स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तेजस्वी कुमार शर्मा शनिवार को सहरसा पहुंचे। उन्होंने सहरसा व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित झंडोत्तोलन कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने न्यायिक व्यवस्था, अधिवक्ताओं की समस्याओं और आम लोगों के लिए न्यायालयों की पहुंच को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। तेजस्वी कुमार शर्मा ने बताया कि उनका पैतृक घर बिहार के आरा जिले में है। लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि बिहार के अधिवक्ताओं-न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को करीब से समझा जाए। इसी उद्देश्य से उन्होंने सहरसा से अपने बिहार दौरे की शुरुआत की। उन्होंने 15 अगस्त को सहरसा में लगातार तीन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। स्कूली बच्चों को कानूनी विषयों की जानकारी दी उन्होंने सहरसा व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की, जहां उन्हें स्नेह और सम्मान मिला। न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें योग दिवस के अवसर पर पुनः सहरसा आने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद, उन्होंने एक विद्यालय का निरीक्षण किया और स्कूली बच्चों को उनके अधिकारों एवं कानूनी विषयों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। अधिवक्ता शर्मा ने सहरसा सदर थाना स्थित टीओपी-2 का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि देश को आजादी मिले 80 वर्ष हो चुके हैं। आजादी का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों और न्याय तक आसानी से पहुंच मिले। कोर्ट आम जनता के लिए पूरी तरह सुलभ हो उन्होंने जोर दिया कि न्यायालय आम जनता के लिए पूरी तरह सुलभ होना चाहिए। खासकर पीड़ितों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय व्यवस्था तक पहुंच आसान बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहरसा दौरे के दौरान उन्होंने इस समस्या को महसूस किया है और इसे लेकर भारत सरकार को अवगत कराने का प्रयास करेंगे। शर्मा ने बताया कि देशभर के 600 से अधिक न्यायालयों में आजादी के 80 वर्ष बाद भी कई मूलभूत समस्याएं मौजूद हैं। इन समस्याओं को कम करने और न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ एवं जनहितकारी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आम लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हो सके। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तेजस्वी कुमार शर्मा शनिवार को सहरसा पहुंचे। उन्होंने सहरसा व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित झंडोत्तोलन कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने न्यायिक व्यवस्था, अधिवक्ताओं की समस्याओं और आम लोगों के लिए न्यायालयों की पहुंच को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। तेजस्वी कुमार शर्मा ने बताया कि उनका पैतृक घर बिहार के आरा जिले में है। लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि बिहार के अधिवक्ताओं-न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को करीब से समझा जाए। इसी उद्देश्य से उन्होंने सहरसा से अपने बिहार दौरे की शुरुआत की। उन्होंने 15 अगस्त को सहरसा में लगातार तीन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। स्कूली बच्चों को कानूनी विषयों की जानकारी दी उन्होंने सहरसा व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की, जहां उन्हें स्नेह और सम्मान मिला। न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें योग दिवस के अवसर पर पुनः सहरसा आने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद, उन्होंने एक विद्यालय का निरीक्षण किया और स्कूली बच्चों को उनके अधिकारों एवं कानूनी विषयों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। अधिवक्ता शर्मा ने सहरसा सदर थाना स्थित टीओपी-2 का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि देश को आजादी मिले 80 वर्ष हो चुके हैं। आजादी का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों और न्याय तक आसानी से पहुंच मिले। कोर्ट आम जनता के लिए पूरी तरह सुलभ हो उन्होंने जोर दिया कि न्यायालय आम जनता के लिए पूरी तरह सुलभ होना चाहिए। खासकर पीड़ितों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय व्यवस्था तक पहुंच आसान बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहरसा दौरे के दौरान उन्होंने इस समस्या को महसूस किया है और इसे लेकर भारत सरकार को अवगत कराने का प्रयास करेंगे। शर्मा ने बताया कि देशभर के 600 से अधिक न्यायालयों में आजादी के 80 वर्ष बाद भी कई मूलभूत समस्याएं मौजूद हैं। इन समस्याओं को कम करने और न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ एवं जनहितकारी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आम लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हो सके।


