करंट से झुलसे बंदर के बच्चे ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल:11 हजार वोल्ट तार की चपेट में आया, सड़क किनारे जख्मी हालत में पड़ा था

करंट से झुलसे बंदर के बच्चे ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल:11 हजार वोल्ट तार की चपेट में आया, सड़क किनारे जख्मी हालत में पड़ा था

भोजपुर में करंट से झुलसे बंदर के बच्चे की जान ग्रामीणों ने बचाई। दर्द से तड़पता बेजुबान सड़क किनारे पड़ा था। शरीर झुलस चुका था और वह उठने की कोशिश कर बार-बार छटपटा रहा था। आसपास से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर जब उस पर पड़ी तो वे खुद को रोक नहीं सके। किसी ने उसे यूं ही मरने के लिए छोड़ने के बजाय इंसानियत दिखाई। लोगों ने मिलकर घायल बंदर के बच्चे को उठाया। उसे लेकर आरा सदर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से उसका इलाज कराया। यह पूरा मामला गीधा थाना क्षेत्र के कायमनगर स्थित मां भवानी मंदिर के पास की है। सड़क किनारे टहल रहे लोगों की नजर पड़ी ग्रामीण विकास कुमार ने बताया कि सड़क पर टहल रहा था। इस दौरान मंदिर के पास सड़क किनारे बंदर का एक बच्चा जख्मी हालत में पड़ा दिखाई दिया। पास जाकर देखा तो उसके शरीर पर करंट से झुलसने के निशान थे। वह दर्द से तड़प रहा था। उसकी हालत देखकर दिल पसीज गया। इसके बाद अजय पासवान, शंकर कुमार, विद्या सागर, बल्लू कुमार, विष्णु कुमार समेत अन्य ग्रामीणों ने उसे सावधानी से उठाया। इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टर प्रमोद कुमार और नर्सिंग स्टाफ पूजा कुमारी की मदद से बंदर के बच्चे का उपचार कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार मां भवानी मंदिर के समीप से 11 हजार वोल्ट का विद्युत तार गुजर रहा है। आशंका है कि खेलने या इधर-उधर घूमने के दौरान बंदर का बच्चा विद्युत तार के संपर्क में आ गया। करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गया और नीचे गिरकर घायल हो गया। बेजुबान जीव के प्रति दिखाई इंसानियत विकास कुमार ने कहा कि इंसान की तरह बेजुबान जानवर भी दर्द महसूस करते हैं। जब बंदर के बच्चे को तड़पते देखा तो उसे उसी हालत में छोड़ना सही नहीं लगा। मानवता के नाते उसे अस्पताल पहुंचाना अपना फर्ज समझा। ग्रामीणों की इस संवेदनशील पहल की आसपास के लोगों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि बेजुबान जीव के प्रति दिखाई गई यह संवेदना समाज को इंसानियत और दया का सकारात्मक संदेश देती है। भोजपुर में करंट से झुलसे बंदर के बच्चे की जान ग्रामीणों ने बचाई। दर्द से तड़पता बेजुबान सड़क किनारे पड़ा था। शरीर झुलस चुका था और वह उठने की कोशिश कर बार-बार छटपटा रहा था। आसपास से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर जब उस पर पड़ी तो वे खुद को रोक नहीं सके। किसी ने उसे यूं ही मरने के लिए छोड़ने के बजाय इंसानियत दिखाई। लोगों ने मिलकर घायल बंदर के बच्चे को उठाया। उसे लेकर आरा सदर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से उसका इलाज कराया। यह पूरा मामला गीधा थाना क्षेत्र के कायमनगर स्थित मां भवानी मंदिर के पास की है। सड़क किनारे टहल रहे लोगों की नजर पड़ी ग्रामीण विकास कुमार ने बताया कि सड़क पर टहल रहा था। इस दौरान मंदिर के पास सड़क किनारे बंदर का एक बच्चा जख्मी हालत में पड़ा दिखाई दिया। पास जाकर देखा तो उसके शरीर पर करंट से झुलसने के निशान थे। वह दर्द से तड़प रहा था। उसकी हालत देखकर दिल पसीज गया। इसके बाद अजय पासवान, शंकर कुमार, विद्या सागर, बल्लू कुमार, विष्णु कुमार समेत अन्य ग्रामीणों ने उसे सावधानी से उठाया। इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टर प्रमोद कुमार और नर्सिंग स्टाफ पूजा कुमारी की मदद से बंदर के बच्चे का उपचार कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार मां भवानी मंदिर के समीप से 11 हजार वोल्ट का विद्युत तार गुजर रहा है। आशंका है कि खेलने या इधर-उधर घूमने के दौरान बंदर का बच्चा विद्युत तार के संपर्क में आ गया। करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गया और नीचे गिरकर घायल हो गया। बेजुबान जीव के प्रति दिखाई इंसानियत विकास कुमार ने कहा कि इंसान की तरह बेजुबान जानवर भी दर्द महसूस करते हैं। जब बंदर के बच्चे को तड़पते देखा तो उसे उसी हालत में छोड़ना सही नहीं लगा। मानवता के नाते उसे अस्पताल पहुंचाना अपना फर्ज समझा। ग्रामीणों की इस संवेदनशील पहल की आसपास के लोगों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि बेजुबान जीव के प्रति दिखाई गई यह संवेदना समाज को इंसानियत और दया का सकारात्मक संदेश देती है।  

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