पैतृक घर को राजस्थानी संगमरमर-प्रीमियम पत्थरों से सजाया:पटना-नोएडा में करोड़ों का मकान; 21 साल की नौकरी में डिप्टी डायरेक्टर ने बनाई 10 करोड़ की प्रॉपर्टी

पैतृक घर को राजस्थानी संगमरमर-प्रीमियम पत्थरों से सजाया:पटना-नोएडा में करोड़ों का मकान; 21 साल की नौकरी में डिप्टी डायरेक्टर ने बनाई 10 करोड़ की प्रॉपर्टी

बिहार ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन बोर्ड (BBOSE) के डिप्टी डायरेक्टर अजय कुमार सिंह महज 21 साल की नौकरी में करीब 10 करोड़ की चल-अचल संपत्ति खड़ी बनाई। पूरी नौकरी के दौरान उन्हें वेतन के रूप में केवल 1.74 करोड़ रुपये मिले थे। जबकि ईओयू ने उनके खिलाफ 3 करोड़ 43 लाख 78 हजार 300 रुपये की आय से अधिक संपत्ति (डीए) का केस दर्ज किया है, जो उनकी आय से 90% अधिक है। अजय कुमार सिंह मूल रूप से बेगूसराय के साहेबपुर कमाल के परोरा गांव के रहने वाले हैं। पहले ये घर काफी साधारण हुआ करता था, जिसे अजय सिंह ने लग्जरी बना दिया। करीब 13 कट्ठे में फैले आलीशान बंगले में राजस्थान के काले संगमरमर और प्रीमियम पत्थरों से सजाया गया है। स्कॉर्पियो-बोलेरो, 3 ट्रैक्टर और 2 जेसीबी हमेशा खड़ी रहती है। एशो-आराम की सभी चीजें उपलब्ध है। गांव में पैतृक संपत्ति के अलावा 50 बीघा से अधिक उपजाऊ-व्यवसायिक जमीन है। ये संपत्तियां अजय ने तब से खरीदनी शुरू की जब वो मुंगेर में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के पद पर तैनात थे। आज की तारीख में अजय की यहां इतनी प्रॉपर्टी है, जिसका हिसाब नहीं है। आय से अधिक संपत्ति पर EOU की टीम ने गुरुवार को अजय के बेगूसराय और पटना समेत तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। अजय का फैमिली बैग्राउंड क्या है, सरकारी सेवा में कब आए, संपत्ति बनाने में भाई का कितना हाथ है, ग्रामीण ने क्या कहा और पुराने विवाद क्या हैं, पढ़ें रिपोर्ट… पैतृक गांव में अजय के घर की कुछ तस्वीरें… 10 करोड़ की प्रॉपर्टी का खुलासा बिहार शिक्षा सेवा के अधिकारी अजय कुमार सिंह के पैतृक आवास पर 9 घंटे तक चली छापेमारी में EOU की टीम ने 15.50 लाख रुपये नकद और करीब 9.50 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए हैं। इसके अलावा जमीन से जुड़े 11 केवाले (डीड), SBI की पासबुक और 5.50 लाख के आभूषण खरीद की 6 रसीदें भी मिली हैं। परिसर में 2 JCB, 2 ट्रैक्टर, 1 बोलेरो और बड़ा DG सेट भी खड़ा मिला, जिसके कागजात खंगाले जा रहे हैं। कैश को सरकारी ट्रेजरी में जमा कराया गया है और बाकी सामान थाने के मालखाने में रखा जाएगा। उनके पास बरामद संपत्ति का सरकारी मूल्य 5.05 करोड़ है, जबकि बाजार मूल्य करीब 10 करोड़ है। संपत्ति में बड़े भाई की भी हिस्सेदारी कुछ ग्रामीणों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अजय कुमार सिंह के पिता ताराकांत सिंह अपने इलाके में सम्मानित व्यक्ति थे। अजय दो भाई है। बड़ा भाई धर्मेंद्र है। दोनों भाइयों में काफी प्रेम है। अजय जो भी करता है वो अपने बड़े भाई को जरूर बताता है। सूत्रों के अनुसार अजय ने अभी तक जितनी भी संपत्तियां खरीदी है, उसमें बड़े भाई धर्मेंद्र के भी कुछ रुपए लगे हैं। कटिहार में ट्रांसफर के बाद गिट्‌टी-बालू का कारोबार शुरू किया अजय का ट्रांसफर जब कटिहार में हुआ तो उसने शिक्षा विभाग के बिचौलियों और खास वेंडरों के जरिए भारी कमीशन बाजी की। जिससे उसकी बहुत कमाई होने लगी। भागलपुर और खगड़िया में भी निवेश किया। कटिहार में काम करने के दौरान ही दोनों भाइयों ने मिलकर गिट्‌टी, बालू, ट्रैक्टर, चिमनी और सूद पर पैसा लगाने का कारोबार शुरू किया। जिसे ज्यादातर बड़ा भाई ही संभालता है। ग्रामीणों की आर्थिक मदद करता था ग्रामीण बताते हैं कि अजय कुमार सिंह हर साल छठ, दिवाली और होली में गांव आते थे। त्योहार में गरीब ग्रामीणों की रुपयों से मदद भी करते थे। अगर किसी की शादी की बात होती थी तो उसमें भी वो सहयोग करते थे। गांव में घर बनाने वालों को उधार में गिट्टी-बालू उपलब्ध करवाते थे। यह भी एक कारण है जिससे गांव के लोग अजय कुमार के खिलाफ ज्यादा कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों को 2 घंटे तक छापेमारी के बारे में पता नहीं चला EOU की टीम गुरुवार की सुबह साढ़े 8 बजे सबसे पहले अजय के भाई धर्मेंद्र सिंह के सीमेंट-बालू डिपो पर पहुंची थी। वहां एक स्टाफ था। छापेमारी की सूचना के बाद धर्मेंद्र घर से निकल गए। जिसके बाद EOU की टीम 3 गाड़ी से पैतृक आवास पहुंची। साथ में पुलिस फोर्स भी था। गांव के लोगों को लगा कि अजय बड़े अधिकारी हैं, इसलिए सरकारी लोग आए होंगे। करीब साढ़े 10 बजे तक ग्रामीणों को पता ही नहीं था कि छापेमारी हो रही है। जब मीडिया वाले पहुंचे तो पता चला कि अधिक संपत्ति के मामले में आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने छापेमारी की है। जिसके बाद गांव के लोग धीर-धीरे जुटने लगे। किसी भी बाहरी लोगों को घर के आसपास नहीं जाने दिया जा रहा था। हालांकि, शाम 5:30 बजे के करीब जब तक टीम नहीं निकली, ग्रामीण वहीं डटे रहे। आय से करीब 90.04 प्रतिशत अधिक प्रॉपर्टी आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने मामला दर्ज कर विशेष न्यायालय निगरानी से तलाशी ऑर्डर लेकर अजय के 3 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसमें डीएसपी रैंक के अधिकारी शामिल थे। 3 करोड़ 45 लाख 78 हजार 300 रुपए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का सबूत मिले है। यह उनके ज्ञात आय से करीब 90.04 प्रतिशत अधिक है। अजय का अब तक के कार्यकाल में विवाद… प्राचार्य को स्टांप पैड से मारा था बिहार ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन बोर्ड (BBOSE) के डिप्टी डायरेक्टर अजय कुमार सिंह 2025 तक मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) थे। इनका कार्यकाल विवादों से घिरा हुआ है। जिसमें एक मामला कुढ़नी थाना क्षेत्र के करमचंद रामपुर बलड़ा माध्यमिक विद्यालय का है। यहां निरीक्षण के दौरान तत्कालीन DEO अजय और प्राचार्य राकेश कुमार के बीच बहस हुई थी, जो बाद में मारपीट में बदल गई थी। इस घटना में दोनों पक्षों को चोटें आईं। अस्पताल में इलाज के दौरान प्राचार्य राकेश कुमार ने आरोप लगाया था कि डीईओ ने समर्सिबल कार्य और उपस्थिति के नाम पर 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत देने से मना करने पर डीईओ ने स्टांप पैड से उनके चेहरे पर हमला किया और उनके सहयोगियों ने लोहे के माइक से पिटाई की। इस हाथापाई में डीईओ भी टेबल के शीशे से टकराकर घायल हो गए थे। रिश्वत का लगा था आरोप अजय कुमार सिंह की मुजफ्फरपुर में कार्यकाल के दौरान भाजपा विधायक अशोक सिंह के साथ तनातनी भी सुर्खियों में रही थी। विधायक अशोक सिंह मुजफ्फरपुर के पारू क्षेत्र से हैं। अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में डीएम सुब्रत कुमार सेन से लिखित शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधायक अशोक सिंह ने उनके आवास पर आकर नियम विरुद्ध भुगतान का दबाव बनाया और उन्हें धमकी दी। दूसरी ओर, विधायक अशोक सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अजय स्थानीय ठेकेदारों के बकाया भुगतान को लटका रहे थे। विधायक ने यह भी आरोप लगाया था कि अधिकारी रिश्वत के बिना काम नहीं करते, जिससे आम जनता, शिक्षक और ठेकेदार परेशान हैं। उपमुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना और MLC से टकराव मई 2025 में जिला कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति की बैठक के दौरान बिहार के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तत्कालीन डीईओ अजय कुमार सिंह को स्कूलों में हुए विकास कार्यों (बेंच-डेस्क, मरम्मती, समरसेबल आदि) के भुगतान का विवरण 3 दिनों में उपलब्ध कराने का कड़ा आदेश दिया था। आदेश के 20 दिनों बाद भी रिपोर्ट न सौंपने पर विधान पार्षद (MLC) वंशीधर ब्रजवासी ने मई 2025 के अंत में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अजय पर उपमुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था। एमएलसी ब्रजवासी ने करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए बिहार विधान परिषद में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। बिहार ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन बोर्ड (BBOSE) के डिप्टी डायरेक्टर अजय कुमार सिंह महज 21 साल की नौकरी में करीब 10 करोड़ की चल-अचल संपत्ति खड़ी बनाई। पूरी नौकरी के दौरान उन्हें वेतन के रूप में केवल 1.74 करोड़ रुपये मिले थे। जबकि ईओयू ने उनके खिलाफ 3 करोड़ 43 लाख 78 हजार 300 रुपये की आय से अधिक संपत्ति (डीए) का केस दर्ज किया है, जो उनकी आय से 90% अधिक है। अजय कुमार सिंह मूल रूप से बेगूसराय के साहेबपुर कमाल के परोरा गांव के रहने वाले हैं। पहले ये घर काफी साधारण हुआ करता था, जिसे अजय सिंह ने लग्जरी बना दिया। करीब 13 कट्ठे में फैले आलीशान बंगले में राजस्थान के काले संगमरमर और प्रीमियम पत्थरों से सजाया गया है। स्कॉर्पियो-बोलेरो, 3 ट्रैक्टर और 2 जेसीबी हमेशा खड़ी रहती है। एशो-आराम की सभी चीजें उपलब्ध है। गांव में पैतृक संपत्ति के अलावा 50 बीघा से अधिक उपजाऊ-व्यवसायिक जमीन है। ये संपत्तियां अजय ने तब से खरीदनी शुरू की जब वो मुंगेर में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के पद पर तैनात थे। आज की तारीख में अजय की यहां इतनी प्रॉपर्टी है, जिसका हिसाब नहीं है। आय से अधिक संपत्ति पर EOU की टीम ने गुरुवार को अजय के बेगूसराय और पटना समेत तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। अजय का फैमिली बैग्राउंड क्या है, सरकारी सेवा में कब आए, संपत्ति बनाने में भाई का कितना हाथ है, ग्रामीण ने क्या कहा और पुराने विवाद क्या हैं, पढ़ें रिपोर्ट… पैतृक गांव में अजय के घर की कुछ तस्वीरें… 10 करोड़ की प्रॉपर्टी का खुलासा बिहार शिक्षा सेवा के अधिकारी अजय कुमार सिंह के पैतृक आवास पर 9 घंटे तक चली छापेमारी में EOU की टीम ने 15.50 लाख रुपये नकद और करीब 9.50 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए हैं। इसके अलावा जमीन से जुड़े 11 केवाले (डीड), SBI की पासबुक और 5.50 लाख के आभूषण खरीद की 6 रसीदें भी मिली हैं। परिसर में 2 JCB, 2 ट्रैक्टर, 1 बोलेरो और बड़ा DG सेट भी खड़ा मिला, जिसके कागजात खंगाले जा रहे हैं। कैश को सरकारी ट्रेजरी में जमा कराया गया है और बाकी सामान थाने के मालखाने में रखा जाएगा। उनके पास बरामद संपत्ति का सरकारी मूल्य 5.05 करोड़ है, जबकि बाजार मूल्य करीब 10 करोड़ है। संपत्ति में बड़े भाई की भी हिस्सेदारी कुछ ग्रामीणों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अजय कुमार सिंह के पिता ताराकांत सिंह अपने इलाके में सम्मानित व्यक्ति थे। अजय दो भाई है। बड़ा भाई धर्मेंद्र है। दोनों भाइयों में काफी प्रेम है। अजय जो भी करता है वो अपने बड़े भाई को जरूर बताता है। सूत्रों के अनुसार अजय ने अभी तक जितनी भी संपत्तियां खरीदी है, उसमें बड़े भाई धर्मेंद्र के भी कुछ रुपए लगे हैं। कटिहार में ट्रांसफर के बाद गिट्‌टी-बालू का कारोबार शुरू किया अजय का ट्रांसफर जब कटिहार में हुआ तो उसने शिक्षा विभाग के बिचौलियों और खास वेंडरों के जरिए भारी कमीशन बाजी की। जिससे उसकी बहुत कमाई होने लगी। भागलपुर और खगड़िया में भी निवेश किया। कटिहार में काम करने के दौरान ही दोनों भाइयों ने मिलकर गिट्‌टी, बालू, ट्रैक्टर, चिमनी और सूद पर पैसा लगाने का कारोबार शुरू किया। जिसे ज्यादातर बड़ा भाई ही संभालता है। ग्रामीणों की आर्थिक मदद करता था ग्रामीण बताते हैं कि अजय कुमार सिंह हर साल छठ, दिवाली और होली में गांव आते थे। त्योहार में गरीब ग्रामीणों की रुपयों से मदद भी करते थे। अगर किसी की शादी की बात होती थी तो उसमें भी वो सहयोग करते थे। गांव में घर बनाने वालों को उधार में गिट्टी-बालू उपलब्ध करवाते थे। यह भी एक कारण है जिससे गांव के लोग अजय कुमार के खिलाफ ज्यादा कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों को 2 घंटे तक छापेमारी के बारे में पता नहीं चला EOU की टीम गुरुवार की सुबह साढ़े 8 बजे सबसे पहले अजय के भाई धर्मेंद्र सिंह के सीमेंट-बालू डिपो पर पहुंची थी। वहां एक स्टाफ था। छापेमारी की सूचना के बाद धर्मेंद्र घर से निकल गए। जिसके बाद EOU की टीम 3 गाड़ी से पैतृक आवास पहुंची। साथ में पुलिस फोर्स भी था। गांव के लोगों को लगा कि अजय बड़े अधिकारी हैं, इसलिए सरकारी लोग आए होंगे। करीब साढ़े 10 बजे तक ग्रामीणों को पता ही नहीं था कि छापेमारी हो रही है। जब मीडिया वाले पहुंचे तो पता चला कि अधिक संपत्ति के मामले में आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने छापेमारी की है। जिसके बाद गांव के लोग धीर-धीरे जुटने लगे। किसी भी बाहरी लोगों को घर के आसपास नहीं जाने दिया जा रहा था। हालांकि, शाम 5:30 बजे के करीब जब तक टीम नहीं निकली, ग्रामीण वहीं डटे रहे। आय से करीब 90.04 प्रतिशत अधिक प्रॉपर्टी आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने मामला दर्ज कर विशेष न्यायालय निगरानी से तलाशी ऑर्डर लेकर अजय के 3 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसमें डीएसपी रैंक के अधिकारी शामिल थे। 3 करोड़ 45 लाख 78 हजार 300 रुपए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का सबूत मिले है। यह उनके ज्ञात आय से करीब 90.04 प्रतिशत अधिक है। अजय का अब तक के कार्यकाल में विवाद… प्राचार्य को स्टांप पैड से मारा था बिहार ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन बोर्ड (BBOSE) के डिप्टी डायरेक्टर अजय कुमार सिंह 2025 तक मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) थे। इनका कार्यकाल विवादों से घिरा हुआ है। जिसमें एक मामला कुढ़नी थाना क्षेत्र के करमचंद रामपुर बलड़ा माध्यमिक विद्यालय का है। यहां निरीक्षण के दौरान तत्कालीन DEO अजय और प्राचार्य राकेश कुमार के बीच बहस हुई थी, जो बाद में मारपीट में बदल गई थी। इस घटना में दोनों पक्षों को चोटें आईं। अस्पताल में इलाज के दौरान प्राचार्य राकेश कुमार ने आरोप लगाया था कि डीईओ ने समर्सिबल कार्य और उपस्थिति के नाम पर 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत देने से मना करने पर डीईओ ने स्टांप पैड से उनके चेहरे पर हमला किया और उनके सहयोगियों ने लोहे के माइक से पिटाई की। इस हाथापाई में डीईओ भी टेबल के शीशे से टकराकर घायल हो गए थे। रिश्वत का लगा था आरोप अजय कुमार सिंह की मुजफ्फरपुर में कार्यकाल के दौरान भाजपा विधायक अशोक सिंह के साथ तनातनी भी सुर्खियों में रही थी। विधायक अशोक सिंह मुजफ्फरपुर के पारू क्षेत्र से हैं। अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में डीएम सुब्रत कुमार सेन से लिखित शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधायक अशोक सिंह ने उनके आवास पर आकर नियम विरुद्ध भुगतान का दबाव बनाया और उन्हें धमकी दी। दूसरी ओर, विधायक अशोक सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अजय स्थानीय ठेकेदारों के बकाया भुगतान को लटका रहे थे। विधायक ने यह भी आरोप लगाया था कि अधिकारी रिश्वत के बिना काम नहीं करते, जिससे आम जनता, शिक्षक और ठेकेदार परेशान हैं। उपमुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना और MLC से टकराव मई 2025 में जिला कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति की बैठक के दौरान बिहार के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तत्कालीन डीईओ अजय कुमार सिंह को स्कूलों में हुए विकास कार्यों (बेंच-डेस्क, मरम्मती, समरसेबल आदि) के भुगतान का विवरण 3 दिनों में उपलब्ध कराने का कड़ा आदेश दिया था। आदेश के 20 दिनों बाद भी रिपोर्ट न सौंपने पर विधान पार्षद (MLC) वंशीधर ब्रजवासी ने मई 2025 के अंत में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अजय पर उपमुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था। एमएलसी ब्रजवासी ने करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए बिहार विधान परिषद में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।  

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