जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जालसाज ने खुद को पीड़ित का दोस्त बताकर निजी अस्पताल में रिश्तेदार के भर्ती होने की बात कही और मदद के नाम पर QR कोड के जरिए 99 हजार रुपए की ठगी कर ली। पीड़ित ने गढ़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शक्ति नगर निवासी 56 वर्षीय राजेश द्विवेदी शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 25 जुलाई की शाम उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को उनका दोस्त ‘मिश्रा’ बताया। उसने कहा कि उसका एक रिश्तेदार निजी अस्पताल में भर्ती है और उसे तत्काल पैसों की जरूरत है। जालसाज ने राजेश से कहा कि वह पहले उनके खाते में रकम भेजेगा, जिसे बाद में QR कोड के जरिए ट्रांसफर करना होगा। कुछ देर बाद राजेश के मोबाइल पर SBI के फर्जी क्रेडिट मैसेज आने लगे। इनमें खाते में 20 हजार रुपए जमा होने की जानकारी दी गई थी। मैसेज को सही मानकर राजेश ने अपने दोस्त कमलेश पारिक के खाते में रकम ट्रांसफर की और उससे ठग द्वारा भेजे गए QR कोड को स्कैन करवाकर 20 हजार रुपए भिजवा दिए। इसके बाद इसी तरीके से दोबारा 20 हजार रुपए भेजे गए। इस तरह कुल 40 हजार रुपए ट्रांसफर हो गए। इसके बाद जालसाज ने 59 हजार रुपए जमा होने का एक और फर्जी मैसेज भेजा और रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा। राजेश ने अपने बेटे हर्षित द्विवेदी के माध्यम से ठग द्वारा दिए गए नंबर पर रकम भिजवा दी। इसके बाद जब ठग ने 70 हजार रुपए और भेजने को कहा, तो राजेश को शक हुआ। एटीएम से बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर खुला राज संदेह होने पर राजेश तत्काल एटीएम पहुंचे और बैंक स्टेटमेंट निकलवाया। स्टेटमेंट देखकर उनके होश उड़ गए। खाते में ठग द्वारा बताई गई कोई रकम जमा नहीं हुई थी। इसके उलट राजेश और उनके बेटे के खातों से कुल 99 हजार रुपए निकल चुके थे। ठगी का पता चलने के बाद राजेश ने गढ़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मोबाइल नंबर और QR कोड से जुड़े विवरण के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक में रकम जमा होने के फर्जी मैसेज पर भरोसा न करें और QR कोड स्कैन कर भुगतान करने से पहले लेनदेन की पुष्टि जरूर करें।

