गिरिडीह में आदिवासी महोत्सव को लेकर निकली रैली:नगर भवन में दिखी संस्कृति-परंपरा की झलक, पारंपरिक वेशभूषा-नृत्य बने आकर्षण का केंद्र

गिरिडीह में आदिवासी महोत्सव को लेकर निकली रैली:नगर भवन में दिखी संस्कृति-परंपरा की झलक, पारंपरिक वेशभूषा-नृत्य बने आकर्षण का केंद्र

गिरिडीह में रविवार को झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के आयोजन को लेकर आदिवासी छात्र संघ की ओर से भव्य रैली निकाली गई। झंडा मैदान से शुरू हुई यह रैली शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से गुजरते हुए नगर भवन पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, छात्र-छात्राएं और आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। प्रतिभागियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ‘शिबू सोरेन अमर रहें’, ‘भगवान सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव अमर रहें’, ‘जय-जय आदिवासी’ और ‘आदिवासी एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे। पूरे रास्ते समाज के महापुरुषों को याद करते हुए जोशीले नारे लगाए गए। पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य बने आकर्षण का केंद्र रैली में पारंपरिक वेशभूषा में शामिल युवक-युवतियां मुख्य आकर्षण रहे। मांदर और नगाड़े की थाप पर लोकनृत्य करते हुए प्रतिभागियों ने माहौल को उत्साह से भर दिया। नगर भवन पहुंचने के बाद सभी लोग महोत्सव के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान महापौर प्रमीला मेहरा, जिला अध्यक्ष संजय सिंह, उप महापौर सुमित कुमार, उपायुक्त रामनिवास यादव और पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रदर्शनी में झलकी परंपरा महोत्सव में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया गया। पारंपरिक और पौराणिक लोकनृत्य, नाट्य मंचन और जनजातीय खान-पान के जरिए समाज की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया गया। नगर भवन परिसर में स्थानीय कला, हस्तकला और हैंडलूम की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहां विभिन्न स्टॉलों पर पारंपरिक कारीगरी को प्रदर्शित किया गया। आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और पहचान को मजबूत करने का संदेश दिया गया। गिरिडीह में रविवार को झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के आयोजन को लेकर आदिवासी छात्र संघ की ओर से भव्य रैली निकाली गई। झंडा मैदान से शुरू हुई यह रैली शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से गुजरते हुए नगर भवन पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, छात्र-छात्राएं और आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। प्रतिभागियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ‘शिबू सोरेन अमर रहें’, ‘भगवान सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव अमर रहें’, ‘जय-जय आदिवासी’ और ‘आदिवासी एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे। पूरे रास्ते समाज के महापुरुषों को याद करते हुए जोशीले नारे लगाए गए। पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य बने आकर्षण का केंद्र रैली में पारंपरिक वेशभूषा में शामिल युवक-युवतियां मुख्य आकर्षण रहे। मांदर और नगाड़े की थाप पर लोकनृत्य करते हुए प्रतिभागियों ने माहौल को उत्साह से भर दिया। नगर भवन पहुंचने के बाद सभी लोग महोत्सव के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान महापौर प्रमीला मेहरा, जिला अध्यक्ष संजय सिंह, उप महापौर सुमित कुमार, उपायुक्त रामनिवास यादव और पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रदर्शनी में झलकी परंपरा महोत्सव में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया गया। पारंपरिक और पौराणिक लोकनृत्य, नाट्य मंचन और जनजातीय खान-पान के जरिए समाज की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया गया। नगर भवन परिसर में स्थानीय कला, हस्तकला और हैंडलूम की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहां विभिन्न स्टॉलों पर पारंपरिक कारीगरी को प्रदर्शित किया गया। आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और पहचान को मजबूत करने का संदेश दिया गया।  

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