मुनि श्री पुनीत सागर बोले-एकाग्र मन मोक्ष के लिए जरुरी:प्रभु दरबार में नृत्य करना भी भक्ति का तरीका, जैन समाज का तीन दिवसीय आयोजन

मुनि श्री पुनीत सागर बोले-एकाग्र मन मोक्ष के लिए जरुरी:प्रभु दरबार में नृत्य करना भी भक्ति का तरीका, जैन समाज का तीन दिवसीय आयोजन

श्री दिगंबर जैन आदिश्वरधाम नवोदय तीर्थ में चल रहे समयोपदेश वर्षायोग 2026 के तहत भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। इस दौरान मुनि श्री 108 आगम सागर जी महाराज और मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज के सानिध्य में पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्यक्रम हुए। बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6.30 बजे हुई। भगवान पार्श्वनाथ को पांडुशिला में विराजमान कर अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद इंद्र-इंद्राणियों और अन्य पात्रों ने भक्ति संगीत के साथ मोक्ष कल्याणक के अर्घ्य चढ़ाए। निर्वाण लाडू चढ़ाने का अवसर गुढ़ियारी जैन समाज को मिला। इस दौरान नवोदय तीर्थ की त्रिकाल चौबीसी में प्रतिमाएं विराजमान करने का कार्यक्रम भी हुआ। जीवन में संयम को अपनाने की बात मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने पूरे मन से एकाग्र होकर कठिन तप किया और मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि दान, पूजा, विद्या और तप के जरिए धर्म के प्रति लोगों में रुचि बढ़ती है। उन्होंने कहा कि प्रभु के दरबार में नृत्य करना भी भक्ति का एक तरीका है। मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने दीक्षा के बारे में कहा कि इसका उद्देश्य काम, क्रोध, लोभ, मोह और माया जैसे विकारों को धीरे-धीरे कम करना है। उन्होंने समाज के लोगों से धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने और अपने जीवन में संयम को अपनाने की बात कही। तीन दिनों तक अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम यह आयोजन भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक, मुकुट सप्तमी महामहोत्सव और दोनों मुनिराजों के 23वें दीक्षा दिवस के अवसर पर किया जा रहा है। तीन दिवसीय आयोजन में अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम रखे गए हैं, जिनमें समाज के लोग शामिल हो रहे हैं।

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