राजगढ़ से राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
Rajgarh Agriculture Independence Day Special: 15 अगस्त को जब पूरा देश तिरंगे के रंग में रंगा होगा, तब मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के खेत भी अपनी कहानी कहेंगे। यहां केसरिया रंग संतरे की मिठास में है, सफेद रंग लहसुन की पहचान में है और हरा रंग धनिए की खुशबू में हैं। ये तीन फसलें महज खेतों की उपज नहीं हैं, इनके साथ किसान की मेहनत, मिट्टी की ताकत और देशभर के बाजारों तक पहुंचती जिले की पहचान जुड़ी है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस पर राजगढ़ को खेतों के इन तीन रंगों से देखना भी आजादी के पर्व को अपने तरीके से महसूस करना है।
खेतों में दिखता है तिरंगा
15 अगस्त को आसमान में तिरंगा लहराएगा, लेकिन राजगढ़ की कृषि भूमि पर इसके तीन रंग पहले से ही दिखाई देते हैं। संतरे के बागों में केसरिया रंग, खेतों और मंडियों में सफेद लहसुन और दूर तक फैले धनिए की हरियाली जिले की अलग तस्वीर बनाती है। इन फसलों ने राजगढ़ को मालवा ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के कृषि बाजार में भी अलग पहचान दी है।
केसरिया रंग… संतरे की मिठास
राजगढ़ का संतरा अपने रंग, स्वाद और गुणवत्ता के कारण अलग पहचान रखता है। इसे मालवा का पीला सोना भी कहा जाता है। जिले से निकलने वाला संतरा दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के बाजारों तक पहुंचता है। इसकी मांग बांग्लादेश तक होने की बात भी किसान बताते हैं। पकने के बाद संतरे के बाग दूर से केसरिया रंग की चादर जैसे दिखाई देते हैं। संतरा उत्पादक किसान सतीश बैस कहते हैं कि राजगढ़ की मिट्टी और मौसम संतरे के लिए अनुकूल हैं। यहां विशेष मिठास वाला संतरा पैदा होता है। अच्छी गुणवत्ता और बाजार मिलने से किसानों को बेहतर उम्मीद रहती है।
सफेद रंग…लहसुन की पहचान
तिरंगे का सफेद रंग राजगढ़ के लहसुन में दिखाई देता है। जिले का लहसुन नीमच-मंदसौर से लेकर राजस्थान तक के बाजारों में अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। किसानों के अनुसार आकार, सफेदी और गुणवत्ता इसकी प्रमुख पहचान है। लहसुन उत्पादक किसान अनिल पाटीदार बताते हैं कि सही भाव मिलने पर यह फसल किसानों के लिए अच्छी आय का जरिया बन सकती है। इसकी सफेदी, आकार और गुणवत्ता ही राजगढ़ के लहसुन की पहचान बनी हुई है।
हरा रंग… धनिए की खुशबू
तिरंगे का हरा रंग राजगढ़ के रंगदार धनिए में नजर आता है। गहरी हरियाली, खास खुशबू और गुणवत्ता के कारण इसकी अलग मांग है। राजगढ़ से धनिया रामगंजमंडी, भवानीमंडी सहित देश के कई हिस्सों तक पहुंचता है। खेत से मंडी और फिर अलग-अलग बाजारों तक पहुंचने वाली इसकी खुशबू जिले की कृषि पहचान को और मजबूत करती है। धनिया उत्पादक किसान रवि कुमार पाटीदार के अनुसार रंगदार धनिए की सबसे बड़ी पहचान उसका घना हरा रंग और खुशबू है। बाजार में इसकी मांग बनी रहती है।
तीन रंग, एक पहचान
सहायक संचालक कृषि प्रहलादसिंह बारेला कहते हैं कि संतरा, लहसुन और धनिया राजगढ़ की कृषि विविधता की बड़ी ताकत हैं। ये फसलें किसानों की आय का आधार होने के साथ जिले को प्रदेश और देश के कृषि बाजार में अलग पहचान भी देती हैं। इस तरह राजगढ़ का तिरंगा केवल आसमान में नहीं लहराता। वह खेतों में उगता है, किसान के हाथों से मंडी तक पहुंचता है और देश के अलग-अलग बाजारों में अपनी पहचान बनाता है।


