‘बचपन से पुलिस की वर्दी पहनने का शौक था’:बोर्ड एग्जाम में बदलवाया था नाम, प्रेसिडेंट मेडल के लिए नॉमिनेटेड रेल एसपी की कहानी

‘बचपन से पुलिस की वर्दी पहनने का शौक था’:बोर्ड एग्जाम में बदलवाया था नाम, प्रेसिडेंट मेडल के लिए नॉमिनेटेड रेल एसपी की कहानी

मुजफ्फरपुर की रेल एसपी बीणा कुमारी को इस साल राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले जारी सम्मान लिस्ट में उनका नाम शामिल किया गया है। बिहार से इस कैटेगरी में उनके साथ इंस्पेक्टर जनरल (IG) संजय कुमार का नाम भी शामिल है। करीब 30 साल के पुलिस सेवा काल में बीणा कुमारी ने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नक्सल ऑपरेशन, विशेष शाखा, निगरानी अन्वेषण, कमजोर वर्ग, पुलिस प्रशिक्षण और रेल पुलिस समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। नाम बदलने की भी कहानी, 10वीं में ‘वीणा’ से हो गईं ‘बीणा’ रेल एसपी बीणा कुमारी ने बताया कि बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी अच्छी थीं और उन्हें गाने का भी शौक था। गायन में रुचि और अच्छी आवाज के कारण माता-पिता ने उनका नाम ‘वीणा’ रखा था। दसवीं तक स्कूल और अन्य दस्तावेजों में उनका नाम वीणा ही रहा। लेकिन दसवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान एक शिक्षक ने स्कूल के रजिस्टर में उनका नाम ‘बीणा’ दर्ज कर दिया। इसके बाद बोर्ड से लेकर आगे की पढ़ाई और नौकरी के सभी दस्तावेजों में यही नाम चलता गया। आज पुलिस सेवा में इसी ‘बीणा कुमारी’ नाम से पहचान बनाने वाली अधिकारी के नाम की कहानी भी उनके जीवन के सफर का दिलचस्प हिस्सा है। जेल सर्विस से राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा सफर साल 1996 में जेल सर्विस से शुरू हुआ उनका करियर 1999 में बिहार पुलिस सेवा, 2019 में भारतीय पुलिस सेवा और अब राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा है। बीणा कुमारी का जन्म साल 1969 में सारण जिले के गरखा थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में हुआ। उनके पिता झारखंड के बोकारो में नौकरी करते थे। ऐसे में उनकी शुरुआती पढ़ाई से लेकर हायर एजुकेशन तक का अधिकांश समय बोकारो में ही बीता। बीणा कुमारी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही वर्दी पहनने का शौक था। इसी लगाव ने उन्हें पुलिस सेवा की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 1996 में उन्होंने जेल सर्विस में प्रोविजन ऑफिसर के रूप में नौकरी शुरू की। इसके बाद बिहार पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति मिली। 1999 में बिहार पुलिस सेवा, मुंगेर से शुरू हुआ पुलिसिंग का सफर फरवरी 1999 में बिहार पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति के बाद उन्होंने हजारीबाग पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में करीब एक साल की ट्रेनिंग की। ट्रेनिंग पूरा करने के बाद मुंगेर में रिजिनल ट्रेनिंग हुई और यहीं से उनकी पहली पोस्टिंग हुई। फरवरी 2002 में हवेली खड़गपुर, मुंगेर की SDPO के रूप में पोस्टिंग हुई। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने नक्सल ऑपरेशन, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान और विधि-व्यवस्था सुधार से जुड़े कार्यों में जिम्मेदारी निभाई। गोपालगंज से भागलपुर तक संभाली जिम्मेदारी दिसंबर 2004 में पुलिस उपाधीक्षक, गोपालगंज के पद पर तैनाती मिली। इसके बाद सितंबर 2006 में बिहार सैन्य पुलिस-10 में ASP के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यहां उन्होंने अकाउंट और ट्रेनिंग अफसर के रूप में काम किया। फरवरी 2009 में स्पेशल ब्रांच में ट्रांसफर हुआ। यहां अकाउंट अफसर के साथ अलग-अलग ब्रांच के प्रभारी के रूप में काम किया। दस्तावेजों के संरचनात्मक विकास से जुड़े कार्यों में भी योगदान दिया। जून 2012 में भागलपुर के सिटी एसपी के रूप में पोस्टिंग हुईं। यहां क्राइम कंट्रोल, इन्विस्टिगेशन, लॉ एंड ऑर्डर और अन्य संवेदनशील मामलों के डिस्पोजल की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद अगस्त 2015 में सुपौल की एसडीपीओ के रूप में तैनाती हुई। विजिलेंस में भी निभाई अहम भूमिका जनवरी 2017 में विजिलेंस में ASP के रूप में पोस्टिंग हुईं। यहां विजिलेंस और क्राइम से जुड़े कार्यों के साथ अलग-अलग ब्रांच की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद दिसंबर 2019 में इंडियन पुलिस सर्विस में शामिल हुईं। IPS में आने के बाद उनकी पहली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विजिलेंस एसपी के रूप में रही। इसके बाद अगस्त 2020 में कमजोर वर्ग की एसपी के पद पर तैनाती हुई। इस दौरान कमजोर वर्ग से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम किया। प्रशिक्षण और मानव बल प्रबंधन में भी किया काम जनवरी 2022 में बिहार सशस्त्र पुलिस-4, डुमरांव में पदस्थापित हुईं। यहां प्रशिक्षण व्यवस्था और मानव बल के बेहतर प्रबंधन पर काम किया। इसके बाद जनवरी 2024 में बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर में पदस्थापना हुई। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर करने और पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने पर उन्होंने काम किया। अप्रैल 2025 से वह रेल पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में इसी पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मुजफ्फरपुर की रेल एसपी बीणा कुमारी को इस साल राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले जारी सम्मान लिस्ट में उनका नाम शामिल किया गया है। बिहार से इस कैटेगरी में उनके साथ इंस्पेक्टर जनरल (IG) संजय कुमार का नाम भी शामिल है। करीब 30 साल के पुलिस सेवा काल में बीणा कुमारी ने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नक्सल ऑपरेशन, विशेष शाखा, निगरानी अन्वेषण, कमजोर वर्ग, पुलिस प्रशिक्षण और रेल पुलिस समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। नाम बदलने की भी कहानी, 10वीं में ‘वीणा’ से हो गईं ‘बीणा’ रेल एसपी बीणा कुमारी ने बताया कि बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी अच्छी थीं और उन्हें गाने का भी शौक था। गायन में रुचि और अच्छी आवाज के कारण माता-पिता ने उनका नाम ‘वीणा’ रखा था। दसवीं तक स्कूल और अन्य दस्तावेजों में उनका नाम वीणा ही रहा। लेकिन दसवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान एक शिक्षक ने स्कूल के रजिस्टर में उनका नाम ‘बीणा’ दर्ज कर दिया। इसके बाद बोर्ड से लेकर आगे की पढ़ाई और नौकरी के सभी दस्तावेजों में यही नाम चलता गया। आज पुलिस सेवा में इसी ‘बीणा कुमारी’ नाम से पहचान बनाने वाली अधिकारी के नाम की कहानी भी उनके जीवन के सफर का दिलचस्प हिस्सा है। जेल सर्विस से राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा सफर साल 1996 में जेल सर्विस से शुरू हुआ उनका करियर 1999 में बिहार पुलिस सेवा, 2019 में भारतीय पुलिस सेवा और अब राष्ट्रपति पुलिस पदक तक पहुंचा है। बीणा कुमारी का जन्म साल 1969 में सारण जिले के गरखा थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में हुआ। उनके पिता झारखंड के बोकारो में नौकरी करते थे। ऐसे में उनकी शुरुआती पढ़ाई से लेकर हायर एजुकेशन तक का अधिकांश समय बोकारो में ही बीता। बीणा कुमारी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही वर्दी पहनने का शौक था। इसी लगाव ने उन्हें पुलिस सेवा की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 1996 में उन्होंने जेल सर्विस में प्रोविजन ऑफिसर के रूप में नौकरी शुरू की। इसके बाद बिहार पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति मिली। 1999 में बिहार पुलिस सेवा, मुंगेर से शुरू हुआ पुलिसिंग का सफर फरवरी 1999 में बिहार पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति के बाद उन्होंने हजारीबाग पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में करीब एक साल की ट्रेनिंग की। ट्रेनिंग पूरा करने के बाद मुंगेर में रिजिनल ट्रेनिंग हुई और यहीं से उनकी पहली पोस्टिंग हुई। फरवरी 2002 में हवेली खड़गपुर, मुंगेर की SDPO के रूप में पोस्टिंग हुई। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने नक्सल ऑपरेशन, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान और विधि-व्यवस्था सुधार से जुड़े कार्यों में जिम्मेदारी निभाई। गोपालगंज से भागलपुर तक संभाली जिम्मेदारी दिसंबर 2004 में पुलिस उपाधीक्षक, गोपालगंज के पद पर तैनाती मिली। इसके बाद सितंबर 2006 में बिहार सैन्य पुलिस-10 में ASP के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यहां उन्होंने अकाउंट और ट्रेनिंग अफसर के रूप में काम किया। फरवरी 2009 में स्पेशल ब्रांच में ट्रांसफर हुआ। यहां अकाउंट अफसर के साथ अलग-अलग ब्रांच के प्रभारी के रूप में काम किया। दस्तावेजों के संरचनात्मक विकास से जुड़े कार्यों में भी योगदान दिया। जून 2012 में भागलपुर के सिटी एसपी के रूप में पोस्टिंग हुईं। यहां क्राइम कंट्रोल, इन्विस्टिगेशन, लॉ एंड ऑर्डर और अन्य संवेदनशील मामलों के डिस्पोजल की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद अगस्त 2015 में सुपौल की एसडीपीओ के रूप में तैनाती हुई। विजिलेंस में भी निभाई अहम भूमिका जनवरी 2017 में विजिलेंस में ASP के रूप में पोस्टिंग हुईं। यहां विजिलेंस और क्राइम से जुड़े कार्यों के साथ अलग-अलग ब्रांच की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद दिसंबर 2019 में इंडियन पुलिस सर्विस में शामिल हुईं। IPS में आने के बाद उनकी पहली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विजिलेंस एसपी के रूप में रही। इसके बाद अगस्त 2020 में कमजोर वर्ग की एसपी के पद पर तैनाती हुई। इस दौरान कमजोर वर्ग से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम किया। प्रशिक्षण और मानव बल प्रबंधन में भी किया काम जनवरी 2022 में बिहार सशस्त्र पुलिस-4, डुमरांव में पदस्थापित हुईं। यहां प्रशिक्षण व्यवस्था और मानव बल के बेहतर प्रबंधन पर काम किया। इसके बाद जनवरी 2024 में बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर में पदस्थापना हुई। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर करने और पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने पर उन्होंने काम किया। अप्रैल 2025 से वह रेल पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में इसी पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *