Abdul El-Sayed Pet Massacre: अमेरिका के मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद विवादों में घिर गए हैं। दरअसल, डेट्रॉयट के स्वास्थ्य निदेशक रहते हुए शहर के एनिमल कंट्रोल विभाग में बड़ी संख्या में कुत्तों और बिल्लियों की मौत के आंकड़े सामने आने के बाद उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने जहां इसे ‘पशु नरसंहार’ करार दिया है, वहीं पशु अधिकार संगठन PETA की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
हजारों जानवरों की मौत का यह मामला साल 2015 और 2016 का है। उस वक्त अब्दुल अल-सैयद डेट्रॉयट शहर के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख थे। ‘एनिमल केयर एंड कंट्रोल’ विभाग भी उन्हीं के अधीन आता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान 4,680 से अधिक कुत्तों और बिल्लियों को मार दिया गया।
अक्टूबर 2015 में ब्रिटनी रॉबर्ट्स नाम की एक पूर्व कर्मचारी ने विभाग के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने इस एनिमल शेल्टर को ‘बूचड़खाना’ करार दिया था। उनका आरोप था कि जानवरों को बेहद गंदी जगहों पर रखा जाता था। उन्हें समय पर खाना नहीं मिलता था। इलाज के अभाव में वे पिंजरों में ही तड़प-तड़प कर मर जाते थे। बाद में जुलाई 2016 में शहर प्रशासन ने इस विवाद को खत्म करने के लिए रॉबर्ट्स को 63,000 डॉलर का हर्जाना दिया था।
इन आरोपों के सामने आने के बाद लोग भड़क गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग जानवरों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली संस्था पेटा (PETA) की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं और जवाब मांग रहे हैं।
अब्दुल अल-सैयद के बचाव में उतरी टीम
विवाद बढ़ता देख अब अब्दुल अल-सैयद की चुनाव अभियान टीम बचाव की मुद्रा में आ गई है। उनका कहना है कि जब अब्दुल अल-सैयद ने पद संभाला था, तब शेल्टर की हालत पहले से ही बहुत खराब थी। साल 2015 में वहां से केवल 20% से 26% जानवर ही जीवित बच पाते थे।
टीम ने दावा किया कि अब्दुल अल-सैयद ने कई सुधार किए। इनमें कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी, एक नई निदेशक को काम पर रखना और जानवरों को एक बड़ी व बेहतर जगह पर शिफ्ट करना शामिल था। इसका नतीजा यह रहा कि 2016 के अंत तक जानवरों की लाइव-रिलीज रेट बढ़कर 62% हो गई। टीम के अनुसार, बाद में यह दर 80% तक पहुंच गई, यानी ज्यादातर जानवरों को गोद लेने के लिए नए घरों में भेज दिया गया।
डेट्रॉयट के तत्कालीन मेयर माइक डुग्गन ने भी माना था कि उस समय शहर दिवालिएपन और बजट की भारी कमी से जूझ रहा था, जिसका सीधा असर शेल्टर की सुविधाओं पर पड़ा था।


