इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है। कि वेश्यालय में ग्राहक के रूप में जाने वाले व्यक्ति पर अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की पीठ ने कहा कि अपनी व्यक्तिगत संतुष्टि के लिए पैसे देना अधिनियम के तहत परिभाषित ‘वेश्यावृत्ति के उद्देश्य’ के दायरे में नहीं आता, क्योंकि इसके लिए व्यावसायिक शोषण का होना आवश्यक है। यह मामला यूपी के गाजियाबाद से जुड़ा है। पुलिस ने चार्जशीट में बनाया आरोपी गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में 31 दिसंबर 2023 को पुलिस द्वारा एक घर पर की गई छापेमारी के दौरान आवेदक को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने चार्जशीट दायर कर आवेदक को भी आरोपी बनाया था, जबकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आवेदक महज एक ग्राहक था और केवल ग्राहक होने के नाते उस पर इन धाराओं के तहत अपराध नहीं बनता। हाईकोर्ट ने कहा आवेदक केवल पैसे देकर अपनी व्यक्तिगत वासना को संतुष्ट करने आया था, न कि वेश्यावृत्ति के व्यवसाय को चलाने या उसका प्रबंधन करने के लिए। इस आधार पर, हाई कोर्ट ने इस कार्यवाही को न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए गाजियाबाद की अदालत में आवेदक के खिलाफ चल रहे केस, 14 जनवरी 2024 की चार्जशीट और 25 अप्रैल 2024 के समन आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। पुलिस ने 2 स्थानों पर मारा था छापा गाजियाबाद के शालीमार गार्डन पुलिस ने 31 दिसंबर 2023 को जरिये मुखबिर एसीपी शालीमार गार्डन को सूचना प्राप्त हुई कि तुलसी निकेतन थाना टीला मोड़ क्षेत्र तथा डीएल एफ भोपुरा के सामने थाना शालीमार गार्डन क्षेत्र में अनैतिक देह व्यापार किया जा रहा है। मौके पर पर्याप्त पुलिस बल के साथ बारी-बारी से छापेमारी की गयी तो तुलसी निकेतन थाना टीला मोड़ क्षेत्र से 5 महिलाएं व 1 युवक आपत्तिजनक अवस्था में तथा डीएल एफ भोपुरा के सामने थाना शालीमार गार्डन क्षेत्र से 9 महिलाएं एवं 7 पुरूष एक मकान में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़े थे, जिनसे आपत्तिजनक सामग्री व 26,100 रुपये बरामद किये गए।

