ग्वालियर के मुरार तहसील के सुपावली गांव में 3.711 हेक्टेयर निजी भूमि पर भू-माफिया और राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध उत्खनन पट्टा स्वीकृत कराए जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर प्रकरण वर्तमान में कलेक्टर कोर्ट (ग्वालियर) में विचाराधीन है। पर खनन माफिया से मिलीभगत के चलते राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने अदालत में केस लंबित होने के बावजूद फर्जीवाड़े के जरिए पट्टा जारी कर दिया गया। राजस्व कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लंबित केस को छुपाकर किए गए उत्खनन पट्टा स्वीकृत पर पीड़ित पक्ष ने गुरूवार को कलेक्टरेट पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने कलेक्टर से फर्जी तरीके से जारी उत्खनन पट्टा निरस्त करने की मांग की है। कलेक्टर ने तत्काल मामले की गंभीरता से जांच करने की बात कही है। हाल ही में बिलौआ में खदानों को लेकर वैसे ही हाईकोर्ट सख्त है ऐसे में इस शिकायत को लेकर प्रशासनिक अधिकारी सकते में हैं। 1940 से 1970 तक दर्ज थी निजी जमीन शहर के गोला का मंदिर क्षेत्र स्थित महावीर कॉलोनी निवासी शिकायतकर्ता संदीप लहारिया ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर दिए आवेदन में बताया कि ग्राम सुपावली स्थित सर्वे क्रमांक 6/3 (रकबा 3.711 हेक्टेयर) भूमि उनके दादा स्व. भरोसे लाल शर्मा के नाम पर दर्ज और आधिपत्य में थी। पर वर्ष 1940 से लेकर 1970 तक यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में उनके दादा के निजी नाम पर ही दर्ज रही। हालांकि, बाद में राजस्व विभाग द्वारा बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के इस जमीन को शासकीय ‘चरनोई’ श्रेणी में दर्ज कर दिया। राजस्व अभिलेखों में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि किस आदेश के तहत निजी जमीन को चरनोई घोषित किया गया। कलेक्टर कोर्ट में केस लंबित संदीप द्वारा की गई शिकायत में बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड की इस गलती के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। 29 अगस्त 2019 को संभागायुक्त (आयुक्त ग्वालियर संभाग) ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रकरण को अंतिम निर्णय के लिए कलेक्टर कोर्ट ग्वालियर के समक्ष भेजा था। वर्तमान स्थिति में यह प्रकरण पेंडिंग है। अब आरोप है कि जब प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में विचाराधीन था, उसी दौरान राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से अदालत में केस पेंडिंग होने की बात छिपाकर 13 अप्रैल 2022 को खनन पट्टा स्वीकृत कर दिया गया। सूचना दिए बिना सीमांकन करा दिया, पीड़ित ने लगाई गुहार इस मामले में एक पक्ष से संदीप लहरिया ने बताया कि उन्हें इस पट्टे की जानकारी आरटीआई (RTI) के जरिए मिली, जिसके बाद उन्होंने लगातार आपत्तियां दर्ज कराईं। लेकिन हाल ही में राजस्व कर्मचारियों ने पीड़ित को सूचित किए बिना भूमि पर सीमांकन की कार्रवाई कर दी, जिससे पट्टा निष्पादित होने का पता चला। पीड़ित ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि धोखाधड़ी और तथ्यों को छिपाकर 13 अप्रैल 2022 को जारी किए गए खनन पट्टे के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त व शून्य घोषित किया जाए। साथ ही इस पूरे मामले की जांच की जाए। मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी जमीन जिसके मालिकाना हक का मामला कलेक्टर कोर्ट में लंबित है। उस जमीन पर उत्खनन पट्टा कैसे जारी किया जा सकता है। इसमें अफसरों का साफ मिली भगत नजर आ रही है। जिसकी शिकायत मेरे द्वारा कलेक्टर ग्वालियर से की गई है। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही उत्खनन पट्टा जारी करने पर माइनिंग विभाग में भी शिकायत की है। इस मामले में एसडीएम नरेश गुप्ता ने बताया कि जमीन मालिक संदीप लहरिया द्वारा शिकायती आवेदन देकर जमीन का पट्टा किसी अन्य व्यक्ति के नाम से करने की शिकायत की है, इस मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और तहसीलदार को जांच के लिए मौके पर भेजा है। तहसीलदार द्वारा जो भी जांच की रिपोर्ट दी जाएगी उसके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

