संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा मांग पत्र:सुल्तानपुर में ‘जेल भरो’ आंदोलन के तहत उठाई गईं मांगें, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा मांग पत्र:सुल्तानपुर में ‘जेल भरो’ आंदोलन के तहत उठाई गईं मांगें, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर सोमवार को सुल्तानपुर में ‘जेल भरो’ आंदोलन और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान मोर्चा के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक विस्तृत मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से दोपहर 1 बजे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन मिला। मोर्चा ने ज्ञापन के जरिए कृषि, आर्थिक और सामाजिक संकटों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन के समय दिए गए लिखित आश्वासनों को तत्काल लागू करने की मांग की। मोर्चा की प्रमुख मांगों में सभी फसलों के लिए C2+50% के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही, ग्रामीण ऋणग्रस्तता समाप्त करने के लिए व्यापक कर्ज माफी लागू करने की मांग की गई। किसानों ने आत्महत्या पीड़ित परिवारों को ₹25 लाख का मुआवजा और पुनर्वास प्रदान करने की भी मांग की। उन्होंने कृषि, उद्योग और श्रमिकों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अमेरिका/अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों को रद्द करने तथा कृषि उपज के शुल्क मुक्त आयात पर रोक लगाने की अपील की। मोर्चा ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और सभी श्रमिकों के लिए ₹42,000 प्रति माह का वैधानिक न्यूनतम वेतन तय करने की मांग की। मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिनों के काम की गारंटी और न्यूनतम ₹700 प्रतिदिन की मजदूरी देने की भी बात कही गई। 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी किसानों को ₹10,000 प्रति माह की सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी। इसके अतिरिक्त, विद्युत निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को तत्काल वापस लेने की अपील की गई। जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट-समर्थक ‘भूमि पूलिंग’ को रोकने पर जोर दिया गया। मोर्चा ने LARR अधिनियम 2013, वन अधिकार अधिनियम 2006 और पेसा 1996 के तहत भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग की। उर्वरकों की कमी और कालाबाजारी समाप्त कर सब्सिडी बहाल करने तथा व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र की फसल व पशुधन बीमा योजना स्थापित करने की भी मांग की गई। अंत में, अनुसंधान एवं विकास के लिए केंद्रीय बजट का 6%और शिक्षा के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6%आवंटित करने की मांग की गई। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के निजीकरण और साइलो संचालन में एकाधिकार पर रोक लगाने की भी अपील की गई। ज्ञापन सौंपने के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष शारदा प्रसाद पांडेय, कैलाश नाथ तिवारी (अ.भा. किसान सभा), राधेश्याम वर्मा (AIKS), मो० सैफ अली (अ.भा. किसान सभा), राम कृपाल सिंह, बाबूराम यादव, राम विशाल मौर्य (भा.कि.यू. टिकैत गुट) और छोटेलाल यादव (भा.कि.यू. अंबावता गुट) समेत कई प्रमुख किसान नेता व कार्यकर्ता

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