अमेरिकी संसद के 50 से ज्यादा डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई है। उनका कहना है कि क्रिटिकल मिनरल्स यानी जरूरी खनिजों के समझौतों से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक के परिवारों को फायदा पहुंच सकता है। साथ ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा जोखिम में पड़ सकता है।
सांसदों ने 4 लोगों को लिखा पत्र
इन सांसदों ने ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य सचिव लटनिक और खजाना सचिव स्कॉट बेसेंट को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कजाकिस्तान में अमेरिकी समर्थन वाले खनिज समझौते का जिक्र किया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टिंग के आधार पर सांसदों ने आरोप लगाया कि ट्रंप और लटनिक परिवार से जुड़े कंपनियों को इससे मुनाफा हो सकता है। सांसदों ने साफ कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना ये निवेश और लोन गारंटी स्वार्थ, पक्षपात और कमजोर निगरानी का खतरा पैदा करते हैं।
टैक्सपेयर्स का पैसा दांव पर
डेमोक्रेट्स का दावा है कि ये समझौते डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक के जरिए अरबों डॉलर के लोन और गारंटी दे सकते हैं।
संघीय सरकार खनन और प्रोसेसिंग कंपनियों में इक्विटी निवेश भी कर सकती है। उनका तर्क है कि अगर प्रोजेक्ट सफल हुए तो कंपनियां मुनाफा रखेंगी, लेकिन फेल होने पर टैक्सपेयर्स को नुकसान उठाना पड़ेगा।
कांगो और जाम्बिया के मामले भी उठे
पत्र में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और जाम्बिया से जुड़े समझौतों पर भी सवाल खड़े किए गए। सांसदों ने आरोप लगाया कि स्टेट डिपार्टमेंट ने जाम्बिया पर दबाव बनाने के लिए एचआईवी दवाओं और अन्य मदद रोकने की धमकी दी।
कांगो में खनन स्थलों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी समर्थन वाली अर्धसैनिक बल की बात भी चिंता का विषय बनी। अर्जेंटीना, इक्वाडोर, कंबोडिया और बांग्लादेश के व्यापार समझौतों में खनिज प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई गई।
इन देशों को अमेरिकी खनन निवेश आसान बनाने को कहा गया, लेकिन पर्यावरण, मजदूर और मानवाधिकार की कोई बाध्यकारी शर्त नहीं रखी गई।
ट्रंप प्रशासन से 10 सवाल
नेचुरल रिसोर्सेज कमेटी के रैंकिंग सदस्य जारेड हफमैन, वेज एंड मीन्स ट्रेड सबकमेटी की लिंडा सांचेज और कांग्रेसमैन जोनाथन जैक्सन ने इस पत्र की अगुवाई की।
भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना और श्री थानेदार भी हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं। सांसदों ने कहा कि वे स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के लिए अमेरिकी खनिज सप्लाई चेन मजबूत करने और चीन पर निर्भरता कम करने के पक्ष में हैं। लेकिन उन्होंने पारदर्शी प्रक्रिया, टिकाऊ खनन और प्रोसेसिंग की मांग की।
उन्होंने प्रशासन से 10 सवाल पूछे हैं जिनमें मानवाधिकार, पर्यावरण आकलन, टैक्सपेयर्स की सुरक्षा, हितों का टकराव और प्रस्तावित प्राइस फ्लोर शामिल हैं। प्राइस सपोर्ट से एंटीट्रस्ट जोखिम और चीनी कंपनियों को फायदा होने की आशंका भी जताई गई है।


BREAKING: President Trump and Japanese PM Sanae Takaichi have just signed an OFFICIAL agreement securing rare earths and critical minerals, REDUCING reliance on China.