Pakistan Digital Payments: मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के बीच पाकिस्तान में क्यों बढ़ती गई नकदी? क्या कहती है रिपोर्ट

Pakistan Digital Payments: मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के बीच पाकिस्तान में क्यों बढ़ती गई नकदी? क्या कहती है रिपोर्ट

Pakistan Digital Payments: पाकिस्तान में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसका असर लोगों की कैश पर निर्भरता कम करने में नजर नहीं आ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल मर्चेंट नेटवर्क और कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में सर्कुलेशन में मौजूद मुद्रा (Currency in Circulation) रिकॉर्ड 11.94 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई।

Photo Source-AI Image
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यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2020 के 6.14 ट्रिलियन रुपये के मुकाबले करीब 94 फीसदी अधिक है। इससे पता चलता है कि रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों में नकदी की भूमिका अब भी काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

डिजिटल पेमेंट बढ़ा, लेकिन कैश पर निर्भरता बरकरार

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में पिछले 6 वर्षों के दौरान डिजिटल वित्तीय लेनदेन में मजबूत वृद्धि हुई है। मोबाइल बैंकिंग से होने वाले लेनदेन की वैल्यू में तेजी आई है, डिजिटल मर्चेंट नेटवर्क का विस्तार हुआ है और सरकार के कैशलेस पाकिस्तान कार्यक्रम जैसी पहलों से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट को बढ़ावा मिला है।

हालांकि, डिजिटल पेमेंट में हुई यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पैसे के एक स्थान से दूसरे स्थान तक ट्रांसफर होने तक सीमित दिखाई देती है। बैंक खातों, मोबाइल वॉलेट और इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम के जरिए भेजी गई बड़ी मात्रा में रकम आखिरकार निकाली जाती है और खर्च करने से पहले कैश में बदल जाती है।

कैश-कन्वर्जन का चक्र

विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान में स्थिति को पूरी तरह कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ना नहीं कहा जा सकता। इसे ‘कैश-कन्वर्जन’ साइकिल के तौर पर देखा जा रहा है। यानी पैसे का डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर तो बढ़ रहा है, लेकिन अंतिम खर्च के समय वही रकम कैश में बदल जाती है। इस वजह से डिजिटल पेमेंट के विस्तार के बावजूद अर्थव्यवस्था में नकदी की मौजूदगी बनी हुई है।

6 साल में कैश सर्कुलेशन 94 फीसदी बढ़ा

सेंट्रल बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में सर्कुलेशन में मुद्रा 6.14 ट्रिलियन रुपये थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 11.94 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस तरह छह साल की अवधि में सर्कुलेशन में मौजूद मुद्रा में 94 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह आंकड़ा पाकिस्तान की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों में कैश की लगातार बनी हुई भूमिका को दर्शाता है।

ब्रॉड मनी में कैश की हिस्सेदारी घटी

हालांकि, लंबी अवधि के कुछ संकेतक यह बताते हैं कि अर्थव्यवस्था में कैश की तीव्रता धीरे-धीरे कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रॉड मनी सप्लाई में करेंसी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 में 30.1 फीसदी थी, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 25.7 फीसदी रह गई। महंगाई को समायोजित करने के बाद तस्वीर और अलग दिखाई देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वास्तविक रूप से सर्कुलेशन में मौजूद कैश की क्रय शक्ति इस अवधि में करीब 12.5 फीसदी कम हुई।

वित्त वर्ष 2024 के बाद फिर बढ़ने लगा वास्तविक कैश

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कैश की वास्तविक होल्डिंग में गिरावट का यह रुझान हाल के वर्षों में थम गया है। वित्त वर्ष 2024 में निचले स्तर पर पहुंचने के बाद वास्तविक कैश होल्डिंग फिर बढ़ने लगी। इसी तरह जब कैश होल्डिंग को देश के आर्थिक उत्पादन यानी जीडीपी के मुकाबले देखा गया, तो इसमें भी एक समान पैटर्न सामने आया। जीडीपी के प्रतिशत के रूप में सर्कुलेशन में मौजूद मुद्रा वित्त वर्ष 2024 तक लगातार घटती रही, लेकिन वित्त वर्ष 2025 और 2026 में इसमें फिर बढ़ोतरी देखने को मिली।

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