Ganga Expressway Road Damage: उन्नाव के दही क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे की हालत ने निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले तीन दिनों में करीब 13 किलोमीटर के दायरे में एक्सप्रेसवे छह अलग-अलग जगहों पर धंस चुका है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बशीरतगंज और सराय कटियान के बीच बने पुल पर तीन दिन के भीतर दोबारा सड़क धंसने की समस्या सामने आई।
लगातार हो रही बारिश के बीच सड़क धंसने की घटनाओं ने निर्माण एजेंसी की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब एजेंसी को पता चला है कि इस हिस्से में बने करीब आधा दर्जन पुलों पर पर्याप्त ड्रेनेज सिस्टम ही नहीं है। बुधवार को मौसम साफ होने के बाद पुलों पर पानी की निकासी की व्यवस्था बनाने का काम शुरू किया गया।
छह जगह सड़क धंसी, पुल पर दोबारा बनी समस्या
गंगा एक्सप्रेसवे के दुर्गाखेड़ा, बशीरतगंज और ओरहर गांव के आसपास करीब 13 किलोमीटर के हिस्से में पिछले तीन दिनों के दौरान कई जगह सड़क धंसने की घटनाएं सामने आईं। बशीरतगंज के पास किमी 422 और सराय कटियान के पास किमी 421 पर बने पुल की सड़क भी प्रभावित हुई। मरम्मत के बावजूद एक ही स्थान पर दोबारा सड़क धंसने से यह सवाल उठने लगा कि आखिर पानी की निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई थी।
पुलों पर अब बनाया जा रहा ड्रेनेज सिस्टम
बुधवार को बारिश थमने के बाद निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने पुलों पर ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने का काम शुरू किया। कर्मचारियों के मुताबिक, पानी की निकासी के लिए पुल के डेक और किनारों पर ड्रेन पाइप लगाए जा रहे हैं। नीचे चैंबर और वाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्था भी तैयार की जा रही है, ताकि बारिश का पानी एक जगह जमा न हो। यानी जिस हिस्से में सड़क पहले ही बारिश के पानी के कारण प्रभावित हो चुकी है, वहां अब जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।
बारिश रुकी तो थमा धंसाव, लेकिन खतरा अभी बाकी
बुधवार को बारिश थमने के बाद सड़क धंसने का सिलसिला फिलहाल रुक गया। इसके बाद एजेंसी के कर्मचारी क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत में जुट गए। कई स्थानों पर सड़क के किनारे कट चुकी मिट्टी और ढलानों को दोबारा मजबूत किया जा रहा है। दरोगाखेड़ा गांव के पास किमी 423 पर सड़क किनारे करीब 10 मीटर हिस्से में मिट्टी कटने की बात भी सामने आई है। ऐसे में बारिश दोबारा होने पर यहां भी समस्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
प्रतिबंधित मिट्टी के इस्तेमाल का आरोप भी उठा
इस पूरे मामले के बीच एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल की गई मिट्टी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बशीरतगंज के आसपास बसहा झील से कथित तौर पर प्रतिबंधित काली मिट्टी निकालकर सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई थी। एक्सप्रेसवे के किनारे भी बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, सड़क धंसने की मौजूदा घटनाओं का इन आरोपों से सीधा संबंध अभी आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है। इसलिए इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
निर्माण एजेंसी बोली-टीम लगातार मौके पर
गंगा एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर आरके मिश्रा ने कहा कि एक्सप्रेसवे पर आवागमन सुचारु बनाए रखने के लिए टीम लगातार फील्ड में काम कर रही है। मौसम की स्थिति को देखते हुए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 13 किलोमीटर के हिस्से में छह जगह सड़क धंसने और पुलों पर जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आने के बाद इन्हें स्थायी रूप से कैसे दूर किया जाएगा।

