भारत-नेपाल तनाव के बीच बड़ा डिप्लोमैटिक मूव, आर्मी चीफ सेठ ने PM शाह से की बातचीत

भारत-नेपाल तनाव के बीच बड़ा डिप्लोमैटिक मूव, आर्मी चीफ सेठ ने PM शाह से की बातचीत

India Nepal Defence Relations: भारत के आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को काठमांडू में नेपाल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात की। दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में तनाव के बीच दोनों पक्षों ने आपसी मुद्दों और सैन्य संबंधों को मजबूत करने को लेकर चर्चा की। बालेंद्र शाह ने भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के संकेत भी दिए हैं।

नेपाली आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिगदेल के निमंत्रण पर नेपाल की चार दिवसीय यात्रा पर आए जनरल सेठ ने सिंह दरबार में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के कार्यालय में यह बैठक की। इस दौरान नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, बातचीत आपसी हित के मामलों और द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित थी।

तनाव के माहौल में यह दौरा

जनरल सेठ का यह दौरा भारत-नेपाल संबंधों में तनाव के बीच हो रहा है। लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के संबंधों में तल्खी है। भारत का कहना है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं, जबकि नेपाल ने इन पर अपना दावा किया है। बालेंद्र शाह ने मई में संसद में कहा था कि काठमांडू सीमा मुद्दे पर न केवल भारत के साथ, बल्कि चीन और यूके के साथ भी बातचीत कर रहा है। इसके बाद नई दिल्ली ने सीमा विवाद को सुलझाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया।

पीएम बालेंद्र शाह ने दिए संकेत

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद नई दिल्ली के साथ संबंध और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने का संकेत दिया है। इस महीने की शुरुआत में उन्होंने भारतीय राजदूत श्रीवास्तव के साथ अपनी पहली आमने-सामने की बैठक की और भारत के साथ नेपाल के “ऐतिहासिक संबंधों” के महत्व पर जोर दिया।

नेपाली आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज का दौरा

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने कहा कि जनरल सेठ ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर “सौहार्दपूर्ण और सार्थक” चर्चा की। जनरल सेठ ने शिवपुरी स्थित नेपाली आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज का भी दौरा किया, जहां उन्होंने फैकल्टी और छात्र अधिकारियों के साथ पेशेवर सैन्य शिक्षा और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

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