Best Time To Visit Harsil: अगर आप उत्तराखंड में ऐसी शांत और खूबसूरत जगह तलाश रहे हैं, जहां पहाड़ों की भीड़भाड़ और ट्रैफिक से दूर सुकून के पल बिताए जा सकें, तो हर्षिल वैली (Harsil Valley) आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकती है। गढ़वाल हिमालय में स्थित यह घाटी अपनी बर्फ से ढकी चोटियों, सेब के बागों और भागीरथी नदी के मनमोहक दृश्यों के लिए मशहूर है।
हर्षिल घाटी कैसे पहुंचें? (How to reach Harsil Valley)
देहरादून, ऋषिकेश और उत्तरकाशी से आप साझा टैक्सी, निजी टैक्सी या बस लेकर हर्षिल घाटी पहुंच सकते हैं। बता दें, हर्षिल के लिए कोई सीधी ट्रेन या फ्लाइट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सबसे निकट हवाई मार्ग के लिए देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डा के लिए अपने शहर से कनेक्टिंग या सीधी फ्लाइट ले सकते हैं।
वहीं, ट्रेन द्वारा हर्सिल घाटी पहुंचने के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून हैं, जहां के लिए आप अपने शहर से टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा, बस द्वारा यहां पहुंचने के लिए अपने शहर से डायरेक्ट बस देहरादून, हरिद्वार या ऋषिकेश के लिए ले सकते हैं और फिर यहं से टैक्सी या दूसरी बस से घाटी पहुंच सकते हैं।
Harsil Valley घूमने का बेस्ट टाइम (Best time to visit Harsil Valley)
Uttarakhand Tourism के अनुसार, सर्दियों में यहां भारी बर्फबारी होती है, इसलिए हर्षिल घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से अक्टूबर का होता है।
हर्षिल वैली में घूमने की जगहें (Places to visit in Harsil Valley)
“भारत का मिनी स्विट्जरलैंड” कहे जाने वाले हर्षिल वैली में आप घाटी के बीचों-बीच शांति से समय बिताने के लिए बना हर्षिल विलेज जा सकते हैं। इसके अलावा हर्षिल से थोड़ा आगे मुखबा या मुखवा गांव है, जो अपनी संस्कृति के लिए मशहूर है इसे एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके अलावा, आप सेब के बागों को देखने के लिए धराली जा सकते हैं या पहाड़ों के बीच सात जुड़ी हुई झीलें देखने के लिए सातताल ट्रैकिंग करके जा सकते हैं।
हर्षिल वैली एक्सप्लोर कैसे करें (How to explore Harsil Valley)
अगर आप किसी जगह को लोकल की तरह एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं या फिल्में देखने के शौकीन हैं, तो यहां जाने के बाद आपको राज कपूर की मशहूर फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ याद आ जाएगी। इस फिल्म के कई सीन यहीं शूट हुए थे। ऐसे में आप फिल्म में दिखाए गए सीन की तरह सेब के बागों में घूमने के साथ ही, नदी के किनारे बैठकर खाना खाते हुए बर्फ से ढके पहाड़ों की चोटियों को देख सकते हैं, या स्थानीय लोगों से बातें करके वहां के रहन-सहन को जानते हुए चाय की चुस्की लेते हुए भागीरथी नदी की आवाज सुन सकते हैं।
इसके अलावा, अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो
का पारंपरिक गढ़वाली व्यंजन मंडुआ की रोटी, काफुली (Kafuli), चैनसू (Chainsoo) और झंगोरा की खीर (Jhangora Kheer) जैसे गढ़वाली खाने को ट्राई कर सकते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख इंटरनेट की जानकारी पर आधारित है। कृपया यात्रा से पहले आधिकारिक वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर से तथ्यों की पुष्टि करने के बाद ही ट्रिप प्लान करें।


