प्रयागराज में एनसीजेडसीसी द्वारा आयोजित ‘बाल रंग उत्सव’ में मंगलवार को बाल कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘शिक्षा में रंगमंच’ कार्यक्रम के तहत प्रस्तुत दो नाटकों ने साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर आधारित महत्वपूर्ण संदेश दिए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आभा त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि मनीष कुमार त्रिपाठी, बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पहली प्रस्तुति ‘युगधारा’ थी, जिसे चाचा नेहरू बालिका इंटर कॉलेज, बर्रा (कानपुर) के विद्यार्थियों ने नाट्य निर्देशक नीरज कुशवाहा के निर्देशन में मंचित किया। इस नाटक में भारतीय साहित्य के आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल की यात्रा को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया। सूरदास, तुलसीदास और रसखान जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं के साथ संगीत, नृत्य और अभिनय का सुंदर समन्वय देखने को मिला। प्रस्तुति में मां गंगा के प्रदूषण और दुर्दशा को भी संवेदनशील ढंग से दर्शाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। दूसरी प्रस्तुति ‘जामुन का पेड़’ रही, जिसका मंचन एल.एस. मेमोरियल स्कूल, बगौता (छतरपुर, मध्य प्रदेश) के विद्यार्थियों ने नाट्य निर्देशक शिवेंद्र शुक्ला के निर्देशन में किया। कृष्ण चंदर की प्रसिद्ध कहानी पर आधारित यह नाटक सरकारी लालफीताशाही और विभागीय प्रक्रियाओं पर तीखा व्यंग्य था। इसमें एक व्यक्ति के जामुन के पेड़ के नीचे दबे होने के बावजूद, उसे बचाने के बजाय सरकारी फाइलों के एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूमने की स्थिति को दर्शाया गया। नाटक ने व्यवस्था पर सवाल उठाया कि क्या सरकारी तंत्र में इंसान से ज्यादा अहम फाइलें हो गई हैं। बाल कलाकारों के सशक्त अभिनय, संवाद और मंचीय प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। समर सिंह यादव, प्राग्नेंद्र कुशवाहा, शैंकी यादव, राज पाठक और लवेश अहिरवार के अभिनय को विशेष रूप से पसंद किया गया।


