खुले नाले में गिरने से इसी वर्ष 3 शहर क्षेत्र में तीन मौतें हो चुकी हैं। लेकिन कार्यदायी संस्थाएं और काम करा रही फर्मों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मई में सरिया धसने से मजदूर की मौत के मामले में जिस फर्म पर एफआईआर हुई थी, वह फिर बिना बैरिकेडिंग के नाला निर्माण कर रही है। नाले के किनारे से ही लोागें का आना-जाना है। आसपास ही कुछ परिवार भी रहते हैं। शायद फिर किसी दुर्घटना का ही इंतजार किया जा रहा है। सिक्सलेन फ्लाईओवर के बगल से जाने वाले सर्विस रोड के किनारे नाले का निर्माण किया जा रहा है। सड़क को तो बंद कर दिया गया है लेकिन नाला निर्माण स्थल को बैरिकेड नहीं किया गया है। इस नाले में बड़ी-बड़ी सरिया लगाई जा रही है। इसके ठीक बगल से लोग आते-जाते देखे जा रहे हैं। रात में यहां अंधेरा रहता है, कोई नाले में गिरा तो उसका बचना मुश्किल है। जानिए कहां-कहां हुई हैं घटनाएं शहर के पादरी बाजार क्षेत्र में छात्र शक्ति फर्म की ओर से नाला बनाया जा रहा था। इस नाले के चारो ओर बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। जिसका नतीजा रहा कि 12 मई 2026 को 68 साल के मजदूर हंसराज यादव इस नाले में फिसलकर गिर गए थे। उनके शरीर में सरिया धंस गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में काम करा रही फर्म पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे कुछ दिन पहले ही कमिश्नर ने सभी निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग करने का निर्देश दिया था। खजांची चौराहा बांसमंडी के पास गोड़धोइया नाले के खुले हिस्से में डूबने से 40 साल के तेतरदास नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी। वह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले थे। शहर में वह कबाड़ बीनने का काम करते थे। यह घटना जून 2026 में हुई थी। इसी तरह फरवरी 2026 को जीडीए के एक डक्ट में गिर जाने से 12 साल के कन्हैया की मौत हो गई थी। निर्माण पूरा होने के बाद भी इसमें सरिया छोड़ दी गई थी। इसमें कंपलीशन देने वालों का कुछ नहीं हुआ, जेई स्तर पर कार्रवाई हुई थी।
रचित हास्पिटल के पास नाला बना लेकिन सरिया काटना भूल गए पैडलेगंज से नौसढ़ तक बन रहे सिक्सलेन सड़क के दोनों किनारे नाले बनाए गए हैं। रचित हास्पिटल के पास काफी पहले ही नाला बन चुका है। लेकिन इस नाले में मोटी-मोटी दर्जनों सरिया अभी भी निकली है। उसे काटा नहीं गया है। इस हास्पिटल में काफी भीड़ होती है। परेशान हाल में मरीजों के तीमारदार पहुंचते हैं। नाले पर भी वे खड़े रहते हैं। नाले में निकली यह सरिया कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। लेकिन पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को ये कमियां नजर नहीं आ रहीं।


