जयपुर पटाखा फैक्ट्री हादसा: रोते-रोते बोलीं नाजमीन- मेरे बेटे का क्या कसूर? वह तो सिर्फ पानी देने गया था

जयपुर पटाखा फैक्ट्री हादसा: रोते-रोते बोलीं नाजमीन- मेरे बेटे का क्या कसूर? वह तो सिर्फ पानी देने गया था

Jaipur Factory Blast News: जयपुर के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र के करीम नगर तलाई इलाके में मंगलवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया। एक मकान में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में अचानक आग लगने से आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य झुलस गए।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय परिसर में बड़ी मात्रा में पटाखे रखे हुए थे। साथ ही 50 किलोग्राम से अधिक बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मौजूद थी। विस्फोटक सामग्री के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।

जल गईं कई परिवारों की उम्मीदें, सपने और भविष्य

खोह नागोरियान स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट केवल लोगों की जान ही नहीं ले गया, बल्कि कई परिवारों की उम्मीदें, सपने और भविष्य भी अपने साथ ले गया। हादसे के बाद अस्पताल से लेकर मुर्दाघर तक ऐसा मातम पसरा था कि हर आंख नम हो उठी, जिन परिवारों के सदस्य सुबह रोजी-रोटी कमाने के लिए घर से निकले थे, उनके परिजन शाम तक उनकी सलामती की दुआ करते रहे, लेकिन बदले में मिली सिर्फ मौत की खबर।

अस्पताल परिसर में रोते-बिलखते परिजनों की चीखें माहौल को और दर्दनाक बना रही थीं। कोई अपने बेटे का नाम पुकार रहा था तो कोई भाई के लौट आने की उम्मीद में हर एंबुलेंस और स्ट्रेचर की ओर दौड़ रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकांश मजदूर गरीब परिवारों से थे, जो रोजी-रोटी की मजबूरी में यहां काम करने आते थे।

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हादसे की दर्दनाक कहानी

इस हादसे की सबसे दर्दनाक कहानियों में से एक बिलाल खान और उनके छोटे भाई आजिम खान की है। 18 वर्षीय आजिम पिछले दो वर्षों से इस फैक्ट्री में काम कर रहा था। परिवार की आर्थिक मजबूरी ने उसे स्कूल की जगह काम की दुनिया में धकेल दिया था।

28 वर्षीय बिलाल खान भी हादसे में जान गंवा बैठे। वह माता-पिता और सात भाइयों वाले परिवार में सबसे बड़े थे। उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें एक की उम्र एक वर्ष और दूसरी की तीन वर्ष है। परिजनों ने बताया कि बिलाल पहले सिलाई का काम करते थे. लेकिन काम में मंदी आने के बाद रोजगार की तलाश कर रहे थे।

हादसे वाले दिन ही वह पहली बार अपने छोटे भाई के साथ फैक्ट्री में काम करने पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि नया रोजगार मिलने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन नौकरी के पहले ही दिन मौत ने उन्हें अपने आगोश में ले लिया।

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नाजमीन का दर्द…मेरे बेटे का क्या कसूर

करीम नगर निवासी नाजमीन का दर्द सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उनका बेटा मोहम्मद रब्बिल फैक्ट्री में काम भी नहीं करता था। वह सिर्फ पानी की बोतल लेकर वहां गया था। नाजमीन रोते हुए बार-बार यही कह रही थीं, मेरा बेटा क्या कसूर कर बैठा था? वह तो सिर्फ पानी देने गया था।

16 वर्षीय रब्बिल परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। उसके पिता सिकंदर ट्रांसपोर्ट नगर में टायर की छोटी दुकान चलाते हैं। पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे परिवार पर यह दुख पहाड़ बनकर टूटा है।

समीर था पूरे परिवार का सहारा

फैक्ट्री हादसे में जान गंवाने वाला 20 वर्षीय मोहम्मद समीर अपने परिवार की सबसे बड़ी संतान था। परिवार में माता-पिता, दो छोटे भाई और एक बहन हैं। घर की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा समीर के कंधों पर था। पड़ोसियों के अनुसार, वह बेहद जिम्मेदार और मेहनती युवक था।

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