कामदा एकादशी का व्रत आज, द्विपुष्कर योग का शुभ संयोग:नारायण के साथ महादेव की होगी पूजा, पापों से मिलेगी मुक्ति

कामदा एकादशी का व्रत आज, द्विपुष्कर योग का शुभ संयोग:नारायण के साथ महादेव की होगी पूजा, पापों से मिलेगी मुक्ति

कामदा एकादशी का व्रत आज रविवार को होगा। मृगशिरा नक्षत्र, हर्षण योग के साथ द्विपुष्कर योग का उत्तम संयोग बन रहा है। सावन महीने में एकादशी तिथि और आज के दिन शिववास का संयोग होने से भगवान नारायण के साथ महादेव की पूजा-अर्चना होगी। एकादशी का व्रत करने से काम भावना से हुए पापों से मुक्ति मिलती है। एकादशी का पारण कल 10 अगस्त सोमवार की सुबह 05:29 बजे के बाद दूब से होगा। आचार्य राकेश झा ने बताया कि शास्त्रों में काम, क्रोध और लोभ इन्हें सभी पापों का मूल जड़ माना गया है। इससे अनजाने में कई बार पाप हो जाता है। ऐसे ही पापों से मुक्ति के लिए शास्त्रों में इस एकादशी के व्रत को करने का विधान बताया गया है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति साल में आने वाली कुल 24 एकादशी का व्रत रखता है वह धरती पर सांसारिक भोग और सुख प्राप्त करके मृत्यु के बाद उत्तम लोकों के स्थान पाता है। कामदा एकादशी व्रत का पौराणिक महत्व ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने विष्णु पुराण के हवाले से बताया कि कामदा एकादशी व्रत का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है। कामदा एकादशी व्रत का पालन सच्ची श्रद्धा के साथ करने से सर्व मनोकामना पूर्ति का वरदान मिलता है। आज के दिन सात्विक जीवन, विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ, सत्यनारायण पूजा, भागवत पुराण, भजन, जाप आदि करने से जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देते है।
कामदा एकादशी का आध्यात्मिक कथा प्राचीन काल में भोगीपुर नगर में पुण्डरीक नामक नाग राज करता था। इनके दरबार में गायन और वादन में निपुण किन्नर-गंधर्व रहा करते थे। एक दिन ललित नाम का गन्धर्व दरबार में गायन कर रहा था। अचानक उसे अपनी पत्नी की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय और ताल बिगड़ गया। इससे नाराज होकर पुण्डरीक ने ललित को राक्षस का श्राप दे दिया। ललित के राक्षस बन जाने पर उसकी पत्नी ललिता दुःखी रहने लगी। एक दिन वन में ललिता को ऋष्यमूक ऋषि मिले। इन्होंने ललिता के दुःख को जानकर चैत्र शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने ऋषि के बताए नियम के अनुसार व्रत पूरा किया। इसके बाद व्रत का फल अपने पति ललित को दे दिया। इससे ललित वापस राक्षस से गंधर्व रूप में लौट आया। इस व्रत के पुण्य से ललित और ललिता दोनों को उत्तम लोक में भी स्थान प्राप्त हुआ। कामदा एकादशी का व्रत आज रविवार को होगा। मृगशिरा नक्षत्र, हर्षण योग के साथ द्विपुष्कर योग का उत्तम संयोग बन रहा है। सावन महीने में एकादशी तिथि और आज के दिन शिववास का संयोग होने से भगवान नारायण के साथ महादेव की पूजा-अर्चना होगी। एकादशी का व्रत करने से काम भावना से हुए पापों से मुक्ति मिलती है। एकादशी का पारण कल 10 अगस्त सोमवार की सुबह 05:29 बजे के बाद दूब से होगा। आचार्य राकेश झा ने बताया कि शास्त्रों में काम, क्रोध और लोभ इन्हें सभी पापों का मूल जड़ माना गया है। इससे अनजाने में कई बार पाप हो जाता है। ऐसे ही पापों से मुक्ति के लिए शास्त्रों में इस एकादशी के व्रत को करने का विधान बताया गया है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति साल में आने वाली कुल 24 एकादशी का व्रत रखता है वह धरती पर सांसारिक भोग और सुख प्राप्त करके मृत्यु के बाद उत्तम लोकों के स्थान पाता है। कामदा एकादशी व्रत का पौराणिक महत्व ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने विष्णु पुराण के हवाले से बताया कि कामदा एकादशी व्रत का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है। कामदा एकादशी व्रत का पालन सच्ची श्रद्धा के साथ करने से सर्व मनोकामना पूर्ति का वरदान मिलता है। आज के दिन सात्विक जीवन, विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ, सत्यनारायण पूजा, भागवत पुराण, भजन, जाप आदि करने से जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देते है।
कामदा एकादशी का आध्यात्मिक कथा प्राचीन काल में भोगीपुर नगर में पुण्डरीक नामक नाग राज करता था। इनके दरबार में गायन और वादन में निपुण किन्नर-गंधर्व रहा करते थे। एक दिन ललित नाम का गन्धर्व दरबार में गायन कर रहा था। अचानक उसे अपनी पत्नी की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय और ताल बिगड़ गया। इससे नाराज होकर पुण्डरीक ने ललित को राक्षस का श्राप दे दिया। ललित के राक्षस बन जाने पर उसकी पत्नी ललिता दुःखी रहने लगी। एक दिन वन में ललिता को ऋष्यमूक ऋषि मिले। इन्होंने ललिता के दुःख को जानकर चैत्र शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने ऋषि के बताए नियम के अनुसार व्रत पूरा किया। इसके बाद व्रत का फल अपने पति ललित को दे दिया। इससे ललित वापस राक्षस से गंधर्व रूप में लौट आया। इस व्रत के पुण्य से ललित और ललिता दोनों को उत्तम लोक में भी स्थान प्राप्त हुआ।  

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