परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं। 300 मीटर की चचरी से हो रहा आवागमन सड़क पर पानी जमा होने और आवागमन बाधित होने के बाद स्थानीय लोगों ने करीब 300 मीटर लंबा चचरी पुल तैयार कर वैकल्पिक रास्ता बनाया है। बताया जा रहा है कि बाइक से इस चचरी पुल से आने-जाने वालों से अप-डाउन के करीब 50 रुपये तक लिए जा रहे हैं। पैदल यात्रियों से भी राशि लिए जाने की बात सामने आई है। सरकारी स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में इस अस्थायी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। डेंगराही पुल के पिलर तैयार, संपर्क सड़क बदहाल परियोजना के तहत करीब 2.68 किलोमीटर लंबे डेंगराही पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है। पुल के लगभग पिलर तैयार हो चुके हैं, लेकिन संपर्क सड़क की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने के बाद भी यदि संपर्क सड़क मजबूत और ऊंची नहीं की गई तो परियोजना का अपेक्षित लाभ लोगों को नहीं मिल पाएगा। उत्तर बिहार रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति के संयोजक सुभाष चंद्र जोशी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सड़क के पर्याप्त ऊंचीकरण की आवश्यकता बताते हुए निर्माण में कथित अनियमितता और विभागीय स्तर पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। विभाग ने भी माना, लोलैंड इलाके में है सड़क ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार के अनुसार, सोनमनकी-डेंगराही सड़क का स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है। उन्होंने बताया कि सड़क के कई हिस्से लोलैंड क्षेत्र में आते हैं। जरूरत के अनुसार सड़क का ऊंचीकरण और पुल निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुराने एग्रीमेंट को फॉर-क्लोज कर नए सिरे से सड़क निर्माण कराने पर विचार किया जा रहा है। कांवरियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी श्रावण की सोमवारी से पहले मुंगेर घाट से जल भरकर सहरसा-बख्तियारपुर के मटेश्वर धाम जाने वाले कांवरियों की आवाजाही से भी इस रास्ते पर दबाव बढ़ गया था। पानी से घिरे रास्ते के कारण नावों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने लगी थी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने बल्लियों और चचरी के सहारे वैकल्पिक रास्ता तैयार किया। करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल फरकिया की लाइफलाइन बनने वाली 534.67 करोड़ रुपये की परियोजना फिलहाल खुद संकट में नजर आ रही है। उद्घाटन से पहले ही सड़क का जगह-जगह जलमग्न होना निर्माण की गुणवत्ता, सड़क की डिजाइन, ऊंचीकरण और सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग सड़क की मौजूदा स्थिति को किस तरह सुधारता है और परियोजना को कब तक पूरा कर फरकिया के लोगों को स्थायी आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा पाता है। खगड़िया में 534.67 करोड़ रुपये की सोनमनकी-डेंगराही सड़क परियोजना उद्घाटन से पहले ही जलमग्न हो गई है। फरकिया क्षेत्र की यह महत्वपूर्ण सड़क खगड़िया सीमा में पहली ही बरसात में कई स्थानों पर पानी में डूब गई। इससे ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव और चचरी पुल का सहारा लेना पड़ रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य खगड़िया और सहरसा के बीच सुगम आवागमन सुनिश्चित करना तथा फरकिया क्षेत्र को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करना था। परियोजना पूरी होने पर इलाके के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माणाधीन सड़क की मौजूदा स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता और योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं सोनमनकी घाट से सर्वजीता तक सड़क की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। कई जगहों पर सड़क पर बड़े गड्ढे और रंकट भरे हैं। बारिश के बाद सड़क और आसपास का पूरा इलाका पानी में डूब जाता है। झीमा के समीप करीब एक महीने से सड़क पर पानी जमा रहने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, कई हिस्सों में वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिसके कारण उन्हें नाव से यात्रा करनी पड़ रही है। यह स्थिति तब है जब सड़क का अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। विभाग को पहले से है बाढ़ की जानकारी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह क्षेत्र बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित होने के बावजूद सड़क का पर्याप्त ऊंचीकरण नहीं किया गया। सड़क को लगभग जमीन के स्तर पर ही बनाया गया, जिसके कारण बारिश और बाढ़ के समय पानी सड़क पर जमा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके की भौगोलिक स्थिति और हर वर्ष आने वाली बाढ़ की जानकारी विभाग को पहले से है। इसके बावजूद सड़क को ऊंचे लेवल पर नहीं बनाए जाने से करोड़ों रुपये की परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं। 300 मीटर की चचरी से हो रहा आवागमन सड़क पर पानी जमा होने और आवागमन बाधित होने के बाद स्थानीय लोगों ने करीब 300 मीटर लंबा चचरी पुल तैयार कर वैकल्पिक रास्ता बनाया है। बताया जा रहा है कि बाइक से इस चचरी पुल से आने-जाने वालों से अप-डाउन के करीब 50 रुपये तक लिए जा रहे हैं। पैदल यात्रियों से भी राशि लिए जाने की बात सामने आई है। सरकारी स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में इस अस्थायी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। डेंगराही पुल के पिलर तैयार, संपर्क सड़क बदहाल परियोजना के तहत करीब 2.68 किलोमीटर लंबे डेंगराही पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है। पुल के लगभग पिलर तैयार हो चुके हैं, लेकिन संपर्क सड़क की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने के बाद भी यदि संपर्क सड़क मजबूत और ऊंची नहीं की गई तो परियोजना का अपेक्षित लाभ लोगों को नहीं मिल पाएगा। उत्तर बिहार रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति के संयोजक सुभाष चंद्र जोशी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सड़क के पर्याप्त ऊंचीकरण की आवश्यकता बताते हुए निर्माण में कथित अनियमितता और विभागीय स्तर पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। विभाग ने भी माना, लोलैंड इलाके में है सड़क ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार के अनुसार, सोनमनकी-डेंगराही सड़क का स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है। उन्होंने बताया कि सड़क के कई हिस्से लोलैंड क्षेत्र में आते हैं। जरूरत के अनुसार सड़क का ऊंचीकरण और पुल निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुराने एग्रीमेंट को फॉर-क्लोज कर नए सिरे से सड़क निर्माण कराने पर विचार किया जा रहा है। कांवरियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी श्रावण की सोमवारी से पहले मुंगेर घाट से जल भरकर सहरसा-बख्तियारपुर के मटेश्वर धाम जाने वाले कांवरियों की आवाजाही से भी इस रास्ते पर दबाव बढ़ गया था। पानी से घिरे रास्ते के कारण नावों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने लगी थी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने बल्लियों और चचरी के सहारे वैकल्पिक रास्ता तैयार किया। करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल फरकिया की लाइफलाइन बनने वाली 534.67 करोड़ रुपये की परियोजना फिलहाल खुद संकट में नजर आ रही है। उद्घाटन से पहले ही सड़क का जगह-जगह जलमग्न होना निर्माण की गुणवत्ता, सड़क की डिजाइन, ऊंचीकरण और सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग सड़क की मौजूदा स्थिति को किस तरह सुधारता है और परियोजना को कब तक पूरा कर फरकिया के लोगों को स्थायी आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा पाता है।  

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