दिव्यांग मां के संघर्ष की जीत:निजी स्कूल ने बेटे की मुफ्त शिक्षा का उठाया जिम्मा, खबर सामने आते ही प्रशासन और शिक्षा विभाग सक्रिय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक दिव्यांग मां के संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आ गया। आर्थिक तंगी और दस्तावेजी त्रुटि के कारण बेटे की पढ़ाई को लेकर परेशान परिवार को अब बड़ी राहत मिली है। क्षेत्र के एक निजी स्कूल ने बच्चे की पूरी शिक्षा निशुल्क कराने की जिम्मेदारी उठाई है। मामला ग्राम पंचायत सारबहरा के वार्ड नंबर 10 स्थित सरकारी टोला निवासी रेशमा वंशकार का है। तीन फीट की दिव्यांग रेशमा वंशकार और उनके पति मुकेश वंशकार अपने बेटे शौर्य वंशकार के बेहतर भविष्य के लिए उसे आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाना चाहते थे। आय प्रमाण पत्र की गलती बनी बाधा परिवार के अनुसार, पटवारी द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र में उनकी वास्तविक आय से अधिक 80 हजार रुपए वार्षिक आय दर्ज कर दी गई थी। इसी वजह से शौर्य का आरटीई के तहत प्रवेश नहीं हो पा रहा था और परिवार लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा था। मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। पेंड्रारोड तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल ने आय प्रमाण पत्र में जल्द सुधार कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रमाण पत्र में संशोधन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। शिक्षा विभाग की पहल से मिली राहत इसी दौरान जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी की पहल पर क्षेत्र के निजी विद्यालय अमिता शिक्षा निकेतन ने परिवार की मदद के लिए आगे कदम बढ़ाया। स्कूल के प्राचार्य पार्थ चट्टोपाध्याय और वाइस प्रिंसिपल मोनी चट्टोपाध्याय ने शौर्य वंशकार को कक्षा दूसरी में प्रवेश दे दिया। स्कूल प्रबंधन ने सिर्फ प्रवेश ही नहीं दिया, बल्कि बच्चे की पूरी शिक्षा निशुल्क कराने का भी निर्णय लिया है। मां का सपना हुआ पूरा बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाने का सपना संजोए बैठी दिव्यांग मां रेशमा वंशकार के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। आर्थिक परेशानियों और सरकारी दस्तावेजों की त्रुटियों के बीच जो सपना अधूरा लग रहा था, वह अब पूरा होता नजर आ रहा है। परिवार ने शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के प्रति आभार जताया है। वहीं, इस पहल को क्षेत्र में संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

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