जिले में खरीफ फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे गुरुवार से शुरू हो गया। 30 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान में जिले के 27 में से 22 प्रखंडों के 851 गांवों में 5 लाख 86 हजार 197 प्लॉट का सर्वे किया जाएगा। खेतों में लगी फसल का रिकॉर्ड अब कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जीपीएस, मोबाइल एप और सैटेलाइट के माध्यम से डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। सर्वे के लिए 502 सर्वेयर लगाए गए हैं। इन्हें दो चरणों में प्रशिक्षण देने के साथ प्रखंडवार प्लॉट भी आवंटित कर दिए गए हैं। सर्वेयर खेत में पहुंचकर प्लॉट की वास्तविक स्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही खेत में लगी फसल की तस्वीर भी मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड की जाएगी। खरीफ मौसम में जिले में धान, मक्का, गन्ना, अरहर, तिल समेत विभिन्न सब्जियों की खेती का सर्वे होगा। बागवानी व अन्य फसलों को भी डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। विभाग इस आंकड़े को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर फसल की स्थिति और उत्पादन का वास्तविक अनुमान तैयार करेगा। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदा में फसल क्षति का आकलन आसानी से किया जा सकेगा। किस किसान के किस प्लॉट में कौन सी फसल लगी थी, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से क्षति का आकलन और मुआवजा प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इससे फसल बीमा के क्लेम के निपटारे में भी सहूलियत होगी। डिजिटल रिकॉर्ड से वास्तविक किसान और उसके खेत की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इससे क्षतिपूर्ति के दौरान बिचौलियों द्वारा दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज कराने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मुआवजा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजने की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो सकेगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा भू-अभिलेख से लिंक किया जाएगा। इससे किसानों को केसीसी और बैंक लोन लेने के दौरान जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किसानों को सरकारी योजनाओं, अनुदान, बाजार और एमएसपी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। फसल के बाजार भाव में गिरावट होने पर किसानों को अलर्ट देने की व्यवस्था भी इससे जोड़ी जा सकेगी। जिले में खरीफ फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे गुरुवार से शुरू हो गया। 30 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान में जिले के 27 में से 22 प्रखंडों के 851 गांवों में 5 लाख 86 हजार 197 प्लॉट का सर्वे किया जाएगा। खेतों में लगी फसल का रिकॉर्ड अब कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जीपीएस, मोबाइल एप और सैटेलाइट के माध्यम से डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। सर्वे के लिए 502 सर्वेयर लगाए गए हैं। इन्हें दो चरणों में प्रशिक्षण देने के साथ प्रखंडवार प्लॉट भी आवंटित कर दिए गए हैं। सर्वेयर खेत में पहुंचकर प्लॉट की वास्तविक स्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही खेत में लगी फसल की तस्वीर भी मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड की जाएगी। खरीफ मौसम में जिले में धान, मक्का, गन्ना, अरहर, तिल समेत विभिन्न सब्जियों की खेती का सर्वे होगा। बागवानी व अन्य फसलों को भी डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। विभाग इस आंकड़े को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर फसल की स्थिति और उत्पादन का वास्तविक अनुमान तैयार करेगा। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदा में फसल क्षति का आकलन आसानी से किया जा सकेगा। किस किसान के किस प्लॉट में कौन सी फसल लगी थी, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से क्षति का आकलन और मुआवजा प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इससे फसल बीमा के क्लेम के निपटारे में भी सहूलियत होगी। डिजिटल रिकॉर्ड से वास्तविक किसान और उसके खेत की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इससे क्षतिपूर्ति के दौरान बिचौलियों द्वारा दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज कराने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मुआवजा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजने की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो सकेगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा भू-अभिलेख से लिंक किया जाएगा। इससे किसानों को केसीसी और बैंक लोन लेने के दौरान जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किसानों को सरकारी योजनाओं, अनुदान, बाजार और एमएसपी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। फसल के बाजार भाव में गिरावट होने पर किसानों को अलर्ट देने की व्यवस्था भी इससे जोड़ी जा सकेगी।


