Bangladesh Violence Against Women: बांग्लादेश में सत्ता बदलने और पीएम तारिक रहमान के आने के बाद भी महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जनवरी 2026 से लेकर जुलाई के बीच हिंसा के 1,667 मामले सामने आने का दावा किया गया है। इनमें हत्या, बदसलूकी और दूसरी तरह की हिंसा शामिल है।
बता दें यह आंकड़ा बांग्लादेश महिला परिषद ने जारी किया है। संगठन ने कहा कि ये मामले देश में महिलाओं की खराब सुरक्षा व्यवस्था की चिंता बढ़ाते हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इसलिए असली संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।
7 महीनों में 1,667 महिलाओं और बच्चियों के साथ हिंसा
बांग्लादेश महिला परिषद के मुताबिक, जनवरी से जुलाई के बीच 1,667 महिलाओं और बच्चों को अलग-अलग तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा। इनमें 83 लड़कियों और 258 महिलाओं की हत्या का दावा किया गया है।
इसी अवधि में 292 महिलाओं और लड़कियों के साथ बदसलूकी के मामले सामने आए। इनमें 31 घटनाएं ऐसी थीं, जिनमें दुर्व्यवहार के बाद हत्या भी हुई। ये आंकड़े ढाका में आयोजित एक ह्यूमन चेन के दौरान सामने रखे गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का विरोध किया।
महिला परिषद ने क्या कहा?
महिला परिषद की प्रेसिडेंट फौजिया मोस्लेम ने आंकड़ों को लेकर एक अहम बात कही। उन्होंने बताया कि जानकारी मुख्य रूप से 14 अखबारों की रिपोर्ट से जुटाई गई है। देश में कई दूसरे मीडिया संस्थान भी हैं। अगर उन सभी से आंकड़े जुटाए जाएं, तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा की तस्वीर और गंभीर हो सकती है।
संगठन की जनरल सेक्रेटरी मालेका बानू ने भी महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समस्या केवल दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं है। महिलाओं और बच्चों को हत्या, यातना और दूसरी तरह की हिंसा का भी सामना करना पड़ रहा है।
कानून सख्त करने और निगरानी बढ़ाने की मांग
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं है। कानूनों को सख्ती से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने समाज में मौजूद भेदभाव और पुरुष प्रधान सोच को भी बड़ी चुनौती बताया। वक्ताओं ने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए बड़े सामाजिक बदलाव की जरूरत बताई।
संगठन ने सरकार से प्रभावी निगरानी बढ़ाने की मांग की। साथ ही दुर्व्यवहार, हत्या और बच्चों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई। महिला परिषद ने अधिकारियों से मानवाधिकारों की रक्षा करने की भी मांग की। उसका कहना है कि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित माहौल देना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।


Reports from Narayanganj, Bangladesh: attacks on Hindu communities and threats of sexual violence against Hindu women are deeply alarming.
(@HinduUnityBD)
Bangladesh can accelerate progress towards workplace