शहर में आयोजित ऑल इंडिया रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट में देशभर के दिग्गज खिलाड़ी अपना हुनर दिखा रहे हैं। इस आयोजन के बीच भारतीय टेबल टेनिस टीम के कोच प्रयाग अग्रवाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि, इसी रैंकिंग टूर्नामेंट के आधार पर भारतीय टीम का चयन होता है, जो आगे जाकर वर्ल्ड और एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीतती है। हालांकि, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि, यूपी के 75 में से सिर्फ 20-25 जिलों में ही टेबल टेनिस खेला जा रहा है और वहां भी योग्य कोचेस व इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। ऑल इंडिया रैंकिंग से होता है टीम इंडिया का चयन कोच प्रयाग अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह केवल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता नहीं, बल्कि नेशनल रैंकिंग टूर्नामेंट है। देश भर में इस तरह की 5 ऑल इंडिया रैंकिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इन सभी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर ही नेशनल रैंकिंग बनती है, जिसके दम पर उन्हें भारतीय टेबल टेनिस टीम में जगह मिलती है और वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में 4 और एशियन में जीते 6 मेडल भारतीय टेबल टेनिस टीम के हालिया प्रदर्शन पर बात करते हुए कोच ने बताया कि, देश के टेबल टेनिस का स्तर वैश्विक स्तर पर बहुत तेजी से सुधरा है। हाल ही में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने 4 मेडल पर कब्जा जमाया, जबकि एशियन चैंपियनशिप में रिकॉर्ड 6 मेडल देश की झोली में आए। एशियन चैंपियनशिप में भारत की युवा खिलाड़ी दिव्यांशी भौमिक ने ऐतिहासिक खेल दिखाते हुए एशियन चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। लखनऊ का लक्ष्य कुमार इंग्लैंड में खेलेगा वर्ल्ड चैंपियनशिप उत्तर प्रदेश की प्रतिभाओं का जिक्र करते हुए कोच ने बताया कि लखनऊ के रहने वाले लक्ष्य कुमार ने एक नया कीर्तिमान रचा है। लक्ष्य का चयन एशियन टीम में हुआ है और वे इकलौते ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं जो एशिया की टीम का हिस्सा बने हैं। लक्ष्य अब अक्टूबर 2026 में इंग्लैंड में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में एशियन टीम का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। यूपी के 75 में से सिर्फ 25 जिलों में टेबल टेनिस; कोचेस की भारी कमी
राज्य में टेबल टेनिस के भविष्य और जमीनी हकीकत पर कोच प्रयाग अग्रवाल ने चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में खेल के प्रति बच्चों में जबरदस्त रुचि है, लेकिन संसाधनों की भारी कमी है। प्रशिक्षक नहीं: प्रदेश के 75 जिलों में से करीब 20 से 25 जिलों में ही टेबल टेनिस ढंग से खेला जाता है, लेकिन वहां बच्चों को तराशने के लिए पेशेवर और योग्य कोच मौजूद नहीं हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव: कई जगह बच्चों के पास प्रतिभा है, पर उनके पास ट्रेनिंग के लिए न तो बेहतर हॉल हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेबल्स और मैटिंग। सरकार से मांग केवल एडहॉक नियुक्ति से नहीं, सुविधाएं देने से बनेंगे चैंपियन
‘खेलो इंडिया’ और सरकारी प्रयासों पर बोलते हुए कोच ने माना कि शासन ने कुछ सेंटर्स पर एडहॉक (अस्थायी) कोचेस की तैनाती शुरू की है, लेकिन यह नाकाफी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को जल्द से जल्द हर जिले में स्थायी कोचेस तैनात करने चाहिए। इसके साथ ही केवल कोच रखने से काम नहीं चलेगा; उन सेंटर्स पर गुणवत्तापूर्ण खेल उपकरण, मैटिंग और सर्वसुविधायुक्त हॉल भी मुहैया कराने होंगे, तभी यूपी के छोटे शहरों से निकलकर बच्चे देश और दुनिया में नाम रोशन कर सकेंगे।

