मिथिलांचल से ₹45 लाख का मखाना दुबई एक्सपोर्ट:बेनीपुर से 4 टन की पहली खेप रवाना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार की पहचान होगी मजबूत

मिथिलांचल से ₹45 लाख का मखाना दुबई एक्सपोर्ट:बेनीपुर से 4 टन की पहली खेप रवाना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार की पहचान होगी मजबूत

मिथिलांचल के मखाना की खुशबू अब सात समंदर पार पहुंचने लगी है। दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड के धरौड़ा गांव से रविवार को करीब 4 मीट्रिक टन मखाना की खेप दुबई के लिए रवाना की गई। करीब 45 लाख रुपये मूल्य की इस खेप को शक्ति नेचुरल एक्सपोर्ट, गयाजी के माध्यम से भेजा जा रहा है। इसे बेनीपुर से ट्रक के जरिए कोलकाता बंदरगाह ले जाया जाएगा, जहां से समुद्री मार्ग से दुबई के जावेद अली पोर्ट भेजा जाएगा। ग्रामीण इलाके से इतने बड़े पैमाने पर मखाना की पहली खेप यूएई भेजे जाने से स्थानीय किसानों, मखाना कारोबारियों, प्रसंस्करण से जुड़े लोगों और ग्रामीण महिलाओं में उत्साह है। कारोबारियों को उम्मीद है कि विदेश में मखाना का सैंपल और गुणवत्ता पसंद आने के बाद नियमित निर्यात का रास्ता खुल सकता है। इससे मिथिला के मखाना को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर किसानों को बेहतर बाजार और कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। मखाना की खेप को हरी झंडी दिखाकर कियारवाना मखाना की खेप को शक्ति नेचुरल एक्सपोर्ट के प्रोपराइटर अमिताभ सिन्हा और लक्ष्मी गुलाब मखाना के प्रोपराइटर भोलानाथ झा और रुपेश मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर लक्ष्मी गुलाब मखाना में कार्यरत महिला कर्मियों को भोलानाथ झा की ओर से उपहार देकर सम्मानित भी किया गया। शक्ति नेचुरल एक्सपोर्ट के संचालक अमिताभ सिन्हा ने कहा, ‘बेनीपुर से मखाना की खेप का UAE जाना पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। स्थानीय स्तर पर तैयार मखाना को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की यह पहल किसानों और कारोबारियों के लिए नई संभावनाओं का संकेत है।’ उन्होंने लक्ष्मी गुलाब मखाना के संचालक भोलानाथ झा और उनकी पूरी टीम के सहयोग के लिए आभार जताया। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद शुरू किया कारोबार भोलानाथ झा ने देश की सेवा की। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नौकरी का अवसर भी मिला, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपने गांव लौटकर स्थानीय लोगों को रोजगार देने का निर्णय लिया। इसी सोच के साथ उन्होंने मखाना कारोबार की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में काम को आगे बढ़ाना आसान नहीं था और कभी-कभी मजदूरों की कमी के कारण कारोबार भी प्रभावित होता था। इसके बावजूद मैंने कारोबार जारी रखा। धीरे-धीरे मखाना के काम का विस्तार हुआ। माता-पिता के नाम पर रखा कंपनी का नाम भोलानाथ झा ने बताया, ‘कंपनी का नाम उनके माता-पिता के नाम पर रखा गया है। मेरा उद्देश्य कारोबार के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, ‘स्थानीय स्तर पर तैयार मखाना को दुबई तक पहुंचाना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में कारोबार का विस्तार कर अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ने और मखाना की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।’ मिथिला मखाना का दुनिया में बड़ा योगदान रुपेश मिश्रा ने कहा, ‘मिथिलांचल लंबे समय से मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, कटिहार और पूर्णिया समेत आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर मखाना का उत्पादन होता है। उनके अनुसार, दुनिया के मखाना उत्पादन में मिथिलांचल की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा, ‘पहले दरभंगा में मुख्य रूप से तालाबों में मखाना उत्पादन किया जाता था, लेकिन अब नई तकनीक के कारण किसान खेतों में भी मखाना की खेती करने लगे हैं। इससे मखाना की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बेनीपुर, बिरौल सहित आसपास के दर्जनों गांवों में किसान पारंपरिक फसलों के साथ मखाना की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।’ उन्होंने बताया, ‘मिथिला मखाना को GI टैग मिलने से भी इस उत्पाद की पहचान को मजबूती मिली है। मखाना की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर से सीधे निर्यात की शुरुआत किसानों और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। खेत से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगा उत्पाद चार मैट्रिक्स टन मखाना की मौजूदा खेप बेनीपुर से ट्रक के जरिए कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगी। वहां इसे समुद्री जहाज के माध्यम से दुबई भेजा जाएगा। कारोबारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया स्थानीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि विदेश में भेजी जा रही मौजूदा खेप के सैंपल और गुणवत्ता को लेकर मिलने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि वहां मखाना की मांग और बाजार को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो भविष्य में बेनीपुर और आसपास के क्षेत्रों से नियमित रूप से मखाना का निर्यात किया जा सकता है। 40 से अधिक लोगों को मिल रहा रोजगार लक्ष्मी गुलाब मखाना में फिलहाल करीब 40 महिला एवं पुरुष कर्मी काम कर रहे हैं। खासकर ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही प्रसंस्करण कार्य से रोजगार मिलने से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। मखाना के प्रसंस्करण, सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग से स्थानीय स्तर पर रोजगार की नई संभावनाएं बनी हैं। किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार चार मैट्रिक टन मखाना की यह खेप यूएई भेजे जाने से स्थानीय किसानों को भी उम्मीद जगी है। निर्यात का बाजार मजबूत होने पर मखाना उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर खरीदार और उचित कीमत मिलने की संभावना है। कारोबारियों का मानना है कि यदि निर्यात नियमित हुआ तो मखाना की मांग बढ़ेगी, जिससे किसान अधिक क्षेत्र में इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। मखाना कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित करने, गुणवत्ता बनाए रखने और निर्यात के मानकों का पालन करने पर ध्यान देना होगा। इससे मिथिला के मखाना कारोबार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिल सकती है। ग्रामीण क्षेत्र से दुबई तक पहुंचा मिथिला का स्वाद बेनीपुर के धरौड़ा जैसे ग्रामीण इलाके से चार टन मखाना का दुबई के लिए रवाना होना स्थानीय उद्यमिता और रोजगार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौटकर भोलानाथ झा ने जिस छोटे स्तर के कारोबार की शुरुआत तीन महिला मजदूरों के साथ की थी, वह अब 40 से अधिक लोगों को रोजगार देने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बना रहा है। मिथिलांचल के मखाना कारोबार को मलेगी नई गति अब इस खेप की सफलता पर कारोबारियों और किसानों की नजर है। यदि दुबई में मखाना की मांग बढ़ती है और नियमित ऑर्डर मिलने लगते हैं, तो बेनीपुर समेत पूरे मिथिलांचल के मखाना कारोबार को नई गति मिल सकती है। इससे स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, रोजगार और निर्यात सहित सभी क्षेत्रों में विस्तार की संभावनाएं बनेंगी। मिथिलांचल के मखाना की खुशबू अब सात समंदर पार पहुंचने लगी है। दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड के धरौड़ा गांव से रविवार को करीब 4 मीट्रिक टन मखाना की खेप दुबई के लिए रवाना की गई। करीब 45 लाख रुपये मूल्य की इस खेप को शक्ति नेचुरल एक्सपोर्ट, गयाजी के माध्यम से भेजा जा रहा है। इसे बेनीपुर से ट्रक के जरिए कोलकाता बंदरगाह ले जाया जाएगा, जहां से समुद्री मार्ग से दुबई के जावेद अली पोर्ट भेजा जाएगा। ग्रामीण इलाके से इतने बड़े पैमाने पर मखाना की पहली खेप यूएई भेजे जाने से स्थानीय किसानों, मखाना कारोबारियों, प्रसंस्करण से जुड़े लोगों और ग्रामीण महिलाओं में उत्साह है। कारोबारियों को उम्मीद है कि विदेश में मखाना का सैंपल और गुणवत्ता पसंद आने के बाद नियमित निर्यात का रास्ता खुल सकता है। इससे मिथिला के मखाना को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर किसानों को बेहतर बाजार और कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। मखाना की खेप को हरी झंडी दिखाकर कियारवाना मखाना की खेप को शक्ति नेचुरल एक्सपोर्ट के प्रोपराइटर अमिताभ सिन्हा और लक्ष्मी गुलाब मखाना के प्रोपराइटर भोलानाथ झा और रुपेश मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर लक्ष्मी गुलाब मखाना में कार्यरत महिला कर्मियों को भोलानाथ झा की ओर से उपहार देकर सम्मानित भी किया गया। शक्ति नेचुरल एक्सपोर्ट के संचालक अमिताभ सिन्हा ने कहा, ‘बेनीपुर से मखाना की खेप का UAE जाना पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। स्थानीय स्तर पर तैयार मखाना को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की यह पहल किसानों और कारोबारियों के लिए नई संभावनाओं का संकेत है।’ उन्होंने लक्ष्मी गुलाब मखाना के संचालक भोलानाथ झा और उनकी पूरी टीम के सहयोग के लिए आभार जताया। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद शुरू किया कारोबार भोलानाथ झा ने देश की सेवा की। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नौकरी का अवसर भी मिला, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपने गांव लौटकर स्थानीय लोगों को रोजगार देने का निर्णय लिया। इसी सोच के साथ उन्होंने मखाना कारोबार की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में काम को आगे बढ़ाना आसान नहीं था और कभी-कभी मजदूरों की कमी के कारण कारोबार भी प्रभावित होता था। इसके बावजूद मैंने कारोबार जारी रखा। धीरे-धीरे मखाना के काम का विस्तार हुआ। माता-पिता के नाम पर रखा कंपनी का नाम भोलानाथ झा ने बताया, ‘कंपनी का नाम उनके माता-पिता के नाम पर रखा गया है। मेरा उद्देश्य कारोबार के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, ‘स्थानीय स्तर पर तैयार मखाना को दुबई तक पहुंचाना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में कारोबार का विस्तार कर अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ने और मखाना की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।’ मिथिला मखाना का दुनिया में बड़ा योगदान रुपेश मिश्रा ने कहा, ‘मिथिलांचल लंबे समय से मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, कटिहार और पूर्णिया समेत आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर मखाना का उत्पादन होता है। उनके अनुसार, दुनिया के मखाना उत्पादन में मिथिलांचल की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा, ‘पहले दरभंगा में मुख्य रूप से तालाबों में मखाना उत्पादन किया जाता था, लेकिन अब नई तकनीक के कारण किसान खेतों में भी मखाना की खेती करने लगे हैं। इससे मखाना की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बेनीपुर, बिरौल सहित आसपास के दर्जनों गांवों में किसान पारंपरिक फसलों के साथ मखाना की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।’ उन्होंने बताया, ‘मिथिला मखाना को GI टैग मिलने से भी इस उत्पाद की पहचान को मजबूती मिली है। मखाना की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर से सीधे निर्यात की शुरुआत किसानों और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। खेत से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगा उत्पाद चार मैट्रिक्स टन मखाना की मौजूदा खेप बेनीपुर से ट्रक के जरिए कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगी। वहां इसे समुद्री जहाज के माध्यम से दुबई भेजा जाएगा। कारोबारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया स्थानीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि विदेश में भेजी जा रही मौजूदा खेप के सैंपल और गुणवत्ता को लेकर मिलने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि वहां मखाना की मांग और बाजार को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो भविष्य में बेनीपुर और आसपास के क्षेत्रों से नियमित रूप से मखाना का निर्यात किया जा सकता है। 40 से अधिक लोगों को मिल रहा रोजगार लक्ष्मी गुलाब मखाना में फिलहाल करीब 40 महिला एवं पुरुष कर्मी काम कर रहे हैं। खासकर ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही प्रसंस्करण कार्य से रोजगार मिलने से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। मखाना के प्रसंस्करण, सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग से स्थानीय स्तर पर रोजगार की नई संभावनाएं बनी हैं। किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार चार मैट्रिक टन मखाना की यह खेप यूएई भेजे जाने से स्थानीय किसानों को भी उम्मीद जगी है। निर्यात का बाजार मजबूत होने पर मखाना उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर खरीदार और उचित कीमत मिलने की संभावना है। कारोबारियों का मानना है कि यदि निर्यात नियमित हुआ तो मखाना की मांग बढ़ेगी, जिससे किसान अधिक क्षेत्र में इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। मखाना कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित करने, गुणवत्ता बनाए रखने और निर्यात के मानकों का पालन करने पर ध्यान देना होगा। इससे मिथिला के मखाना कारोबार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिल सकती है। ग्रामीण क्षेत्र से दुबई तक पहुंचा मिथिला का स्वाद बेनीपुर के धरौड़ा जैसे ग्रामीण इलाके से चार टन मखाना का दुबई के लिए रवाना होना स्थानीय उद्यमिता और रोजगार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौटकर भोलानाथ झा ने जिस छोटे स्तर के कारोबार की शुरुआत तीन महिला मजदूरों के साथ की थी, वह अब 40 से अधिक लोगों को रोजगार देने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बना रहा है। मिथिलांचल के मखाना कारोबार को मलेगी नई गति अब इस खेप की सफलता पर कारोबारियों और किसानों की नजर है। यदि दुबई में मखाना की मांग बढ़ती है और नियमित ऑर्डर मिलने लगते हैं, तो बेनीपुर समेत पूरे मिथिलांचल के मखाना कारोबार को नई गति मिल सकती है। इससे स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, रोजगार और निर्यात सहित सभी क्षेत्रों में विस्तार की संभावनाएं बनेंगी।  

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