यूआईटी ने हाईवे-48 पर की पद्मिनी विहार योजना लॉन्च:663 भूखंड ई-लॉटरी से होंगे आवंटित, हर आय वर्ग के लिए प्लॉट

यूआईटी ने हाईवे-48 पर की पद्मिनी विहार योजना लॉन्च:663 भूखंड ई-लॉटरी से होंगे आवंटित, हर आय वर्ग के लिए प्लॉट

चित्तौड़गढ़ में नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने उदयपुर-भीलवाड़ा नेशनल हाईवे-48 पर पद्मिनी विहार आवासीय योजना शुरू की है। इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि यहां पहले से चौड़ी सड़कें, पार्क, खेल मैदान, हरियाली, सार्वजनिक सुविधाएं, व्यावसायिक क्षेत्र और भविष्य के लिए चिकित्सा सुविधा का प्रावधान रखा गया है। यानी लोगों को सिर्फ प्लॉट नहीं, बल्कि पहले से प्लान किया हुआ आवासीय माहौल मिलेगा। विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने योजना का शुभारंभ किया हैं। प्रोजेक्ट के तहत कुल 663 आवासीय भूखंड ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटित किए जाएंगे। यूआईटी के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना आने वाले सालों में चित्तौड़गढ़ के शहरी विस्तार का नया केंद्र बन सकती है। हाईवे से सीधे जुड़ा होगा नया आवासीय क्षेत्र पद्मिनी विहार योजना नरपत की खेड़ी में उदयपुर-भीलवाड़ा नेशनल हाईवे-48 पर विकसित की जा रही है। करीब 40.84 हेक्टेयर (4.08 लाख वर्गमीटर) क्षेत्र में फैलने वाली यह यूआईटी की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक होगी। शहर के बीच जगह कम होने और बाहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते विकास को देखते हुए इस जगह को चुना किया गया है। नेशनल हाईवे से सीधा जुड़ाव होने के कारण यहां से चित्तौड़गढ़, कपासन, भीलवाड़ा और उदयपुर तक पहुंच आसान रहेगी। योजना के आसपास बनने वाले ईएसआईसी अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से फ्यूचर में इस क्षेत्र की उपयोगिता और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले सालों में शहर का विस्तार इसी दिशा में तेजी से होगा। पहले तैयार होगा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर, फिर बसेंगे लोग यूआईटी ने इस योजना को पारंपरिक कॉलोनी की तरह नहीं बनाया है। आमतौर पर पहले प्लॉट बिकते हैं, मकान बनते हैं और बाद में सड़क, पार्क या दूसरी सुविधाओं का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन पद्मिनी विहार में शुरुआत से ही पूरी प्लानिंग तैयार की गई है। योजना में 60, 30 और 24 मीटर चौड़ी मास्टर प्लान सड़कें रहेंगी, जबकि अंदर 30, 18, 12 और 9 मीटर चौड़ी सड़कें बनाई जाएगी। करीब 9 प्रतिशत क्षेत्र सार्वजनिक सुविधाओं और 5 प्रतिशत क्षेत्र पार्कों के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा खेल मैदान, हरित क्षेत्र, पौधारोपण, जलापूर्ति, ड्रेनेज सिस्टम और व्यावसायिक भूखंड भी योजना का हिस्सा होंगे। इसका उद्देश्य ऐसा आवासीय क्षेत्र तैयार करना है। जहां लोगों को शुरुआत से ही बेहतर सुविधाएं मिल सकें। छोटे प्लॉट से बड़े प्लॉट तक उपलब्ध रहेंगे पद्मिनी विहार योजना में सिर्फ बड़े प्लॉट नहीं हैं। यूआईटी ने अलग-अलग आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए पांच श्रेणियों में भूखंड तैयार किए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 45 वर्गमीटर (करीब 484 वर्गफीट) तक के 219 प्लॉट उपलब्ध हैं। अल्प आय वर्ग (LIG) के लिए 45 से 75 वर्गमीटर (करीब 484 से 807 वर्गफीट) तक के 256 प्लॉट रखे गए हैं। मध्यम आय वर्ग-ए (MIG-A) के लिए 75 से 120 वर्गमीटर (करीब 807 से 1,291 वर्गफीट) के 89 प्लॉट, मध्यम आय वर्ग-बी (MIG-B) के लिए 120 से 220 वर्गमीटर (करीब 1,291 से 2,368 वर्गफीट) के 84 प्लॉट और उच्च आय वर्ग (HIG) के लिए 220 वर्गमीटर से बड़े 15 प्लॉट उपलब्ध हैं। यानी छोटा घर बनाने वाले परिवारों से लेकर बड़े मकान की योजना रखने वालों तक सभी के लिए ऑप्शन मौजूद हैं। रियायती दर पर भी होंगे भूखंड योजना की मूल आरक्षित दर 14 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तय की गई है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर और अल्प आय वर्ग को राहत देने के लिए विशेष छूट भी दी गई है। ईडब्ल्यूएस वर्ग को 7 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर और एलआईजी वर्ग को 11,200 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से भूखंड मिलेंगे। एमआईजी-ए के लिए मूल दर लागू रहेगी, जबकि एमआईजी-बी और एचआईजी वर्ग के लिए क्रमशः 105 और 110 प्रतिशत दर तय की गई है। अगर किसी को कॉर्नर प्लॉट मिलता है तो उसे 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देनी होगी। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बताया कि योजना का उद्देश्य कम और मध्यम आय वर्ग के लोगों को भी अच्छी लोकेशन पर किफायती दर में प्लॉट उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन आवेदन, ई-लॉटरी से होगा आवंटन योजना में आवेदन सिर्फ राजस्थान के मूल निवासी कर सकेंगे और आवेदक की आयु कम से कम 18 साल होना जरूरी होगी। आवेदन शुल्क दो हजार रुपये रखा गया है। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होंगे और एक परिवार सिर्फ एक ही कैटिगरी में आवेदन कर सकेगा। 18 अगस्त से शुरू हो चुका है जो 30 सितंबर तक आवेदन किए जा सकेंगे, जबकि 18 नवंबर को ई-लॉटरी के जरिए आवंटन किया गया। सफल आवेदकों को तय समय में राशि जमा करनी होगी। भूखंड 99 साल की लीज या नियमानुसार फ्रीहोल्ड पट्टे पर दिए जाएंगे। सात साल के अंदर भवन निर्माण करना जरूरी होगा, जबकि शुरुआती दस सालों तक भूखंड का सामान्य ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। जनप्रतिनिधियों ने बोले- यह सिर्फ योजना नहीं, शहर के भविष्य की तैयारी विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा- चित्तौड़गढ़ तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को योजनाबद्ध आवासीय क्षेत्र की जरूरत महसूस हो रही थी। उन्होंने कहा कि पद्मिनी विहार आम लोगों के लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराने के साथ शहर के विस्तार को नई दिशा देगा। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बताया कि योजना को फ्यूचर की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने और लोगों को बेहतर सुविधा देने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि अगर योजना तय समय पर विकसित होती है तो आने वाले सालों में पद्मिनी विहार चित्तौड़गढ़ का सबसे व्यवस्थित और आधुनिक आवासीय क्षेत्र बन सकता है।

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