Social Media पर Content Removal का क्या है सच? MeitY Secretary ने Section 69A पर दिया बड़ा बयान

Social Media पर Content Removal का क्या है सच? MeitY Secretary ने Section 69A पर दिया बड़ा बयान
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने भारत के कंटेंट-हटाने के तरीके के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि सरकार आम तौर पर सोशल मीडिया पर कंटेंट को सेंसर नहीं करती है और ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने की अपनी शक्ति का इस्तेमाल केवल खास परिस्थितियों में ही करती है। ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब सरकार कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक और प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम को लेकर मेटा के साथ बातचीत कर रही है। सूत्रों का कहना है कि भारत में काम करने वाले मेटा के प्लेटफॉर्म्स को केवल ग्लोबल कंटेंट पॉलिसी पर निर्भर रहने के बजाय भारतीय कानूनों और नियमों का पालन करना होगा। दोनों पक्षों के बीच अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं।
‘बिज़नेस टुडे इंडिया एट 100’ कार्यक्रम में बोलते हुए कृष्णन ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और यूज़र्स पर उनके असर को लेकर अमेरिका, यूके, फ़्रांस और ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े लोकतांत्रिक देशों में बहस चल रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने एक ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया है जिसे कुछ देशों ने, जिनमें यूरोपीय संघ के देश भी शामिल हैं, सकारात्मक रूप से देखा है। लेकिन कृष्णन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार के आदेश पर ब्लॉक करने, सरकार के नोटिस के बाद की कार्रवाई और खुद प्लेटफॉर्म द्वारा कंटेंट हटाने (टेकडाउन) के बीच अंतर किया जाना चाहिए।

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धारा 69A के तहत सरकारी ब्लॉक

कृष्णन ने कहा कि MeitY सचिव के तौर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत कंटेंट को ब्लॉक करने की उनकी शक्ति का इस्तेमाल “बहुत ही कम” और केवल चार खास आधारों पर किया गया: देश की सुरक्षा, भारत की रक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और विदेशी देशों के साथ दोस्ताना संबंध। उन्होंने कहा कि ये आधार संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगी पाबंदियों का ही एक हिस्सा हैं। कृष्णन ने कहा अश्लीलता, मानहानि करने वाली सामग्री और अदालत की अवमानना ​​- ये तीन अन्य आधार हैं जिन पर हम 69A का इस्तेमाल नहीं करते हैं।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी अधिकारी का केवल यह मान लेना कि कोई चीज़ अश्लील या मानहानि करने वाली है, काफ़ी नहीं है। उन्होंने कहा मुझे यह साबित करना होगा कि मामला इन चार स्थितियों में से किसी एक के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा कि कुछ असाधारण हालात में इस अधिकार का इस्तेमाल ज़रूरी हो जाता है और इसके उदाहरण के तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बनी स्थिति का ज़िक्र किया। 

प्लेटफ़ॉर्म्स से बड़ी संख्या में कंटेंट हटाया जाता है

कृष्णन ने कहा कि ज़्यादातर कंटेंट हटाने का काम सोशल मीडिया कंपनियों ने सरकार के कहने पर नहीं, बल्कि अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस के आधार पर किया। उन्होंने कहा 99 प्रतिशत, या उससे भी ज़्यादा कंटेंट हटाने का काम असल में अलग-अलग सोशल मीडिया कंपनियों की अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस के आधार पर होता है। उन्होंने प्लेटफॉर्म्स की ओर से जारी की जाने वाली मंथली ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है।

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