अंबेडकरनगर में बुधवार देर शाम भाजपा की नई जिला कार्यसमिति की घोषणा के बाद संगठनात्मक फैसलों को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा पिछली जिला कमेटी में उपाध्यक्ष रहे डॉ. रजनीश सिंह को लेकर है। सदस्यता अभियान में अंबेडकरनगर जिले में नंबर-1 और अवध क्षेत्र में दूसरा स्थान हासिल करने के बावजूद उन्हें नई जिला कमेटी में जगह नहीं मिली है। इसे लेकर पार्टी के अंदर और बाहर तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। डॉ. रजनीश सिंह पिछली जिला कमेटी में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सदस्यता अभियान के दौरान उनकी सक्रियता का पार्टी स्तर पर भी उल्लेख हुआ था। जिले में सबसे अधिक सदस्य बनवाने वालों में उनका नाम शीर्ष पर रहा, जबकि अवध क्षेत्र में भी उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया था। ऐसे में माना जा रहा था कि नई कमेटी में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है, लेकिन नई सूची सामने आने के बाद उन्हें जगह नहीं मिली। राजनीतिक तौर पर रजनीश सिंह जलालपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के दावेदार भी माने जाते रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच संगठन की नई टीम से बाहर होना उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी के अंदर इसे सामान्य संगठनात्मक फेरबदल माना जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में इसके पीछे स्थानीय राजनीति और गुटीय समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। सदस्यता अभियान में जिले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले नेता को नई जिला कमेटी में जगह नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं के बीच भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि क्या संगठन में सक्रियता का पैमाना अलग है और राजनीतिक समीकरणों का पैमाना अलग। भाजपा की नई जिला कार्यसमिति घोषित होने के बाद यह मामला संगठनात्मक बदलाव से ज्यादा सियासी चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि सदस्यता अभियान में जिले में नंबर-1 और अवध क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद जिला कमेटी से बाहर हुए रजनीश सिंह आगे किस राजनीतिक भूमिका में नजर आते हैं।


