रायबरेली में उत्तर प्रदेश युवा उद्योग व्यापार मंडल और अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने 3 अक्टूबर को UPI के नए MDR को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से नगर मजिस्ट्रेट रामावतार को दिया गया। व्यापारियों ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 2 हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR को लेकर अपनी मांग रखी। व्यापार मंडल का कहना है कि UPI छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में MDR की सीमा ऐसी रखी जानी चाहिए, जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव न पड़े और वे डिजिटल भुगतान स्वीकार करना जारी रखें। 2 हजार की जगह 10 हजार हो न्यूनतम सीमा व्यापार मंडल ने मांग की कि MDR लागू होने की न्यूनतम लेनदेन सीमा 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये की जाए। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से अधिक के निर्धारित मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। वहीं, 2 हजार रुपये तक के मर्चेंट लेनदेन और पात्र छोटे व्यापारियों के लिए जीरो MDR व्यवस्था जारी रहेगी। व्यापार मंडल ने मासिक अधिकतम MDR सीमा भी बढ़ाने की मांग की है। संगठन का सुझाव है कि इसे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि इससे छोटे और मध्यम कारोबारियों को UPI के इस्तेमाल में राहत मिलेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा मिलता रहेगा।
कैश की ओर लौटने को मजबूर न हों व्यापारी व्यापार मंडल ने कहा कि UPI ने कारोबारियों और ग्राहकों के बीच भुगतान को आसान बनाया है। ऐसे में शुल्क की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे व्यापारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेनदेन को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर न हों। संगठन ने व्यापारियों के हितों और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव की मांग की। दर्जनों व्यापारी रहे मौजूद ज्ञापन देने वालों में वरिष्ठ जिला महामंत्री संदीप शुक्ला, जिला संरक्षक महेंद्र अग्रवाल, संदीप जैन, जिला कोषाध्यक्ष चंद्रप्रकाश गुप्ता, जिला युवा अध्यक्ष पंकज प्रजापति, जिला मंत्री शिखर श्रीवास्तव, जिला उपाध्यक्ष आशीष जैन, नगर उपाध्यक्ष वीके रावत और कोषाध्यक्ष मोहम्मद शकील समेत दर्जनों व्यापारी मौजूद रहे। व्यापार मंडल ने मांग की कि MDR की न्यूनतम लेनदेन सीमा 10 हजार और मासिक सीमा 5 लाख रुपये करने पर आवश्यक निर्णय लिया जाए।

