TMC Leader Ashish Banerjee Death: पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर और टीएमसी नेता आशीष बनर्जी की संदिग्ध मौत पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ममता बनर्जी ने उनके निधन पर दुख जताते हुए मानसिक दबाव और राजनीतिक उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। वहीं शुभेंदु अधिकारी और तपस रॉय ने मामले की निष्पक्ष जांच और पुलिस कार्रवाई की मांग की।
Ashish Banerjee Death: पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर और वरिष्ठ टीएमसी नेता आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। अब इस पर पूर्व सीएम ममता बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने आशीष बनर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। साथ ही कहा कि वे हमेशा अपने विनम्र स्वभाव और रामपुरहाट तथा बीरभूम के लोगों के साथ अपने गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने आगे कहा कि इस त्रासदी को और भी पीड़ादायक बनाने वाली बात यह है कि अपने अंतिम दिनों में उन्हें अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक तनाव से गुजरना पड़ा था।
ममता बनर्जी ने कहा कि उनके द्वारा किए गए कार्यों के बावजूद उन्हें बार-बार बदनाम किया गया, उन पर झूठे आरोप लगाए गए और लगातार दबाव में रखा गया। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सेवा करने के बावजूद उन्हें जिस तरह के उत्पीड़न और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, वह हम सभी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि लगातार जारी राजनीतिक दुश्मनी की इंसानी कीमत कितनी भयावह हो सकती है।
सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने टीएमसी नेता की मौत पर कहा कि आशीष बनर्जी के स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के साथ अच्छे संबंध थे। जब मैंने मुख्यमंत्री का पद संभाला था, तब उन्होंने मुझे संदेश भेजकर कहा था कि वह मुझसे मिलने आएंगे।
उन्होंने कहा कि मैंने उनके परिवार से पुलिस के साथ सहयोग करने को कहा है। टीएमसी के कुछ भ्रष्ट लोग परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश कर सकते हैं। कॉल रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। ममता बनर्जी के चुनाव हारने के बाद उन्होंने एक कमेटी बनाई थी और आशीष बनर्जी ने तुरंत उस कमेटी से इस्तीफा दे दिया था। पुलिस निश्चित रूप से कार्रवाई करेगी।
वहीं प्रदेश सरकार में मंत्री तपस रॉय ने कहा कि मुझे आज सुबह इसके बारे में पता चला और मैंने उनका नोट भी देखा और पढ़ा है। यह बहुत दुखद घटना है। वह किसी भी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा था कि राजनीति में आना गलत है और बहुत कुछ देखने के बाद भी वह उनका विरोध नहीं कर सके क्योंकि उनमें उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं थी।


