गयाजी के रजिस्ट्री ऑफिस कैंपस में मंगलवार को उस समय माहौल गर्म हो गया, जब दस्तावेज नवीस संघ (गया शाखा) के बैनर तले डीड राइटरों ने सरकार की नई पेपरलेस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संघ ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और सरकार से आग्रह किया कि पुरानी पेपर-बेस्ड व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी हड़ताल पर नहीं हैं, लेकिन नई पेपरलेस प्रणाली के कारण कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इस नई व्यवस्था में आधार सत्यापन और ओटीपी आधारित प्रक्रिया लागू की गई है, जिसे लेकर आम लोगों और जमीन के खरीदार-विक्रेताओं के बीच भारी अविश्वास व डर का माहौल है। हाल ही में जहानाबाद में ओटीपी साझा करने के बाद बैंक खाते से लाखों रुपये उड़ जाने की घटना ने लोगों के मन में डर और गहरा कर दिया है। इसी साइबर फ्रॉड के खौफ से पक्षकार रजिस्ट्री दफ्तर आने से कतरा रहे हैं। डीड राइटर्स बोले- बिना हस्ताक्षर और रसीद के कैसे हो काम डीड राइटरों ने कमियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई प्रणाली में न तो दस्तावेजों पर पक्षकारों व गवाहों के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ठीक से हो पा रहे हैं और ना ही पक्षकारों को पैसों के लेनदेन की कोई ठोस रिसीविंग मिल पा रही है। बिना किसी स्पष्ट पहचान सत्यापन के केवल डिजिटल माध्यम पर भरोसा करना जोखिम भरा साबित हो रहा है। प्रतिदिन करीब 1 करोड़ के राजस्व का नुकसान कामकाज ठप होने से न केवल डीड राइटर और पक्षकार परेशान हैं, बल्कि सरकार को भी भारी आर्थिक चपत लग रही है। संघ का दावा है कि इस अव्यवस्था के कारण अकेले गया शाखा से ही रोजाना करीब 1 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व (रजिस्ट्री शुल्क) का नुकसान हो रहा है। शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का ऐलान दस्तावेज नवीस संघ ने साफ कर दिया है कि वे न तो पूरी तरह पेपरलेस प्रणाली को स्वीकार करेंगे और न ही वर्तमान अव्यवस्था को सहेंगे। जब तक पुरानी सुगम व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ‘नई व्यवस्था से जनता परेशान है, रोज एक करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान’ वीरेंद्र सिंह (अध्यक्ष, दस्तावेज नवीस संघ, गया शाखा) का कहना है कि हम हड़ताल पर नहीं हैं, लेकिन दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है क्योंकि पक्षकार खुद नहीं आ रहे हैं। नई व्यवस्था से जनता परेशान है और गया से ही प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि पुरानी व्यवस्था को ही वापस लाया जाए। राकेश कुमार (सचिव, दस्तावेज नवीस संघ, गया शाखा ने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था में व्यावहारिक खामियां बहुत हैं। आधार और ओटीपी देने से लोग डर रहे हैं। जहानाबाद में ओटीपी देने के बाद खाते से 4 लाख रुपये गायब होने की घटना से लोग सहमे हैं। बिना हस्ताक्षर और रिसीविंग के काम करना संभव नहीं है, इसलिए पुरानी पेपर-बेस्ड व्यवस्था ही बहाल होनी चाहिए। गयाजी के रजिस्ट्री ऑफिस कैंपस में मंगलवार को उस समय माहौल गर्म हो गया, जब दस्तावेज नवीस संघ (गया शाखा) के बैनर तले डीड राइटरों ने सरकार की नई पेपरलेस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संघ ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और सरकार से आग्रह किया कि पुरानी पेपर-बेस्ड व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी हड़ताल पर नहीं हैं, लेकिन नई पेपरलेस प्रणाली के कारण कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इस नई व्यवस्था में आधार सत्यापन और ओटीपी आधारित प्रक्रिया लागू की गई है, जिसे लेकर आम लोगों और जमीन के खरीदार-विक्रेताओं के बीच भारी अविश्वास व डर का माहौल है। हाल ही में जहानाबाद में ओटीपी साझा करने के बाद बैंक खाते से लाखों रुपये उड़ जाने की घटना ने लोगों के मन में डर और गहरा कर दिया है। इसी साइबर फ्रॉड के खौफ से पक्षकार रजिस्ट्री दफ्तर आने से कतरा रहे हैं। डीड राइटर्स बोले- बिना हस्ताक्षर और रसीद के कैसे हो काम डीड राइटरों ने कमियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई प्रणाली में न तो दस्तावेजों पर पक्षकारों व गवाहों के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ठीक से हो पा रहे हैं और ना ही पक्षकारों को पैसों के लेनदेन की कोई ठोस रिसीविंग मिल पा रही है। बिना किसी स्पष्ट पहचान सत्यापन के केवल डिजिटल माध्यम पर भरोसा करना जोखिम भरा साबित हो रहा है। प्रतिदिन करीब 1 करोड़ के राजस्व का नुकसान कामकाज ठप होने से न केवल डीड राइटर और पक्षकार परेशान हैं, बल्कि सरकार को भी भारी आर्थिक चपत लग रही है। संघ का दावा है कि इस अव्यवस्था के कारण अकेले गया शाखा से ही रोजाना करीब 1 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व (रजिस्ट्री शुल्क) का नुकसान हो रहा है। शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का ऐलान दस्तावेज नवीस संघ ने साफ कर दिया है कि वे न तो पूरी तरह पेपरलेस प्रणाली को स्वीकार करेंगे और न ही वर्तमान अव्यवस्था को सहेंगे। जब तक पुरानी सुगम व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ‘नई व्यवस्था से जनता परेशान है, रोज एक करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान’ वीरेंद्र सिंह (अध्यक्ष, दस्तावेज नवीस संघ, गया शाखा) का कहना है कि हम हड़ताल पर नहीं हैं, लेकिन दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है क्योंकि पक्षकार खुद नहीं आ रहे हैं। नई व्यवस्था से जनता परेशान है और गया से ही प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि पुरानी व्यवस्था को ही वापस लाया जाए। राकेश कुमार (सचिव, दस्तावेज नवीस संघ, गया शाखा ने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था में व्यावहारिक खामियां बहुत हैं। आधार और ओटीपी देने से लोग डर रहे हैं। जहानाबाद में ओटीपी देने के बाद खाते से 4 लाख रुपये गायब होने की घटना से लोग सहमे हैं। बिना हस्ताक्षर और रिसीविंग के काम करना संभव नहीं है, इसलिए पुरानी पेपर-बेस्ड व्यवस्था ही बहाल होनी चाहिए।

