प्रधानाध्यापक ने नौकरी के साथ शुरू की केले की खेती:प्रति एकड़ कमा रहे करीब 3 लाख रुपए, 10-12 मजदूरों को दे रहे रोजगार

प्रधानाध्यापक ने नौकरी के साथ शुरू की केले की खेती:प्रति एकड़ कमा रहे करीब 3 लाख रुपए, 10-12 मजदूरों को दे रहे रोजगार

सीतामढ़ी में मेजरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी कला पंचायत के वार्ड संख्या-10 निवासी प्रधानाध्यापक बिपिन सिंह ने नौकरी के साथ आधुनिक खेती कर बेहतर आमदनी अर्जित करने की मिसाल पेश की है। वैज्ञानिक पद्धति से केले की खेती कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं। वर्तमान में उनके खेतों में 15 एकड़ में जी-9 प्रजाति के केले की फसल लहलहा रही है। इससे उन्हें प्रति एकड़ करीब 3 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है। बिपिन सिंह बताते हैं कि खेती के प्रति उनका लगाव पिता बिजली सिंह से मिला। उनके पिता वर्षों से ईख की सफल खेती करते रहे हैं। पिता की मेहनत और खेती से होने वाली आमदनी को देखकर उन्होंने भी आधुनिक कृषि को अपनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2018 में उन्होंने पहली बार 2.5 एकड़ जमीन में करीब 2700 केले के पौधे लगाए। पहले साल ही 7 लाख की आमदनी केले की खेती के पहले ही वर्ष बिपिन सिंह को करीब 7 लाख रुपए की आमदनी हुई। इसमें लगभग 2 लाख रुपए लागत के रूप में खर्च हुए। उन्हें बिहार सरकार की ओर से 37 हजार रुपए का अनुदान भी मिला। पहली फसल से मिली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाना शुरू किया। लगातार पांच वर्षों तक केले की खेती से हुई कमाई से उन्होंने चार एकड़ जमीन खरीदी। इसके अलावा पांच एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती का रकबा बढ़ाया। वर्तमान में वे कुल 15 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में प्रतिदिन 10 से 12 मजदूर काम करते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। सुबह 5 से 9 बजे तक खेत में रहते हैं बिपिन सिंह का कहना है कि खेती में सफलता हासिल करने के लिए किसान का खेत से जुड़ाव सबसे जरूरी है। वे रोज सुबह करीब 5 बजे खेत पहुंच जाते हैं और 9 बजे तक स्वयं फसल की निगरानी करते हैं। फसल की स्थिति, सिंचाई, रोग और कीट प्रबंधन पर वे लगातार नजर रखते हैं। केले के साथ वे सब्जियों की खेती भी करते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है और किसी एक फसल पर निर्भरता का जोखिम भी कम रहता है। अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उत्पादन के लिए वे मुख्य रूप से जी-9 (G-9) प्रजाति के केले के पौधों का ही उपयोग करते हैं। बिपिन सिंह की सफलता यह संदेश देती है कि नौकरी या अन्य पेशे के साथ भी वैज्ञानिक तरीके और सही प्रबंधन के जरिए खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी खेती को देखने और आधुनिक तकनीक की जानकारी लेने के लिए क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। सीतामढ़ी में मेजरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी कला पंचायत के वार्ड संख्या-10 निवासी प्रधानाध्यापक बिपिन सिंह ने नौकरी के साथ आधुनिक खेती कर बेहतर आमदनी अर्जित करने की मिसाल पेश की है। वैज्ञानिक पद्धति से केले की खेती कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं। वर्तमान में उनके खेतों में 15 एकड़ में जी-9 प्रजाति के केले की फसल लहलहा रही है। इससे उन्हें प्रति एकड़ करीब 3 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है। बिपिन सिंह बताते हैं कि खेती के प्रति उनका लगाव पिता बिजली सिंह से मिला। उनके पिता वर्षों से ईख की सफल खेती करते रहे हैं। पिता की मेहनत और खेती से होने वाली आमदनी को देखकर उन्होंने भी आधुनिक कृषि को अपनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2018 में उन्होंने पहली बार 2.5 एकड़ जमीन में करीब 2700 केले के पौधे लगाए। पहले साल ही 7 लाख की आमदनी केले की खेती के पहले ही वर्ष बिपिन सिंह को करीब 7 लाख रुपए की आमदनी हुई। इसमें लगभग 2 लाख रुपए लागत के रूप में खर्च हुए। उन्हें बिहार सरकार की ओर से 37 हजार रुपए का अनुदान भी मिला। पहली फसल से मिली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाना शुरू किया। लगातार पांच वर्षों तक केले की खेती से हुई कमाई से उन्होंने चार एकड़ जमीन खरीदी। इसके अलावा पांच एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती का रकबा बढ़ाया। वर्तमान में वे कुल 15 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में प्रतिदिन 10 से 12 मजदूर काम करते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। सुबह 5 से 9 बजे तक खेत में रहते हैं बिपिन सिंह का कहना है कि खेती में सफलता हासिल करने के लिए किसान का खेत से जुड़ाव सबसे जरूरी है। वे रोज सुबह करीब 5 बजे खेत पहुंच जाते हैं और 9 बजे तक स्वयं फसल की निगरानी करते हैं। फसल की स्थिति, सिंचाई, रोग और कीट प्रबंधन पर वे लगातार नजर रखते हैं। केले के साथ वे सब्जियों की खेती भी करते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है और किसी एक फसल पर निर्भरता का जोखिम भी कम रहता है। अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उत्पादन के लिए वे मुख्य रूप से जी-9 (G-9) प्रजाति के केले के पौधों का ही उपयोग करते हैं। बिपिन सिंह की सफलता यह संदेश देती है कि नौकरी या अन्य पेशे के साथ भी वैज्ञानिक तरीके और सही प्रबंधन के जरिए खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी खेती को देखने और आधुनिक तकनीक की जानकारी लेने के लिए क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।  

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