इंदौर में अजय की गवाही बनेगी हत्याकांड की अहम कड़ी:तालाब से निकलते ही पुलिस ने दर्ज किए थे बयान, 2.08 मिनट का VIDEO बनाया

इंदौर में अजय की गवाही बनेगी हत्याकांड की अहम कड़ी:तालाब से निकलते ही पुलिस ने दर्ज किए थे बयान, 2.08 मिनट का VIDEO बनाया

इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झालरिया में मां और 10 साल की बहन की हत्या के मामले में आरोपी पिता सुनील चौहान जेल पहुंच चुका है। इस हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी उसका 8 साल का बेटा अजय है। घटना की रात अजय तालाब में फेंके जाने के बाद किसी तरह खुद को बचाकर बाहर निकला और मुख्य सड़क तक पहुंचा। गश्त कर रही पुलिस ने उसे गीले कपड़ों और घबराई हालत में देखा। पूछताछ में उसने जो बताया, उससे वारदात की पूरी कहानी सामने आई। पुलिस के मुताबिक अजय ने बताया कि उसके पिता ने पहले उसकी मां की हत्या की और फिर उसे तथा उसकी छोटी बहन को तालाब में फेंक दिया। बहन पानी में डूब गई, जबकि अजय किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने उसका बयान मोबाइल में रिकॉर्ड किया। करीब 2 मिनट 8 सेकंड के इस वीडियो के बाद अगले दिन कोर्ट में भी उसका बयान दर्ज कराया गया। बच्चे की गवाही कितनी अहम? उप संचालक अभियोजन (DPO) राजेंद्रसिंह भदौरिया के मुताबिक किसी बच्चे की गवाही को सिर्फ उम्र के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। कानून में गवाही के लिए कोई निश्चित न्यूनतम उम्र तय नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण यह देखा जाता है कि बच्चा सवाल समझने और उनका तार्किक जवाब देने में सक्षम है या नहीं। बच्चे से सामान्य सवाल पूछकर उसकी समझने की क्षमता परखी जा सकती है। यदि वह सवालों को समझकर स्वाभाविक और तार्किक जवाब देता है तो उसे सक्षम साक्षी माना जा सकता है। हालांकि उसकी गवाही कितनी विश्वसनीय है, इसका अंतिम फैसला अदालत करेगी। घटना के तुरंत बाद दिया बयान महत्वपूर्ण अजय घटना के तत्काल बाद पुलिस को मिला और उसी समय उसने घटनाक्रम बताया। ऐसे तत्काल बयान जांच में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं, हालांकि उनकी विश्वसनीयता परिस्थितियों और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों से भी जांची जाती है। पुलिस द्वारा बनाया गया वीडियो भी जांच में उपयोगी हो सकता है। हालांकि केवल वीडियो रिकॉर्ड हो जाना पर्याप्त नहीं है। डिजिटल रिकॉर्डिंग को कानून के अनुसार प्रमाणित कर अदालत के सामने निर्धारित प्रक्रिया से पेश करना होगा। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो वीडियो बच्चे के बयान और दूसरे साक्ष्यों की पुष्टि करने में मदद कर सकता है। पुलिस इन सभी साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाकर केस डायरी तैयार करेगी। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा। इसके बाद अदालत में आरोप तय होने और साक्ष्यों की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। क्या केवल बच्चे की गवाही से सजा संभव है? भदौरिया के मुताबिक किसी सक्षम और विश्वसनीय गवाह की गवाही महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन अदालत पूरे मामले को समग्र रूप से देखेगी। अजय की गवाही के साथ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्डिंग और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण होगा। अजय की सुरक्षा और मानसिक स्थिति सबसे अहम मनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर के मुताबिक अजय ने अपनी उम्र के मुकाबले बेहद भयावह घटना का सामना किया है। उसने मां और छोटी बहन को खोया है और खुद भी जानलेवा स्थिति से बचकर निकला है। ऐसे अनुभव का बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। फिलहाल अजय अपने नाना के पास है। उसके लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाए रखना जरूरी है। परिवार को उससे बार-बार घटना के बारे में पूछताछ करने से बचना चाहिए। जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ से काउंसलिंग कराई जानी चाहिए और उसके व्यवहार में डर, चुप्पी, अकेलापन या अचानक बदलाव जैसे संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चे को धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में लौटाने की कोशिश करनी होगी। कानूनी प्रक्रिया के साथ उसके मानसिक पुनर्वास पर भी ध्यान देना जरूरी है। परिवार का सहारा न होने पर व्यवस्था DPO भदौरिया के मुताबिक यदि किसी बच्चे की देखभाल के लिए परिवार में कोई सक्षम व्यक्ति नहीं है तो बाल संरक्षण व्यवस्था के तहत उसकी सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था की जा सकती है। ऐसे मामलों में बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जाती है। एक तरफ कोर्ट में चलेगा केस, दूसरी तरफ मासूम को संभालने की चुनौती सुनील चौहान के खिलाफ पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। अदालत में बच्चे की गवाही, वीडियो और अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता का परीक्षण होगा। वहीं अजय के लिए यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी बदल देने वाली त्रासदी है। मां और बहन की मौत के बाद उसने अपना परिवार खो दिया और जिस पिता को वह अपना सहारा समझता था, वही इस हत्याकांड का आरोपी है। इसलिए इस केस में न्यायिक प्रक्रिया के साथ अजय की सुरक्षा, भावनात्मक देखभाल और मानसिक पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ———————————- ये खबर भी पढ़िए… गला घोंटकर पत्नी की हत्या, बेटा-बेटी को तालाब में फेंका इंदौर के कनाड़िया में सोमवार (17 अगस्त) देर रात एक व्यक्ति ने गला घोंटकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी। झलारिया गांव का सुनील पिता रामावतार चौहान (37) पेशे से ड्राइवर है। पत्नी अनीता बाई (32) की हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी दोनों बच्चों माही (10) और अजय (8) को हिंगोनिया गांव के पास स्थित तालाब में ले गया और उन्हें फेंक दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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